मंगलवार, 15 सितंबर 2026

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और सफ़ाई....एक म्यान में दो तलवारें कभी रही हैं?

कल गणेश चतुर्थी का शुभ-पर्व था …और मैंने सोचा कि सुबह सुबह जूहू बीच ही हो कर आया जाए…सुबह ६-७ बजे ही हो कर आ गया ….

जहां से मैं जुहू बीच पर दाखिल हुआ वहां पर यह बाहर से आता पानी समंदर में जाता देख कर चिंता हुई …मैंने अपने पिछले एक ब्लॉग में भी यह बात लिखी थी …लेकिन आज तो बाहर से आने वाला पानी इतनी तेज़ी से बह रहा था कि उस को जवान लोग ही कूद कर क्रॉस कर रहे थे …बुड्ढों के बस की बात न थी …


जुहू बीच पर थोड़ा सा टहलना शुरु किया तो मुझे लगा कि आज तो इतनी गंदगी नहीं है …गंदगी जो समंदर हमें वापिस लौटा जाता है …वह वाली गंदगी …


लेकिन इतने सारे कौवे देख कर कुछ अलग सा लगा ..बहुत ही ज़्यादा कौवे थे …यही लगा कि होगा वहां फैंका हुआ उन के खाने का कुछ ….


लेकिन यह क्या, सामने यह लंबी सी रोड जुहू बीच पर यह क्या बन रहा है ? ..जी हां, यह कोस्टल रोड बन रही है ..बांद्रा से वर्सोवा तक ….हमारी बिल्डिंग जो सी-फेसिंग है …वहां से भी यह अब इस के निर्माण का काम दिखाई देता है ….अभी तो यह काम ही दिखाई देता है ..लेकिन जब कुछ १-२ साल में इस रोड पर सरपट चार पहिया वाहन दौड़ने लगेंगे तो फिर कैसे दिखेगा….कैसे दिखेगा समंदर का यह किनारा …यह तो वक्त ही बताएगा…


हमारी बॉलकनी से समंदर का कुछ ऐसा मंज़र दिख रहा था आज शाम... सामने समंदर के अंदर काम चल रहा है ...

हां, मैं यह तो भूल ही गया था कि कोस्टल रोड हमारे सामने से गुज़रती हुई आगे जुहू बीच से होती हुई तो वर्सोवा तक जाएगी…


लेकिन कल जैसे ही जुहू बीच पर भी चल रहा इस कोस्टल रोड (समुद्र तटीय रोड़) का काम चलता देखा तो एक दम से ध्यान आ गया ….एक बार वहां भी जब यह रोड़ चालू हो जाएगी और वाहन दौडने लगेंगे तो कैसा लगेगा…यह समय ही बताएगा….


अभी मुझे लिखते वक्त ख्याल आ रहा है कि जब यह कोस्टल रोड वर्ली से नरीमन प्वाईंट तक बनी थी , जिस का काफी हिस्सा समंदर के नीचे बना है …तो यही लगता था कि व्यू खत्म हो गया..लेकिन अब वहां पर इतना बढ़िया पोमरनेड तैयार हो गया है कि वहां घूम कर मज़ा आ जाता है …कुछ दिन पहले मैं हाजी अली और महालक्ष्मी मंदिर के पीछे से होते हुए प्रोमेनेड पर टहला तो बहुत बढ़िया लगा….एक दम साफ, सुंदर …और खूबसूरत नज़ारों से भरा हुआ…देखता हूं फोटो दिखती है तो लगाता हूं …)


अभी तो जुहू बीच पर ही घूम लें ..सुबह सुबह आलस त्याग कर जब आया ही हूं तो चलिए, घूमते हैं…


हां, मैं थोड़ा आगे चल कर गया तो देखा कि कबूतर भी वहां पर बहुत से हैं ….


और गंदगी भी तो थी ही ….लेकिन बहुत से स्वच्छता कर्मचारी जी-जान लगा कर सफाई कर रहे थे ….आज से तो गणपति विसर्जन भी शुरू हो जाएगा….


पूरी व्यवस्था बढ़िया लगी ….पुलिस का इंतजाम, वॉच-टावर पर बैठे तैराक, रिस्क्यू टीम, स्वच्छता कर्मी…सब कुछ एक दम तैयार ….


एक जेसीबी टाइप मशीन भी दिखी …कचरा इतना इक्ट्ठा हो जाता होगा तो कैसे उसे ट्राली पर डाला जाए…ट्राली भी चल रही थी …और एक मशीन कल मैंने पहली बार देखी जो साफ रेत पर चल रही थी और रेत के नीचे दबा कचरा निकाल रही थी ….


                                               इस के आगे सरकारें क्या कर लेंगी.....गंदगी फैलाने वाले भी तो सुधरें!

एक काम करता हूं ..सारी तस्वीरें ही यहां लगा देता हूं और उन के नीचे कट्-लाईन लिख देता हूं ….वैसे भी ज़्यादा लिखने का आज मूड नहीं है …एक-डेढ़ महीने बाद अगर ब्लॉग लिखा जाएगा तो यही कुछ होगा ….बस, ऐसे ही यह लिखने वाला काम टलता रहता है ….


एक ख्याल……..मेरा आज का विचार यही है कि हम कुछ भी कर लें, कितने भी तरह के प्लास्टिक ले आएं…मोटे भी, और बायोकम्पोस्टेबल भी …कुछ भी …लेकिन जब तक हम लोग सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद नहीं करेंगे तब तक कुछ होने वाला नहीं है ………बस, स्वच्छता अभियानों के दौरान बढ़िया बढ़िया झाड़ू पकडे़ हुए, गिरे हुए दस बीस पत्तों के आगे फोटो-शूट ही होते रहेंगे ……सफाई संभव ही नहीं है जब तक यह सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैन नहीं हो जाता ….बैन तो है लेकिन फिर भी कितना बंद है, कितना चालू …यह कौन नहीं जानता ……हर तरफ़ वही खतरनाक प्लास्टिक की पन्नियों में सब कुछ बिक रहा है ..खाने पीने का सारा सामान, सब्जियां, पकी हुई दालें, सब्जियां, दूध, चाय …सब कुछ इन में ही हमें मिल रहा है …


जब तक ये सिगंल यूज़ प्लास्टिक हमें दिखना बंद नहीं हो जाएगा, इस गंदगी, इस पर्यावरण का कुछ नहीं हो सकता…….यह हम सब जानते हैं लेकिन केले, सेब, करेले, गोभी, अरबी लेते क्यों भूल जाते हैं…..


और इस की एक उदाहरण मैं हूं ….आज मैंने एक दुकान से तीन चीज़ें ली, यही जो ऊपर लिखा है…गोभी, अरबी और छोटे बैंगन ….मेरे बैग के अंदर दो कपड़े की थैलियां थीं…लेकिन जब जल्दी से दुकानदार ने एक प्लास्टिक की पन्नी में बैंगन डाल दिए ..अभी डाल ही रहा था कि मेरे मुंह से अभी थोड़ा सा ही निकला था कि यह पन्नी मत दो …मेरे पास थैला है …लेकिन उसने भी अनसुना किया और मैंने भी सोचा चलो, अब इस बारिश में कौन यह कपड़े के झोले को गीला करे ………हमारी मां तो हमेशा बारिश हो, तूफ़ान हो या कोहरा हो….वह कैसे यह सब कपड़े के थैलों में सहेज लाती थी …….और हमारी इच्छा शक्ति ही इतनी कमज़ोर है कि थैला निकालने में आलस लगता है, बहाने बनाते हैं…..सामान लेने से पहले ही क्यों नहीं वह थैला दुकानदार के आगे कर देते …जैसे ५० साल पहले मां करती थी ……..


इसलिए यह सब लिखा कि हम लोग जो खुद को पढ़े लिखे और मोटीवेटेड कहते हैं ….अगर यह हाल इस तबके का है तो फिर तो एक ही काम से हम लोगों की आदतें सुधरेंगी और हम पुराने तौर तरीकों पर लौटेंगे ……….अगर ये सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बाज़ार में दिखना ही बंद हो जाए…………और यह काम केवल और केवल एक ही इंसान के बस का है ….प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ……….वह नारा भी तो है …मोदी है तो संभव है। 

जुहू बीच के जिस किनारे से मैं उधर गया वहां से इतना साफ सुथरा दिखा ..और दूर आप देख सकते हैं जो सी-लिंक या क्या कहें कोस्टल रोड बन रही है ...बांद्रा से वर्सोवा ..जुहू बीच से होती हुई ...


ये भाई साहब सुबह सुबह अपने बेसिक फोन पर किसी एफएम पर पुराने हिट फिल्मी गीतों का आनंद ले रहे थे, बता रहे थे कि हम इधर मच्छीमार नगर में ही रहते हैं....एफएम चैनल कौन सा है, पता नहीं, बच्चों ने लगा दिया है ...कह रहे थे पुराने फिल्मी गीत सुन कर मज़ा आता है ...

मैंने सोचा एक पैनोरैमिक शॉट भी लिया जाए ...

एक तरफ की तो मैंने सी-लिंक के निर्माण की फोटो आप को दिखाई पहले, यह दूसरी तरफ की फोटो हे ...और अगर ज़ूम कर के देखेंगे तो बीच में भी कार्य चल रहा दिख जाएगा...

कौवों की कोई गोष्ठी चल रही है कि यहां इतना सब कुछ साफ रहे तो हमें अच्छा लगता है ...





तैराक तैयार हैं ....किसी ज़रुरतमंद की मदद के लिए ...

जुहू बीच के बीचों बीच चल रहा सी-लिंक का काम ...तस्वीर थोड़ी ज़ूम कर के ली थी ...

जहां से मैं बीच पर उतरा, वहां पर देखा बाहर से पानी तेज़ बहाव के साथ समंदर की तरफ़ भागा जा रहा है ...अब यह कौन सा पानी है, मुझे नहीं पता ...इस का मुझे कुछ ज्ञान नहीं है...

यह पानी की धारा समंदर में समा जाने को आतुर ....पानी कौन सा, कहां से आया...पता नहीं...


जिम्मेदारी के बोझ से लदी एक मां ....


दुनिया भर के लोगों के अच्छे दिन आ गए ..लेकिन हाशिये पर जीने वाले इस तबके को पिछले ५०-६० सालों से वहीं खड़े देख रहा हूं  ...इन को अपने हकों का पता नहीं, पढ़ाई की कमी है, जो पढ़े-लिखे लोग हैं, सरकारी स्कीमों का फायदा वही लोग ले पाते हैं ...इन के दिन भी बदलने चाहिए...यह मेरी इच्छा भी है, दुआ भी ....


हाई-टाईड का चार्ट लगा हुआ है जुहू बीच पर कईं जगह ....लोग को सचेत करने के लिए ..


वही पानी की धारा जो बाहर से आ कर समंदर में मिल जाने को बेताब है ...

वॉच-टावर भी बना हुआ है ...ताकि ज़रूरतमंद लोगों पर नज़र रहे ...


स्वच्छता कर्मचारी पूरी मुश्तैदी से डटे हुए हैं ....जैसे कह रहे हों कि तुम लोग मचाओ गंद, हम हैं न, संभाल लेंगे ....

जुहू बीच का भी हाल चाल कुछ अच्छे से समझ नहीं आता आज कल ...ये बड़ी बड़ी लोहे की चादरें यहां भी बिछाने की नौबत आ पड़ी है...पता नहीं ...किनारा घिसक रहा है, या रेत ही बह गई है ...





सफाई करने के लिए यह क्रेन...यह ट्राली ...व्यवस्था पूरी है ..लेकिन हम लोग गंद मचाना ही बंद नहीं करते ...

ये लोहे की शीटें तो मैंने जुहू बीच पर पहली बार देखी हैं, या पहले कभी नोटिस न की हों या फिर विसर्जन के लिए यह विशेष व्यवस्था होती हो....मालूम नहीं ...

सभी सफाई कर्मचारी अपनी फोटो खिंचवा रहे थे तो मैंने उन्हें कहा कि आप की हाज़िरी लग गई ...कहने लगे कि करना पड़ता है, प्रूफ के लिए के आ गए हैं ...और फिर बीच बीच में भी फोटो ली जाती हैं...वैसे, इस फोटो में आप जो फोटोग्राफर देख रहे हैं, वह पहले पोलरायड कैमरे से उसी वक्त फोटो खींच कर २० रुपए में दे देता था...अब खींचता वह है लेकिन आप के मोबाईल में भेज देता है २० रुपए में ...

मुझे ये तंबू-कनात देख कर उत्सुकता हुई ...




गुज़ारे लायक इतनी मराठी तो आती है कि यह पढ़ कर पता चला कि यहां पर कृत्रिम तालाब भी हैं, गणपति विसर्जन के लिए ....




मैने सोचा सीढ़ीयां चढ़ कर कृत्रिम तालाब भी देखा जाए ...

अरे वाह ...इतनी बढ़िया व्यवस्था ...आप देख सकते हैं मजबूत लोहे से बना यह तालाब ...


कृत्रिम तालाब ...गणपति विसर्जन के लिए ...


हर तरफ चाक-चौबंद सफ़ाई व्यवस्था ....लेकिन हम लोग जो गंद फैलाते हैं हम ही नहीं सुधरते ...





कोई बहुत ज़रुरी सूचना है ...मैंने अभी नहीं पढ़ी....मुझे मराठी पढ़ने के लिए खुला वक्त चाहिए .....जैसे कक्षा १-२ के छात्र पढ़ते हैं ...


मैं इन के पास ही खड़ा था, मैंने कहा कि लोग कचरा बहुत करते हैं....तो इसने कहा का कचरा तो करते हैं लेकिन इस कचरेदान (निर्मल्य कलश) में नहीं डालते ....


इतने कबूतर यहां पर इक्ट्ठे दिखे ...आज कल यहां पर कबूतरों को फीड करना एक बड़ा इश्यू है ...हाईकोर्ट तक ने इस बारे में आदेश दिए हैं ...कि जगह २ पर कबूतरों को फीड नहीं किया जा सकता, केवल निर्धारित स्थानों पर ही इन्हें फीड किया जा सकता है ...कबूतरखाने कवर कर दिए गए हैं...कबूतरों की बीठ से जो सांस की बीमारियां होती हैं, उस के बारे में छाती रोग विशेषज्ञ भी लोगों को बहुत सचेत कर रहे हैं ...



यह थी मेरी कल जुहू बीच पर ली गई आखिरी फोटो ...

लिखने को तो बहुत कुछ लिख दिया …लेकिन बात इतनी सी है कि हम गंद न फैलाएं, बाज आ जाएं सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल से …और जैसे प्रशासन कहता है कि पर्यावरण-फ्रेडली पदार्थों से सिम्बॉलिक गणेश जी की प्रतिमाओं की स्थापना करें …वरना इतना ज़्यादा प्लाटर-आफ-पेरिस और तरह तरह के रंग समंदर में जा कर पर्यावरण से किस तरह से खिलवाड़ करते हैं ….इसके बारे में आप खुद पढ़िए ….


मेरे जैसे लिखने वालों का तो काम है , लिखना ……..बात अगर मन को छू जाए तो मान लीजिए, वरना ….सप्रेम नमस्ते ….खुश रहिए, आबाद रहिए…। 


आज किसी विटेंज शॉप पर कुछ कार्ड देख रहा था ..एक कार्ड बहुत अजीब सा लगा ...आप भी उस के बारे में अगर पढ़ना चाहें.....यह सब इतना अजीब था कि मैंने उसे किसी को पोस्ट करने से पहले उस पर वह सब लिख ही दिया ..आप भी पढ़िए....