Saturday, February 27, 2016

नीरजा, आप की महानता को सलाम!

दो दिन पहले मल्टीप्लेक्स में नीरजा फिल्म देखने का मौका मिला...मल्टीप्लेक्स इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि थियेटर में जा कर फिल्म देखने का एक अलग ही अनुभव होता है। 
बहन, आप की बहादुरी को कोटि कोटि नमन...(नीरजा भनोट) 
मुझे याद है १९८६ में उन दिनों मैं कालेज से ताज़ा ताज़ा बाहर आया था जब यह खबर आई थी कि नीरजा भनोट नाम की एक साहसी एयर-होस्टैस की वजह से हाईजेक हुए यात्री विमान के ३६० के करीब यात्री बच गये थे.. याद है अच्छे ... इस बहादुर युवती की बहादुरी के चर्चे लंबे समय तक चलते रहे थे...और देश का सब से बड़ा बहादुरी का पुरस्कार अशोक चक्र इन्हें मरणोपरांत दिया गया था। इन की उम्र उस समय २३ साल की थी..

दूरदर्शन का ज़माना था...जितना अखबारें और सलमा सुल्तान या शम्मी नारंग बता-समझा दिया करते थे, अपना वही सच हुआ करता था...अब सोच कर भी हैरानगी होती है। 

समय बीतता गया...शायदा नीरजा भनोट एयरहोस्टैस की याद थोड़ी धुंधली पड़ गई होगी...लेकिन इस फिल्म ने सब कुछ अच्छे से याद दिला दिया... मुझे इस के बारे में इतनी जानकारी नहीं थी...लेिकन फिल्म बनाने से पहले इन्होंने पूरी रिसर्च की होगी...३६० लोगों को सही सलामत जहाज से बाहर निकालने में कामयाब रही थी...

फिल्म की स्टोरी मैं जानबूझ कर यहां शेयर नहीं करना चाहता...क्या घटनाक्रम हुआ..यह सब जानने के लिए मेरे विचार में आप इस वीकएंड के दौरान यह फिल्म थियेटर में जा कर देख ही आइए...

मुझे कल ही ध्यान आ रहा था कि शबाना आज़मी की फिल्म चाक एंड डस्टर तो पहले ही दिन से टैक्स फ्री हो गई थी यू.पू में ...लेिकन इस का पता नहीं कुछ ...एक सप्ताह बीत गया है ... लेकिन आज सुबह पेपर दिखा तो यह खबर दिख गई कि यू पी में नीरजा भी टैक्स फ्री हो गई है... आशा है इसे बहुत से लोग देखेंगे और इस में नीरजा की अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण देख कर प्रेरणा लेंगे...



भई मैं तो यह फिल्म देख कर नीरजा की हिम्मत का कायल हो गया...इसे हमेशा याद रखूंगा ...जितना तारीफ़ की जाए उतनी कम है... वैसे मैंने फिल्म देखने के बाद नीरजा भनोट लिख कर गूगल सर्च किया...और जो परिणाम आए उन के ईमेजिज एवं वीडियो भी कई घंटे देखता रहा.....क्या कहूं, वैसे तो मैं बहुत बक-बक कर ही लेता हूं लेकिन इस बहादुर, निडर वीरांगना नीरजा भनोट की तारीफ़ के लिए मेरे पास शब्दों का आज टोटा है जैसा। 

आप ज़रूर देखिएगा....एक तरफ़ देश में तरह तरह कारणों की वजह से लोग गुस्सा रहे हैं ...कुछ को तो कारण भी पता नहीं होगा....बस भेड़चाल...और दूसरी तरफ़ आज हम लोग ३० साल बाद नीरजा को याद कर रहे हैं ... 

यही समय है कि हम भी बंदा बन जाएं...यह जानवरों जैसी हरकतें छोड़ दे अब....अब मैंने क्या कहना है, बहुत कुछ लोग पहले ही समझा बुझा चुके हैं....लेकिन अब तो हम लोग समझ जाएं। 

तीस साल पहले की बातें हो रही थीं तो मुझे भी ३० साल पहले की कुछ बातें यादें आ गईं....


हां, नीरजा को भी मेरी तरह से राजेश खन्ना की फिल्मों के सभी डॉयलगा और गाने अच्छे से याद थे...यह मुझे कैसे पता चला, इसे जानने के लिए आज शाम देख कर आइए...नीरजा ....