| अभी इस पोस्ट को समेटने से पांच मिनट पहले यह पेपर मेरे हाथ में आया .... |
हमें यह नहीं याद कि आज से ४०-५० बरस पहले जब कोई पेड़ गिरता था तो साथ में किसी न किसी की जान भी ले लेता था…पहले हनेरी-झक्खड़ (अंधेरी-तूफ़ान) आने पर, मूसलाधार गर्ज के साथ बारिश होने से पेड़ों की टहनियां कभी कभी टूट जाया करती थीं …जब बारिश थमने के बाद हम बाहर निकलते और यह सब देखते तो बहुत ज़्यादा हैरानी भी होती और अजीब भी लगता…
कईं बार पेड़ की बड़ी शाखाएं सड़क के बीचों बीच गिर जाती जिसे बहुत से लोग उठा कर या घसीट कर वहां से हटा देते ताकि आने जाने वालों को कोई दिक्कत न हो…
यह अभी कुछ साल पहले की ही बात है कि जिन शहरों में हम रहे हैं, वहां हनेरी-झक्खड़ आने पर पेड़ों के गिरने की खबरें आने लगीं….और एक दो बड़े पेड़ गिर भी जाते तो अखबार में फोटो आ जाती…अकसर लोग वहां पर उसे देखने जाते …और ऐसे लगता था जैसे उस पेड़ के जाने पर वहां आने वाले सारे लोग शोक-संतृप्त हैं…भावुक से दिखा करते थे उसे गिरा हुआ देख कर …
कईं बार पेड़ जो सड़क के बीचोंबीच गिरता तो उसे सड़क से हटाने के लिए कईं लोग आरी, हथौड़ी लेकर पहुंचे होते …और खासी मशक्कत के बाद उसे वहां से हटाया जाता …
लेकिन अभी बिना किसी तूफ़ान के…सामान्य बारिश में भी आए दिन पेड़ गिरने लगे हैं…और बड़े बड़े पेड़ जिस आसानी से छोटी छोटी बात पर गिरने लगे हैं उतनी ही आसानी से हटाए जाने लगे हैं…देखते ही देखते उसे काट कर हटाने वाली मशीनें पहुंच जाती हैं….चंद मिनटों में काट कर उसे हटा दिया जाता है …क्योंकि अब सारा सिस्टम सैट है, यह सब को समझने की ज़रूरत है, बस पेड़ के गिरने का ही इंतज़ार हो रहा होता है जैसे…
इधर बंबई में बहुत पेड़ गिर रहे हैं….अखबार में तो बहुत से कारण लिखे होते हैं…लेकिन अधिकतर पेड़ों के गिराए जाने का कारण यही दिखता है कि हमने जब जब भी विकास किया, पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई ….सैंकड़ों-हज़ारों पेड़ जो भी हमारे रास्ते में आए हमने उन को अपने रास्ते से हटाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी…आप भी अखबार पढ़ते होंगे, कोई ऐसा विकास-कार्य देखा आपने जो इसलिए रुक गया या टल गया या जिस का रास्ता बदल दिया गया क्योंकि उस के रास्ते में हज़ारों पेड़ आ रहे थे …मुझे ऐसा एक प्रोजैक्ट भी याद नहीं है ….एक बार जब फाईल पर फैसला ले लिया गया कि पेड़ हटने हैं तो वे हट के ही रहेंगे …किसी भी कीमत पर ….कोर्ट-कचहरी भी जाने से कुछ होता नहीं …ग्रीन ट्रिब्यूनल, पर्यावरण क्लियरैंस …सब कुछ मैनेज हो जाता है और हो ही रहा है …ज़्यादा से ज़्यादा ये संस्थान ऐसे कह देते हैं कि इतने पेड़ ट्रांसप्लांट कर के इधर से उधर लगवाने होंगे, या इतने हज़ार पेड़ या इतने लाख पेड़ किसी दूसरी जगह पर रोपने होंगे ….इस से आगे मैं कुछ नहीं लिख सकता, मैं भी मजबूर हूं…
कईं बार अखबार में आता है कि जो पेड़ अचानक इतनी संख्या में गिरने लगते हैं उस के पीछे यह कारण भी होता है कुछ स्वार्थी तत्व उस की जड़ों में एसिड या कुछ और कैमीकल डाल कर उसे कमज़ोर करते हैं ताकि वह आसानी से नेचुरल तरीके से गिर जाए और उसे नेचुरल डैथ की श्रेणी मेंं लिया जा सके….
| जिस स्कूल बस में वह ११ साल का विहान घर लौट रहा था ...पहुंच कहीं और ही गया। |
और भी कारण तो हैं ही, लेकिन बंबई में तो आए दिन जो सड़क किनारे बड़े बड़े विशाल पेड़ गिर रहे हैं उन का कारण यही है कि यहां पर सड़कों का कंकरीटीकरण बड़ी संख्या में हो रहा है….और उस से पहले जो ज़मीन तैयार होती है, उस के अंतर्गत रास्ते में या किनारे पर खड़े बड़े बड़े पेडों की जड़ें भी अच्छी खासी कट जाती हैं….हमें तो इन की यह हालत देख कर ही डर लगता है …पता नहीं उद्यान विभाग के विशेषज्ञों को क्यों नहीं लगता ….फिर दो दिन बाद देखते हैं कि उस सारे रास्ते पर कंक्रीट बिछ गया है, बढ़िया मजबूत सड़क बन गई है …और वह पेड़ भी वहां पर खड़ा है…कमज़ोर जड़ों के एक बात, और दूसरी बात यह कि जितनी बची भी हैं, उस का भी कंकरीट गला दबा देती है…रिजल्ट क्या? …….रिजल्ट यही जो दो दिन पहले हुआ …एक स्कूल बस जा रही थी ..अचानक एक पीपल का पेड़ उस पर गिरा …एक ११ साल का बच्चा तो वहीं ढेर हो गया और कईं घायल हो गए ….
इस केस में बीएमसी के तीन चार कर्मचारी अधिकारी सुस्पेंड हो गए हैं ….क्या हो जाएगा इस से ……उन को नौकरी से हटाने से भी क्या हो जाएगा….वैसे तो ऐसा कुछ होगा नहीं ….ऐसे हटाए जाने लगे लोग नौकरियों से तो दफ्तर खाली हो जाएंगे ….रही बात राहत की …किसी बेचारी दंपति का इकलौता एक ११ साल का बच्चा जो जला गया, उसे तुम क्या ही राहत दे पाओगे …….। ऐसी बात करना भी बेहद असंवेदनशील लगता है ….।
अभी मुंबई में बारिश शुरु हुए १-२ दिन ही हुए थे कि यह हादसा हो गया …एक नहीं पेड़ तो १५० के करीब गिरे हैं …लेकिन अब पेड़ों के गिरने की खबरें कोई खबरें नहीं लगतीं जब तक उन के नीचे कोई शख्स न दब जाए….और हां, आए दिन जो कमज़ोर पड़ रहे पेड़ों की टहनियां गिरने से जो मोटर-कारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, वे तो किसी गिनती में ही नहीं हैं….बस, अगर उस वक्त उनके अंदर कोई बैठा नहीं है या वे कहीं पार्क की हुई हैं तो बस लोग इस बात ही से खुश हो जाते हैं कि जान बची सो लाखों पाए….कुछ वर्ष पहली हमारी थार जीप जो यहीं पाली हिल की मेन रोड़ पर पार्क की हुई थी, एक बड़ी सी टहनी उस पर गिरने से सुबह उस की छत पूरी फटी हुई थी …..बड़ा माथा-पच्ची हुई थी उसे ठीक करवाने में ….।
| देवानंद के पड़ोस की बिल्डिंग |
उसी रोड पर थोड़ा आगे देवानंद रोड़ पर देवानंद के घर के साथ वाली बिल्ड़िंग में भी कल एक बहुत बड़ा पेड़ गिरा हुआ दिखा …शाम के वक्त मैं टहल रहा था तो मैंने पास खड़े एक भेल बेचने वाले से पूछा कि यह कैसे हुआ। उसने बताया कि पेड़ तो गिरा परसों लेकिन एक ड्राईवर और एक दंपति जो उस कार में थे, उन की जान बच गई…..गिरते हुए इतने बड़े पेड़ ने उन की कार के बोनट को बस छुआ और लमलेट हो गया….
देखिए, कितनी सफाई से तुरंत उस पेड़ को काट फाट के साफ कर दिया गया है …पेड़ गिरने के बाद लकड़ी समेटने वाले सक्रिय हो जाते हैं …क्योंकि आज कल लकड़ी भी एक तरह को सोना ही है …
मैंने ऊपर लिखा कि कईं जगहों पर ऐसा भी देखा गया कि बड़े पेड़ों की जड़ें कमज़ोर करने के लिए उस की जड़ों में एसिड या इसी तरह का कोई केमीकल डाल दिया जाता है ताकि वे जल्दी से जल्दी गिरें और इस तरह के गिरोह के लोगों का काम आसान हो …..लकड़ी बिके और काम निपटे ….।
कुछ दिन पहले एक खबर टाइम्स में दिखी कि मुंबई के पाली हिल इलाके में सभी पुराने पेड़ों का चेक-अप चल रहा है …तीन चार दिन चलने वाला था…मेरा ख्याल भी था कि किसी दिन देख कर आऊंगा …एक वैन में कुछ मशीनें थीं, कुछ विशेषज्ञ टाइप लोग थे ऐसा कहा गया था उस खबर में जो पुराने पेड़ों का अल्ट्रासाऊंड कर के …यह पता करेंगे कि उन की जड़ें कितनी गहरी या मजबूत या कमज़ोर हैं और बिना उन को काटे यह भी पता करेंगे कि उन के तने कितने स्वस्थ या अस्वस्थ हैं, कहीं वे अंदर से खोखले तो नहीं हो चुके ….कहने का मतलब की पुराने पेड़ों की सेहत की पूरी जांच। मैं सोच रहा था कि ये हेल्थ-चैकअप इन पाली हिल के पेड़ों का ही क्यों, फिर पता चला कि यह चैक-अप बहुत महंगा होता है ……..मुझे नहीं पता कि पेड़ों के इस चैक-्अप को कोई स्पांसर्स मिला था या बीएमसी अपने खर्च कर यह करवा रही थी…कुछ नहीं पता मुझे ….लेेकिन उस जांच के बाद यह तय किया जाना था कि कौन सा पेड़ गिरा दिया जाए किसी छोड़ दिया जाए….पता नहीं जो दो दिन पहले पाली हिल वाला जो पेड़ गिरा है, उस का हैल्थ-कार्ड का क्या कह रहा था …गिरने के बाद तो वह अंदर से पूरा खोखला दिख रहा है …।
कल ही मैं सुबह जब कहीं जा रहा था तो एक और बहुत बड़ा पेड़ गिरा हुआ था …किसी पुरानी खंड़हर बिल्डिंग के सामने …पता नहीं मुझे तो कहीं भी पेड़ का गिरना सामान्य नहीं लगता …कितने पेड़ होते होंगे जो अपनी मौत मरते होंगे, लेकिन बहुतेरों को तो हमारा लालच, भ्रष्टाचार, हमारी उपेक्षा….ये सब मिल कर गिरा के मार देते होंगे …
उम्रदराज़ पेड़ आम तौर पर मरते नहीं, बढ़ती उम्र के साथ और भी सुंदर दिखने लगते हैं जैसे यह हमारी कॉलोनी में खड़ा यह पेड़ ….जैसे जैसे बड़ा हो रहा है, इस की सुंदरता निखर रही है …किस्मत वाला है, सरकारी कालोनी के इतने बड़े इलाके में मस्ती से खड़ा है ……..और सब का चहेता है, आप इस फोटो मेें देख ही रहे हैं….वैसे इस के यहां होने से हम अपने आप को इस से ज़्यादा किस्मतवाला मानते हैं…….है कि नहीं?
मेरा एक लेख यह भी है, १० साल पुराना...मैंने भी कल फिर से देखा, आप भी देखिएगा कभी ...लोग दो तरह के होते हैं...
और एक बूढ़े, कमज़ोर की बात भी सुन लीजिए....वह इतना कमज़ोर होने पर भी क्यों नहीं गिरना चाहता ....किस के लिए फ्रिकमंद है ....पढ़िए....