Thursday, November 13, 2014

जीवनशैली से संबंधित कुछ छोटी छोटी बड़ी बातें...

बीते सोमवार बाद दोपहर में मैं विविध भारती पर पिटारा प्रोग्राम के अंतर्गत एक सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ की इंटरव्यू सुन रहा था...एक घंटे का कार्यक्रम होता है यह.....और रेडियो पर प्रसारित होने वाले सेहत संबंधी बेहतरीन कार्यक्रमों में से यह एक है।

बातें उन्होंने बहुत अच्छे से सभी समझाईं......दिखने में छोटी छोटी बातें थीं लेकिन इन का हमारी सेहत पर कितना गहरा प्रभाव होता है।

अच्छा शुरूआत करते हैं पानी पीने की बात से......आप ध्यान करें तो या तो आप को किसी ने कभी न कभी कहा होगा या आप ने आगे किसी से यह कहा होगा कि रात में सोते समय पानी मत पियो..क्योंिक फिर रात में बाथरूम जाने के लिए उठना पड़ेगा।

उस विशेषज्ञ ने बताया कि यह एक बहुत गलत बात है। वैसे ही आज कल लोग बंद दफ्तरों में वातानुकूलित कक्षों में काम करते हैं जिस की वजह से उन्हें वैसे ही प्यास कम लगती है...लेिकन इस का मतलब यह नहीं है कि शरीर में पानी की आवश्यकता नहीं है। शरीर को विभिन्न क्रियाओं के लिए पानी चाहिए.... जो भी विषैले तत्व शरीर में उपलब्ध हैं, उन को बाहर निकालने के लिए भी पानी ही चाहिए... इसलिए वह डाक्टर यह सलाह दे रहे थे कि आफिस में काम करने वालों को वाटर-कूलर तक जा कर पानी पीने की आदत डाल लेनी चाहिए.... ज़रूरी नहीं कि प्यास लगे तभी वाटर कूलर का रूख करना है। वह तो यह भी कह रहे थे कि हर घंटे के बाद एक गिलास पानी पीना चाहिए।

डाक्टर साहब आज के युवा प्रोफैशनल्ज़ की भागती दौड़ती जीवनशैली के बारे में बात करते कह रहे थे कि किस तरह से आज कल युवा १५-१६ घंटे कुर्सी टेबल पर ही बैठे रहते हैं.....ढंग से खाने का समय नहीं, एक्सरसाईज़ का समय नहीं... बस कुछ भी जंक फूड खाते रहते हैं... ऊपर से सिगरेट, तंबाकू .. ऐसे में वह बता रहे थे कि कोई ताजुब्ब की बात नहीं कि छोटी उम्र के युवा भी दिल के रोग का शिकार होने लगे हैं।

बड़ी अच्छी बात बता रहे थे कि सारे दिन के २४ घंटों में से कम से कम आधा एक घंटा तो हमें अपने शरीर को भी देना चाहिए। सुबह जल्दी उठ कर ३०-४५ मिनट का भ्रमण करना ही इतना लाभदायक होता है।

सुबह ११-१२ बजे फ्रूट ब्रेक की बात कह रहे थे .. बहुत बढ़िया लगी यह बात.... शाम को ४ बजे भी कोई फ्रूट आदि को लेने की एडवाईस दे रहे थे।

अभी मुझे लिखते लिखते यही लग रहा है कि कितनी बातें हम लोग स्कूल के दिनों से जानते हैं कि क्या खाना है, कितना  व्यायाम करना है, प्रातःकाल का भ्रमण क्यों ज़रूरी है...फल क्यों ज़रूरी हैं, तंबाकू और शराब क्यों खराब है.....सब कुछ हम सैंकड़ों बार पढ़ सुन चुके हैं.....लेकिन फिर भी सभी डाक्टर अपने अपने पेशे से संबंधित बिगड़े से बिगड़े देखते हैं.....आज ही मैंने एक ४५ वर्ष के आदमी को देखा, पहले पान खाता था फिर गुटखा शुरू कर दिया....उस के कागज़ बता रहे थे कि चार वर्ष पहले भी डायग्नोज़ हुआ था कि मुंह का कैंसर है......लेकिन अब इतना ज़्यादा फैल चुका था कि ऊपर वाले होंठ से बाहर की तरफ़ भी घाव दिख रहा था.....

मरीज़ों की खुशी हमें खुश कर देती है और मरीज़ों का दुःख हमें दुःखी कर जाता है.....हम लोग भी कोई सुपर-हयूमन थोड़े ही ना हैं......बहुत मूड खराब होता है .......मैं कल ही सोच रहा था कि सरकारी अस्पताल की ओपीडी में बैठे बैठे इसलिए हम जैसे डाक्टर लोग पता नहीं कितनी बार मन ही मन दिल ही में कितनी बार रो लेते हैं और कभी जब मरीज़ को खुश देखते हैं तो हम भी खिल उठते हैं।

जीवनशैली की तरफ़ ध्यान देना है बड़ा ज़रूरी। Take care!!