Tuesday, November 20, 2007

मीडिया में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी

मीडिया में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जिस तरह से उपलब्ध करवाई जाती है, उस के बारे में मैं अकसर बहुत सोचता हूं। कई बार तो मुझे लगता है कि आम जन को इससे क्या कुछ फायदा भी होता होगा..... वैसे मैं प्रिंट मीडिया की बात ज्यादा कर रहा हूं। प्रिंट मीडिया में भी हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषाओं वाले कई प्रकाशनों ने तो ऐसा माहोल बना रखा है कि आम बंदे तक सही जानकारी पहुंचे तो आखिर पहुंचे कैसे। कई कई बार तो सुधि पाठकों को ही नहीं पता चल पाता कि वे चिकित्सा से संबंधित कोई विज्ञापन पढ़ रहे हैं अथवा कोई लेख पढ़ रहे हैं। मैं तो कई बार यही सोचता हूं कि बेचारे आम बंदे को हम कंफ्यूज़ कर के ही रखते हैं....उसे शायद अंधकार में ही रखने में ही मार्कीट शक्तियों का स्वार्थ भरा है। हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं की बात मैं इस लिए कह रहा हूं कि जिन लोगों की अंग्रेज़ी पर अच्छी पकड़ है उन के लिए तो स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सहेजने के ढ़ेरों विकल्प मौजूद हैं, वे चाहें तो नेट पर सर्च कर लें, चाहें तो अच्छी पत्रिकाएं पढ़ लें, लेकिन आम बंद कहां अपना माथा फोड़े।
मुझे मेरे किशोर बेटे विशाल ने प्रेरित किया है कि पापा, अखबारों में तो लिखते रहते हो, नेट पर लिखा करो. आज जो मैं यह ब्लाग हिंदी में आप के पास पहुंचा रहा हूं, इस में उसी प्रेरणा की काफी भूमिका है।
अंग्रेज़ी प्रिंट मीडिया की थोड़ी बात करें....दोस्तो, उन में भी सेहत बनाने के या सेहत कायम रखने के लिए अनेकों बार ऐसी वस्तुओं का जिक्र होता है कि जिन का हम डाक्टरों ने ही इस देश में नाम ही नहीं सुना होता। ब्रा़डकास्ट मीडिया में भी अकसर शरीर को कसा हुया बनाए रखने के नुस्खे, झुर्रियां दूर करने की क्रीमों की बातें और फेशियल वगैरह की बातें ज्यादा ही होती हैं........आम बंदे के उपयोग की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को कहीं किसी कौने में धकेल दिया जाता है।
क्या करूं....कुछ समझ में नहीं आ रहा....बस हिंदी एवं क्षेत्रीय समाचार-पत्रों में स्वास्थ्य संबंधी लेख लिख कर बस थोड़ा बहुत अपने दिल को समझा लेता हूं। और इस काम के लिए कभी किसी तरह के मानदेय की उम्मीद नहीं रखता। शायद एक दिन ऐसा भी आए कि लोगों में इस के बारे में भी जागृति पैदा हो जिस से कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का इस तरह के लेखन के प्रति रूझान पैदा हो....

इन परिंदों को मिलेगी मंजि़ल इक दिन,
ये हवा में खुले इन के पंख बोलते हैं.....



शुभकामनाएं एवं आशीष....