Thursday, September 25, 2014

रोस्ट चिकन है फूड पाइप कैंसर का प्रमुख कारण...

परसों की टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी कि मद्रास में चिकित्सकों ने एक रिसर्च में पाया है कि रोस्ट चिकन --जिस चिकन को मिर्च-मसाले और तेल-वेल लगा कर गैस पर या कोयलों के ऊपर ग्रिल किया जाता है...क्या कहते हैं इसे बारबीक्यू....कुछ ऐसा ही कहते हैं ना......जो लोग ऐसा रोस्ट चिकन खाते हैं उन में फूड पाइप (oesophagus) का कैंसर होने का खतरा कईं गुणा बढ़ जाता है... अल्कोहल का भी इस में प्रमुखता से नाम था। वैसे तो मिर्च-मसाला, आचार आदि की भी फूड-पाइप के कैंसर में भूमिका बताई जाती है।

मद्रास में की गई इस मैडीकल रिसर्च में यह बताया गया है कि किस तरह से चिकन एवं मछली को सीधा गैस या कोयले पर सेंकने से कोयले एवं गैस के धुएं में मौजूद कैंसर पैदा करने की क्षमता रखने वाले कैमीकल चिकन एवं मछली की सतह पर चिपक जाते हैं, जिस से फूड-पाइप के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

Smoked meat now deadlier than liquor (Times of India)

मैं कल सोच रहा था कि आज तक तो इस तरह से सेंक कर कुछ न कुछ खाने का चलन भी बढ़ता ही जा रहा है, जैसे बहुत सी जगहों पर आजकल पनीर के टिक्के भी इसी तरह सेंक कर ही सर्व किए जाते हैं।

जो मैडीकल रिसर्च भारत में हो रही है उस पर भी थोड़ी नज़र तो रखनी ही चाहिए, बस ज़्यादा नहीं, थोड़ा थोड़ा पता रहना चाहिए, अंदर की बात चाहे पता हो या ना हो, लेकिन जब मैडीकल वैज्ञानिकों ने यह कह दिया कि रोस्टेड चिकन एवं मछली को खाने में इस तरह का लफड़ा है, तो फिर ऐसे चीज़ों से परहेज़ करना ही मुनासिब लगता है , है कि नहीं ?

वैसे एक बात बताऊं जहां भी इस तरह का रोस्टेड सा कुछ भी बन रहा होता है, उस वस्तु को खाने की इच्छा बड़ी हो जाती है, क्योंिक इस तरह के स्टालों के आसपास गजब का अरोमा  होता है। वैसे तो मैंने पिछले बीस वर्ष से नान-वैज नहीं खाया, कोई धार्मिक कारण नहीं, बस इच्छा ही नहीं हुई कभी।

मैं जब इस तरह के टॉपिक पर कुछ लिखता हूं तो बहुत बोझिल सा महसूस करता हूं...... हर रोज नईं रिसर्च ...यह खाओ, यह मत खाओ, इस में यह लफड़ा, इस का यह फायदा, इस के साथ साथ मैडीकल रिसर्च को प्रभावित करतीं मार्कीट शक्तियां......ऐसे में कैसे कोई भी अपने आप को इतना अपडेट रख सकता है, थोड़ा मुश्किल ही जान पड़ता है। कोई कहता है टमाटर खाओ तो इस बीमारी से बचो, यह वाला तेल इस्तेमाल करो तो इस से बच जाओगे......कईं बार तो इतनी सूचना से खिचड़ी सी ही बन जाती है।

मुझे तो लगता है कि ठीक है, हम इधर उधर से ज्ञान तो अर्जित करते रहें, कोई बुराई नहीं है.....लेकिन कुछ फंडे बिल्कुल क्लियर रखें जैसे कि संतुलित आहार की बात, शारीरिक परिश्रम की बात, टहलने का नियम, योग-प्राणायाम् की आदत, तंबाखू- एवं अन्य नशों से दूरी बनाएं रखें, और अच्छा प्रेरणात्मक साहित्य पढ़ें......बस और क्या, हम तो इतना ही कर सकते हैं।

दवा का रिएक्शन मुंह में कैसा दिखता है?

यह आदमी अपने मुंह का घाव दिखाते हुए... 
कल मेरे पास एक ४५-५० वर्ष की उम्र का आदमी आया...उसने कहा कि उसने कोई दवा खाई थी दो तीन दिन पहले जिस से उस के सारे शरीर में खुजली होने लगी और मुंह में बहुत बड़ा घाव हो गया।

यह तो पक्का ही था कि उसे दवाई लेने से ही यह घाव हुआ था क्योंकि एक टेबलेट लेने के कुछ घंटे बाद ही इस तरह मुंह में छाला सा हो गया जो तुरंत फूट गया और यह बढ़ कर यह घाव बन गया। 

इस घाव की तस्वीर आप यहां देख रहे हैं....देखने में काफ़ी बड़ा तो लग रहा है, इस आदमी को परेशान भी बहुत कर रहा है...उससे कुछ भी खाया पिया नहीं जा रहा। 

लेिकन आप चिंता न करें, यह घाव तो तीन-चार दिन में ठीक हो ही जाएगा.......बिना किसी ऐंटीबॉयोटिक जैसी दवाईयों के.....इस पर दिन में चार पांच बार मुंह में लगाने वाली दर्द निवारक एवं ऐंटीसेप्टिक जैल लगानी होगी..... कुछ के नाम मैं यहां लिख रहा हूं......Dentogel, Dologel, Zytee, Emergel आदि.....इन में से किसी भी एक जैल का इस्तेमाल किया जा सकता है। घाव में दो बूंद लगाने पर इसे पांच मिनट बाद थूक देना होता है.....विशेषकर खाना खाने से पहले इस का इस्तेमाल खाने से होने वाली दिक्कत को बहुत कम कर देता है। 

अकसर किसी भी दर्द-निवारक टेबलेट खाने की भी ज़रूरत नहीं होती.......अगर है तो कोई भी हल्की फुल्की दवा ली जा सकती है। 

टुथब्रुश एवं जुबान साफ़ करने वाली पत्ती का इस्तेमाल नियमित जारी रखना होगा.......ताकि किसी तरह की इंफैक्शन से बचा जा सके। 

एक बात बताऊं जब मैंने इस आदमी से पूछा कि आप को किस दवाई से ऐसा हुआ तो वह नाम ही नहीं बता पाया....न ही उस के पास वह दवाई मौजूद थी......इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए की अगर इस तरह की कोई तकलीफ़ हो भी जाए तो चिकित्सक के पास कम से कम वह दवा तो दिखाने के लिए जाना ही चाहिए, ताकि आप वह दवा किसी दूसरे ट्रेडनेम से भी फिर से खाए जाने से बच सकें। 

दवा का जब किसी को रिएक्शन होता है तो नाना प्रकार के लक्षण हो सकते हैं......सारे शरीर में खुजली, इधर उधर फफोले से पड़ जाना, मुंह में फफोले और घाव आदि हो जाना.......और भी बहुत हैं, लेकिन छोड़िए क्या करेंगे खाली-पीली सभी के बारे में जान कर.......यही शुभकामना है कि आप स्वस्थ रहें। 

हां, यार, एक ध्यान आया....कुछ साल पहले लोग कुछ ज़्यादा ही सीधे हुआ करते थे शायद......कुछ लोग दांत की दर्द से निजात पाने के लिए ऐस्प्रिन की गोली को पीस कर मुंह में दुःखते दांत के सामने टिका दिया करते थे......दर्द तो कहां दूर हो पाता था, लेकिन इसी तरह का ज़ख्म ज़रूर कईं दिन तक परेशान किए रहता था।

यह तो था इन साहब के मुंह का हाल, कल मैंने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में किशोर दा का यह गाया हुआ यह गीत एक आर्टिस्ट की आवाज़ में सुना ... इन्हें लखनऊ में जूनियर किशोर दा कहते हैं.......अच्छा लगा अपने बचपन के दिनों का गीत सुन कर .....आप भी सुनिए... यह दिल के हाल की बात कर रहा है.........