Sunday, January 27, 2008

जब जीना दूभर सा कर देती है यह खारिश-खुजली....


हमारे यहां खुजली मिटाने वाली दवाईयों की बिक्री बहुत होती है क्योंकि अकसर लोग बिना किसी डाक्टरी सलाह के अपने आप ही कोई भी ट्यूब बाज़ार से ला कर लगानी शुरू कर देते हैं। बहुत बार तो देखने में आया है कि स्टीरॉयड युक्त ट्यूबें भी खुजली के लिए बिना किसी डाक्टर से परामर्श किए हुए खूब इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में अकसर रोग को बढ़ावा मिल जाता है। हां,अगर को क्वालीफाईड चिकित्सक अथवा चमड़ी रोग विशेषज्ञ की देख रेख में—उस की सलाह अनुसार- आप इन ट्यूबों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बात और है।

किसी भी तरह के चर्म-रोग होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से मिलें----कईं बार कुछ दिन दवाई लगाने पर उपेक्षित आराम नहीं मिलता । ऐसे में आप का फैमिली डाक्टर आप को स्वयं ही किसी चर्म-रोग विशेषज्ञ के पास रैफर कर देगा, अन्यथा आप स्वयं भी किसी प्रशिक्षित चर्म रोग विशेषज्ञ से मिल सकते हैं।

मेरे एक मित्र की माता जी की एक आंख के आस-पास चेहरे की चमड़ी में अचानक दर्द रहने लगा......दर्द बहुत तेज़ था.....साथ में छोटे छोटे दाने से निकल आये। उस ने किसी दूसरे शहर में रह रहे हमारे किसी मित्र से बात की जो चर्म-रोग विशेषज्ञ हैं....उस ने सारी बात सुनते ही उस मित्र को कहा कि अपने शहर के किसी चर्म-रोग विशेषज्ञ के पास माता जी को तुरंत ले कर जाओ क्योंकि देख कर ही पूरा पत लग पायेगा (शायद वो पूरी डिसक्रिपश्न सुन कर डॉयग्नोसिस कर चुके थे) । जब चर्म –रोग विशेषज्ञ के पास माता जी को लेकर जाया गया, तो उस ने देखते ही कह दिया की यह तो इन को हर्पिज़ यॉस्टर हुया है। खूब सारी दवाईंयां तुरंत शुरू की गईं...और नेत्र विशेषज्ञ से मिलने को भी कहा गया। नेत्र विशेषज्ञ ने भी यही कहा कि टाइम पर आ गए हो, नहीं तो आँख ही बेकार हो सकती थी। यह बात बताने का उद्देश्य केवल इतना ही है कि हम किसी भी चमड़ी की तकलीफ को इतना लाइटली न लें।

तो , आज कुछ बातें स्केबीज़ चर्म रोग के बारे में करते हैं जिस से लोग बहुत परेशान भी होते हैं और डर भी बहुत जाते हैं।

स्केबीज़ चर्म रोग सारकॉपटिस स्केबी नामक एक छोटे से कीड़े के द्वारा फैलता है। यह छूत की बीमारी तो है लेकिन यह हवा, पानी अथवा सांस के द्वारा नहीं फैलती, बल्कि यह रोगी के साथ निकट संपर्क से फैलती है। इसलिए परिवार में एक व्यक्ति से यह सारे परिवार में ही अकसर फैल जाती है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति को छूने मात्र ही से यह रोग नहीं हो जाता बल्कि नज़दीकी एवं काफी लंबे अरसे तक रोग-ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में रहने से यह फैलता है।

इस के बारे में विशेष ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि इस का संक्रमण होने पर लगभग एक महीने या उस से भी ज्यादा समय तक मरीज को बिल्कुल खुजली नहीं होती और इस दौरान तो उसे यह भी पता नहीं होता कि उसे कोई चर्म रोग है। लेकिन इस दौरान भी उस के द्वारा यह रोग आगे दूसरे लोगों को तो अवश्य फैल सकता है।

आम तौर पर बच्चों में यह रोग बहुत आम है। इस में सारे शरीर पर छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं जिन में बेहद खुजली ( खास कर रात के समय) होती है, लेकिन आम तौर पर ये दाने उंगलियों के बीच, कलाई पर, पेट पर एवं प्रजनन अंगों पर ही होते हैं।

इन दानों पर खुजली करने से संक्रमण बढ़ता है, पस वाले फोड़े बन जाते हैं जिस की वजह से शरीर के विभिन्न भागों में गांठें ( लिम्फ नॉड्स) सूज जाती हैं और बुखार हो जाता है।

साधारणतयः स्कबीज़ चर्म रोग से मृत्यु हो जाना सुनने में नहीं आता, लेकिन अगर छोटे बच्चों को यह त्वचा रोग हो तो उन का विशेष ध्यान रखने की ज़रूरत है। इन में रोग –प्रतिरोधक क्षमता( इम्यूनिटि) तो वैसे ही कम होती है—अगर पस पड़ने से, बुखार होने से , संक्रमण रक्त में चला जाए ( सैप्टीसीमिया) तो यह जान लेवा सिद्ध हो सकता है।

इस स्केबीज़ चर्म रोग के इलाज के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बातें ये भी हैं....

· घर में एक भी सदस्य को स्केबीज़ होने पर पूरे परिवार का एक साथ इलाज होना लाज़मी है।

· इस बीमारी के पूर्ण इलाज के लिए बहुत ही प्रभावशाली लगाने वाली दवाईयां उपलब्ध हैं। इन का प्रयोग आप अपने चिकित्सक से मिलने के पश्चात् कर सकते हैं। गले के नीचे-नीचे शरीर के सभी भागों में इसे ब्रुश से लगाया जाता है। सारे शरीर की चमड़ी पर इसे लगाना बहुत ज़रूरी है। अगर मरीज इस केवल उन जगहों पर ही लगाएंगे जहां पर ये दाने हैं तो बीमारी का नाश नहीं हो पाएगा। 24घंटे के अंतराल पर यह दवाई ऐसे ही शरीर पर दो बार लगाई जाती है। और उस के बाद नहा लिया जाता है। इस दवाई का शरीर पर 48 घंटे लगे रहना बहुत ज़रूरी है।

· विश्व विख्यात पुस्तक जहां कोई डाक्टर न होके लेखक डेविड वर्नर इस पुस्तक में स्केबीज़ पर एक पेस्ट लगाने की सलाह देते हैं। इसे तैयार करने की विधि इस प्रकार है—थोड़े से पानी में नीम के कुछ पत्ते उबाल लें। इस हल्दी के पावडर के साथ मिला कर एक गाढ़ी पेस्ट बना लें। सारे शरीर को अच्छी तरह से साबुन लगा कर धोने के पश्चात् इस पेस्ट का सारे शरीर विशेषकर उंगलियों के बीच के हिस्सों, टांगों के अंदरूनी हिस्सों( inside portion of thighs) एवं पैरों की उंगलियों के बीच लेप कर दें। उस के बाद सूर्य की रोशनी में कुछ समय खड़े हो जायें। अगले तीन दिनों तक रोज़ाना यह लेप करें, लेकिन नहाएं नहीं। चौथे दिन मरीज़ नहाने के बाद साफ़ सुथरे, सूखे कपड़े पहने। चमड़ी रोग विशेषज्ञ से मिलने से पहले आप इस घरेलु पेस्ट का उपयोग तो अवश्य कर ही सकते हैं , लेकिन प्रोपर डायग्नोसिस एवं यह पता करने के लिए कि रोग जड़ से खत्म हो गया है या नहीं...इस के लिए चर्म-रोग विशेषज्ञ से मिलना तो ज़रूरी है ही।

· स्केबीज़ से डरिए नहीं, इस का इलाज तो बहुत आसान है ही, रोकथाम भी बड़ी आसान है। साफ़-स्वच्छ जीवन-शैली, रोज़ाना नहा धो-कर कपड़े बदलने से इससे बचा जा सकता है। कपड़े और बिस्तर की सफाई का ध्यान रखें और सूर्य की रोशनी में इन्हें अच्छी तरह सुखाएं। और हां, छोटे बच्चों को भी यह रोग होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें।

जब जीना दूभर सा कर देती है यह खारिश-खुजली....



हमारे यहां खुजली मिटाने वाली दवाईयों की बिक्री बहुत होती है क्योंकि अकसर लोग बिना किसी डाक्टरी सलाह के अपने आप ही कोई भी ट्यूब बाज़ार से ला कर लगानी शुरू कर देते हैं। बहुत बार तो देखने में आया है कि स्टीरॉयड युक्त ट्यूबें भी खुजली के लिए बिना किसी डाक्टर से परामर्श किए हुए खूब इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में अकसर रोग को बढ़ावा मिल जाता है। हां,अगर को क्वालीफाईड चिकित्सक अथवा चमड़ी रोग विशेषज्ञ की देख रेख में—उस की सलाह अनुसार- आप इन ट्यूबों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बात और है।
किसी भी तरह के चर्म-रोग होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से मिलें----कईं बार कुछ दिन दवाई लगाने पर उपेक्षित आराम नहीं मिलता । ऐसे में आप का फैमिली डाक्टर आप को स्वयं ही किसी चर्म-रोग विशेषज्ञ के पास रैफर कर देगा, अन्यथा आप स्वयं भी किसी प्रशिक्षित चर्म रोग विशेषज्ञ से मिल सकते हैं।
मेरे एक मित्र की माता जी की एक आंख के आस-पास चेहरे की चमड़ी में अचानक दर्द रहने लगा......दर्द बहुत तेज़ था.....साथ में छोटे छोटे दाने से निकल आये। उस ने किसी दूसरे शहर में रह रहे हमारे किसी मित्र से बात की जो चर्म-रोग विशेषज्ञ हैं....उस ने सारी बात सुनते ही उस मित्र को कहा कि अपने शहर के किसी चर्म-रोग विशेषज्ञ के पास माता जी को तुरंत ले कर जाओ क्योंकि देख कर ही पूरा पत लग पायेगा (शायद वो पूरी डिसक्रिपश्न सुन कर डॉयग्नोसिस कर चुके थे) । जब चर्म –रोग विशेषज्ञ के पास माता जी को लेकर जाया गया, तो उस ने देखते ही कह दिया की यह तो इन को हर्पिज़ यॉस्टर हुया है। खूब सारी दवाईंयां तुरंत शुरू की गईं...और नेत्र विशेषज्ञ से मिलने को भी कहा गया। नेत्र विशेषज्ञ ने भी यही कहा कि टाइम पर आ गए हो, नहीं तो आँख ही बेकार हो सकती थी। यह बात बताने का उद्देश्य केवल इतना ही है कि हम किसी भी चमड़ी की तकलीफ को इतना लाइटली न लें।
तो , आज कुछ बातें स्केबीज़ चर्म रोग के बारे में करते हैं जिस से लोग बहुत परेशान भी होते हैं और डर भी बहुत जाते हैं।
स्केबीज़ चर्म रोग सारकॉपटिस स्केबी नामक एक छोटे से कीड़े के द्वारा फैलता है। यह छूत की बीमारी तो है लेकिन यह हवा, पानी अथवा सांस के द्वारा नहीं फैलती, बल्कि यह रोगी के साथ निकट संपर्क से फैलती है। इसलिए परिवार में एक व्यक्ति से यह सारे परिवार में ही अकसर फैल जाती है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति को छूने मात्र ही से यह रोग नहीं हो जाता बल्कि नज़दीकी एवं काफी लंबे अरसे तक रोग-ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में रहने से यह फैलता है।
इस के बारे में विशेष ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि इस का संक्रमण होने पर लगभग एक महीने या उस से भी ज्यादा समय तक मरीज को बिल्कुल खुजली नहीं होती और इस दौरान तो उसे यह भी पता नहीं होता कि उसे कोई चर्म रोग है। लेकिन इस दौरान भी उस के द्वारा यह रोग आगे दूसरे लोगों को तो अवश्य फैल सकता है।
आम तौर पर बच्चों में यह रोग बहुत आम है। इस में सारे शरीर पर छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं जिन में बेहद खुजली ( खास कर रात के समय) होती है, लेकिन आम तौर पर ये दाने उंगलियों के बीच, कलाई पर, पेट पर एवं प्रजनन अंगों पर ही होते हैं।
इन दानों पर खुजली करने से संक्रमण बढ़ता है, पस वाले फोड़े बन जाते हैं जिस की वजह से शरीर के विभिन्न भागों में गांठें ( लिम्फ नॉड्स) सूज जाती हैं और बुखार हो जाता है।
साधारणतयः स्कबीज़ चर्म रोग से मृत्यु हो जाना सुनने में नहीं आता, लेकिन अगर छोटे बच्चों को यह त्वचा रोग हो तो उन का विशेष ध्यान रखने की ज़रूरत है। इन में रोग –प्रतिरोधक क्षमता( इम्यूनिटि) तो वैसे ही कम होती है—अगर पस पड़ने से, बुखार होने से , संक्रमण रक्त में चला जाए ( सैप्टीसीमिया) तो यह जान लेवा सिद्ध हो सकता है।
इस स्केबीज़ चर्म रोग के इलाज के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बातें ये भी हैं....
· घर में एक भी सदस्य को स्केबीज़ होने पर पूरे परिवार का एक साथ इलाज होना लाज़मी है।
· इस बीमारी के पूर्ण इलाज के लिए बहुत ही प्रभावशाली लगाने वाली दवाईयां उपलब्ध हैं। इन का प्रयोग आप अपने चिकित्सक से मिलने के पश्चात् कर सकते हैं। गले के नीचे-नीचे शरीर के सभी भागों में इसे ब्रुश से लगाया जाता है। सारे शरीर की चमड़ी पर इसे लगाना बहुत ज़रूरी है। अगर मरीज इस केवल उन जगहों पर ही लगाएंगे जहां पर ये दाने हैं तो बीमारी का नाश नहीं हो पाएगा। 24घंटे के अंतराल पर यह दवाई ऐसे ही शरीर पर दो बार लगाई जाती है। और उस के बाद नहा लिया जाता है। इस दवाई का शरीर पर 48 घंटे लगे रहना बहुत ज़रूरी है।
· विश्व विख्यात पुस्तक “ जहां कोई डाक्टर न हो”के लेखक डेविड वर्नर इस पुस्तक में स्केबीज़ पर एक पेस्ट लगाने की सलाह देते हैं। इसे तैयार करने की विधि इस प्रकार है—थोड़े से पानी में नीम के कुछ पत्ते उबाल लें। इस हल्दी के पावडर के साथ मिला कर एक गाढ़ी पेस्ट बना लें। सारे शरीर को अच्छी तरह से साबुन लगा कर धोने के पश्चात् इस पेस्ट का सारे शरीर विशेषकर उंगलियों के बीच के हिस्सों, टांगों के अंदरूनी हिस्सों( inside portion of thighs) एवं पैरों की उंगलियों के बीच लेप कर दें। उस के बाद सूर्य की रोशनी में कुछ समय खड़े हो जायें। अगले तीन दिनों तक रोज़ाना यह लेप करें, लेकिन नहाएं नहीं। चौथे दिन मरीज़ नहाने के बाद साफ़ सुथरे, सूखे कपड़े पहने। चमड़ी रोग विशेषज्ञ से मिलने से पहले आप इस घरेलु पेस्ट का उपयोग तो अवश्य कर ही सकते हैं , लेकिन प्रोपर डायग्नोसिस एवं यह पता करने के लिए कि रोग जड़ से खत्म हो गया है या नहीं...इस के लिए चर्म-रोग विशेषज्ञ से मिलना तो ज़रूरी है ही।
· स्केबीज़ से डरिए नहीं, इस का इलाज तो बहुत आसान है ही, रोकथाम भी बड़ी आसान है। साफ़-स्वच्छ जीवन-शैली, रोज़ाना नहा धो-कर कपड़े बदलने से इससे बचा जा सकता है। कपड़े और बिस्तर की सफाई का ध्यान रखें और सूर्य की रोशनी में इन्हें अच्छी तरह सुखाएं। और हां, छोटे बच्चों को भी यह रोग होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें।

1 comments:

Gyandutt Pandey said...
आप सही कह रहे हैं डाक्टर साहब। स्किन एलमेण्ट के मामलों में हमने सेल्फ मेडीकेशन का प्रयोग भी किया है और डाक्टर की सलाह पर भी। लगभग सभी मामलों में अंतत डाक्टर की सलाह से ही काम बना है। और डाक्टर की सलाह पर इतनी तेजी से आराम हुआ कि लगता था सेल्फ मेडिकेशन की क्या बेवकूफी कर रहे थे।
कई बार तो इस शर्म से डाक्टर के पास नहीं जाते थे कि यह न लगे कि हम सामान्य हाइजीन का भी प्रयोग नहीं करते। :-)