Saturday, January 5, 2008

क्यों लेते हैं मुहांसों को इतनी सीरियस्ली ?

इस में लगता यही है कि ये कंपनियां जो कुछ ही दिनों में मुहांसे गायब करवाने के सपने दिखाती हैं न वे ही हमारे युवाओं द्वारा इन मुहांसों को इतना सीरियल्सी लेने के लिए इतनी जिम्मेदार हैं। तो फिर, क्या करें- न लगाएं कोई भी क्रीम इन पर ?—क्या जरूरत है , यह तो दोस्तो आपने भी नोटिस किया होगा कि जो लोग इन पर जितनी ज्यादा ट्यूबें लगाते हैं, उन को ये उतना ही ज्यादा तंग करते हैं। इन को खत्म करने के लिए ज्यादा दवाईयां (एंटीबायोटिक दवाईयां) लेते रहने अथवा महंगी महंगी क्रीमें खरीद कर लगाने से ये बद से बदतर ही हो जाते हैं (क्योंकि आप सब तो साहित्य से बहुत जुड़े हुए हो ....वो एक शेयर है न कि जितना ज्यादा इलाज किया मर्ज बढ़ता चला गया....बस ठीक वैसे ही कुछ)।
दोस्तो, यह तो आप ने भी देखा होगा जब हम युवावस्था में प्रवेश करते हैं तो अकसर कुछ समय के लिए ये मुहांसे थोड़ा बहुत परेशान करते ही हैं......But then why don’t today’s youth take all these quite sportingly….it is all part of our growing up !! We don’t remember having taken any pill or having applied any cream for these innocent heads.
दोस्तो, इस हैड से मुझे ध्यान आया है कि कईं बार युवा इन को नाखुनों से फोड़ते रहते हैं, जिस से इन में कई बार पस पड़ जाती है अर्थात इंफैक्शन हो जाती है।और ये बड़े-बड़े काले से दिखने शुरू हो जाते हैं (Black heads) ऐसी कुछ परेशानी बार बार हो तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से अवश्य संपर्क करना चाहिए।
और हां, केवल समाचार-पत्र में या टीवी के विज्ञापन देख कर कुछ भी इन के ऊपर लगा लेना, आफत मोल लेने के बराबर है। कईं बार तो मैं कुछ टीनएजर्स को इन के ऊपर स्टीरायड्स( steroids) मिली हुई क्रीमें बिना किसी डाक्टरी सलाह के लगाते हुए देख कर बहुत परेशान होता हूं।
जैसे अपने बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए हैं न कि इन मुहांसों को मत फोड़ो, चेहरा साफ सुथरा रखो और ऐसी वैसी चालू किस्म की क्रीमों से चेहरे पर लीपा-पोती न करो, वे ठीक ही कह रहे हैं। ये जो आज कल छोटी उम्र से ही ब्यूटी पार्लर जाने का फैशन हो गया है न, यह भी एक तरह से परेशानी का बाईस ही है.....First of all, let’s give an opportunity for beauty to take form----only then one needs to temper with it. By the way, ideally speaking beauty needs no ornaments…..then why all these hassles?? Just pay attention to your diet and your thoughts…..be happy--- it is a sureshot recipe for glowing golden skin!!
दोस्तो, अपनी जो बात हो रही थी , वह तो अभी बीच में ही है। आम तौर पर पौष्टिक खाना न खाना एवं अपनी त्वचा की देखभाल न करने को मुहांसों का कारण बताया जाता है, लेकिन इन के पीछे कुछ ऐसे भी कारण होते हैं जिन को ऊपर कईं बार कोई कंट्रोल होता नहीं है। तो आईए कुछ ऐसे ही कारणों पर नज़र डालते हैं.....
The US National Women’s Health Information Centre offers this list of potential risk factors for acne (मुहांसे)---
· युवावस्था में प्रवेश करते समय कुछ हारमोनल बदलाव जो हमारे शरीर में होते हैं.
· महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था एवं मासिक धर्म के बंद होने (मीनोपाज़) के दौरान होने वाले हारमोनल बदलाव
· कुछ दवाईयों की वजह से भी मुहांसों के होने की आशंका बढ़ जाती है, जैसे कि एपीलैप्सी एवं डिप्रेशन के इलाज के लिए दी जाने दवाईयां
· मुंह पर मेक-अप लगाने से भी मुहांसों से जूझना पड़ सकता है
· हैल्मेट वगैरह से होने वाली स्किन इरीटेशन ( अब यह पढ़ कर यंगस्टरस ये भी न समझें कि हैल्मेट न पहने का एक और बहाना मिल गया ---बिलकुल नहीं, आप हैल्मेट जरूर पहनिए, मुहांसे होंगे भी तो संभाल लेंगे।
· जिन युवाओं में मुहांसों की पारिवारिक हिस्ट्री होती है उन में भी इन मुहांसों का आशंका रहती है।

क्यों लेते हैं मुहांसों को इतनी सीरियस्ली ?


इस में लगता यही है कि ये कंपनियां जो कुछ ही दिनों में मुहांसे गायब करवाने के सपने दिखाती हैं न वे ही हमारे युवाओं द्वारा इन मुहांसों को इतना सीरियल्सी लेने के लिए इतनी जिम्मेदार हैं। तो फिर, क्या करें- न लगाएं कोई भी क्रीम इन पर ?—क्या जरूरत है , यह तो दोस्तो आपने भी नोटिस किया होगा कि जो लोग इन पर जितनी ज्यादा ट्यूबें लगाते हैं, उन को ये उतना ही ज्यादा तंग करते हैं। इन को खत्म करने के लिए ज्यादा दवाईयां (एंटीबायोटिक दवाईयां) लेते रहने अथवा महंगी महंगी क्रीमें खरीद कर लगाने से ये बद से बदतर ही हो जाते हैं (क्योंकि आप सब तो साहित्य से बहुत जुड़े हुए हो ....वो एक शेयर है न कि जितना ज्यादा इलाज किया मर्ज बढ़ता चला गया....बस ठीक वैसे ही कुछ)।
दोस्तो, यह तो आप ने भी देखा होगा जब हम युवावस्था में प्रवेश करते हैं तो अकसर कुछ समय के लिए ये मुहांसे थोड़ा बहुत परेशान करते ही हैं......But then why don’t today’s youth take all these quite sportingly….it is all part of our growing up !! We don’t remember having taken any pill or having applied any cream for these innocent heads.
दोस्तो, इस हैड से मुझे ध्यान आया है कि कईं बार युवा इन को नाखुनों से फोड़ते रहते हैं, जिस से इन में कई बार पस पड़ जाती है अर्थात इंफैक्शन हो जाती है।और ये बड़े-बड़े काले से दिखने शुरू हो जाते हैं (Black heads) ऐसी कुछ परेशानी बार बार हो तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से अवश्य संपर्क करना चाहिए।
और हां, केवल समाचार-पत्र में या टीवी के विज्ञापन देख कर कुछ भी इन के ऊपर लगा लेना, आफत मोल लेने के बराबर है। कईं बार तो मैं कुछ टीनएजर्स को इन के ऊपर स्टीरायड्स( steroids) मिली हुई क्रीमें बिना किसी डाक्टरी सलाह के लगाते हुए देख कर बहुत परेशान होता हूं।
जैसे अपने बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए हैं न कि इन मुहांसों को मत फोड़ो, चेहरा साफ सुथरा रखो और ऐसी वैसी चालू किस्म की क्रीमों से चेहरे पर लीपा-पोती न करो, वे ठीक ही कह रहे हैं। ये जो आज कल छोटी उम्र से ही ब्यूटी पार्लर जाने का फैशन हो गया है न, यह भी एक तरह से परेशानी का बाईस ही है.....First of all, let’s give an opportunity for beauty to take form----only then one needs to temper with it. By the way, ideally speaking beauty needs no ornaments…..then why all these hassles?? Just pay attention to your diet and your thoughts…..be happy--- it is a sureshot recipe for glowing golden skin!!
दोस्तो, अपनी जो बात हो रही थी , वह तो अभी बीच में ही है। आम तौर पर पौष्टिक खाना न खाना एवं अपनी त्वचा की देखभाल न करने को मुहांसों का कारण बताया जाता है, लेकिन इन के पीछे कुछ ऐसे भी कारण होते हैं जिन को ऊपर कईं बार कोई कंट्रोल होता नहीं है। तो आईए कुछ ऐसे ही कारणों पर नज़र डालते हैं.....
The US National Women’s Health Information Centre offers this list of potential risk factors for acne (मुहांसे)---
· युवावस्था में प्रवेश करते समय कुछ हारमोनल बदलाव जो हमारे शरीर में होते हैं.
· महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था एवं मासिक धर्म के बंद होने (मीनोपाज़) के दौरान होने वाले हारमोनल बदलाव
· कुछ दवाईयों की वजह से भी मुहांसों के होने की आशंका बढ़ जाती है, जैसे कि एपीलैप्सी एवं डिप्रेशन के इलाज के लिए दी जाने दवाईयां
· मुंह पर मेक-अप लगाने से भी मुहांसों से जूझना पड़ सकता है
· हैल्मेट वगैरह से होने वाली स्किन इरीटेशन ( अब यह पढ़ कर यंगस्टरस ये भी न समझें कि हैल्मेट न पहने का एक और बहाना मिल गया ---बिलकुल नहीं, आप हैल्मेट जरूर पहनिए, मुहांसे होंगे भी तो संभाल लेंगे।
· जिन युवाओं में मुहांसों की पारिवारिक हिस्ट्री होती है उन में भी इन मुहांसों का आशंका रहती है।

3 comments:

Gyandutt Pandey said...
बढ़िया लेख डाक्टर साहब। बस मेरे जैसे के लिये केवल ३० साल देरी से। वैसे तब मुहासों को ले कर इतनी हीन भावना नहीं थी और उनको मिटाने का इतना बड़ा कारोबार भी नहीं था।
गलत समय जनमे हम! :-)
sunita (shanoo) said...
शुक्रिया डॉक्टर साहब...मेरा बेटा भी बहुत परेशान है मुहासों से...
दादी का दवाखाना said...
वाह, अच्छा लिखा है

धूल चाट रहे वाकिंग शूज़ को साफ़ करने के इलावा कोई चारा है ही नहीं....

अमेरिकन जर्नल आफ कारडीयोलाजी में छपे एक लेख के अनुसार धूल चाट रहे वाकिंग शूज़ को साफ़ करने के इलावा कोई चारा है ही नहीं....अगर हम सप्ताह में छः दिन रोज़ाना आधे घंटे तक तेज़-तेज़ सैर करते हैं तो इस से हम कमर से कमरा बन रही अपनी कमर को कम तो कर ही सकते हैं, इस के साथ ही साथ मोटापे एवं स्थूल जीवण-शैली( सिडेंटरी लाइफ-स्टाइल) के कारण होने वाले मैटाबालिक सिंड्रोम के रिस्क को भी कम करने में मदद मिलती है।

डयूक यूनिवर्सिटी मैडीकल सेंटर के इस अध्ययन में तो वैज्ञानिकों ने यहां तक देखा है कि अगर खाने-पीने की आदतों में कोई बदलाव न भी किया जाए तो भी तेज़-2 सैर करने से होने वाले लाभ तो हमें प्राप्त होते ही हैं। लेकिन, प्लीज़, मेरी बात मानिए तो इस खाने पीने की आदतों में कोई बदलाव न करने की आदत को आप इतना सीरियस्ली न ही लें--- जैसा हम लोगों का खान-पान है न, हमें तो वैसे ही बहुत ही ख्याल रखना होगा, दोस्तो।

दोस्तो, अमेरिका की लगभग एक चौथाई जनसंख्या इस मैटाबालिक सिंड्रोम से जूझ रही है। मैटाबालिक सिंड्रोम क्या है ?- दोस्तो, आप इतना जान लीजिए कि यह मैटाबालिक सिंड्रोम कई तरह के रिस्क फैक्टरों (risk factors) का एक समूह है जिस की वजह से हृदय रोग, डायबिटीज़ एवं स्ट्रोक होने की आशंका ज्यादा ही हो जाती है।

तो, चलिए, इन रिस्क फैक्टर्ज़ की ही कुछ बात कर लें ---अगर किसी व्यक्ति में नीचे लिखे पांच रिस्क फैक्टर्ज़ में से कम से कम तीन फैक्टर्ज़ हैं तो समझ लीजिए उसे मैटाबालिक सिंड्रोम है—
· बड़ी हुई कमर (large waistline)
· हाई-ब्लड प्रेशर
· नुकसान दायक ट्राईग्लिसरायड्स का बढ़ा हुया होना (high levels of harmful triglycerides)
· अच्छे ट्राइग्लिसरायड्स का स्तर कम होना (low levels of good cholesterol)
· हाई- ब्लड-शुगर
दोस्तो, अगर आप इन नुकसानदायक और फायदेमंद ट्राइग्लिसरायड्स की बात कुछ कुछ नहीं समझ पा रहे हैं तो कोई बात नहीं---बस इतना ही समझना काफी है कि जब हम अपने रक्त की जांच (लिपिड प्रोफाइल) करवाते हैं न, तो यह सारे स्तर हमें पता लग जाते हैं। दूसरा, यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि तेज़ तेज़ सैर करने से हमारे शरीर में ये नुकसान दायक तत्व कम होने लगते हैं और फायदेमंद ट्राइग्लिसरायड्स का स्तर बढ़ने लगता है जिस से रक्त की नाड़ियों में अवरोध पैदा होने की संभावना घटने लगती है।
अमेरिकी जर्नल आफ कार्डिलाजी के अनुसार बिल्कुल ही शारीरिक व्यायाम न करने से कुछ व्यायाम करना तो बेहतर है ही, और ज्यादा शारीरिक परिश्रम करना कम परिश्रम करने से तो निःसंदेह अच्छा है ही, लेकिन बिल्कुल शारीरिक व्यायाम करना तो भाई बेहद खतरनाक है।–क्या यही बात हम सैंकड़ों वर्षों से नहीं जानते ?
क्या हुया, आप तो डर से गए ?--- नहीं,नहीं, ऐसी डरने वाली कोई बात भी नहीं है, बस आज ही रैक पर पड़े अपने सैर करने वाले शूज़ की धूल साफ कर ही दीजिए। चलिए, मैं भी आज से यही प्रण करता हूं कि प्रवचनों पर खुद भी चल कर दिखाऊंगा...................
बेटा, ज़रा मेरे काले कैनव्स शूज़ देना !
तो, दोस्तो, आप भी उठिए, टहलते हुए किसी पार्क में मिलते हैं।....................
Good morning, India !!!!!
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