Saturday, January 31, 2009

चमड़ी को चमड़ा बनने से पहले --- पानमसाले को तो अभी से ही थूकना होगा !!


हमारा धोबी नत्थू अकसर मुझे जब यह कहता है कि वह तो पिछले 20 साल से ज़र्दे-धूम्रपान का सेवन कर रहा है लेकिन उसे किसी प्रकार की बीमारी नहीं है, यहां तक की कभी कब्ज की शिकायत भी नहीं हुई ----यह सुन कर मुझे यह लगता है कि वह मुझे मुंह चिढ़ा रहा हो कि देखो, हम तो सब कुछ खा पी रहे हैं लेकिन फिर भी हैं एक दम फिट !!

वैसे मुझे वह क्या चिढ़ायेगा ---लेकिन इसे पढ़ कर कहीं आप भी यह मत सोच लें कि ज़र्दा-धूम्रपान उस के लिये घातक नहीं है। ज़र्दा-धूम्रपान से होने वाले नुकसान शुरू शुरू में महसूस नहीं होते हैं –इन का पता तभी चलता है जब कोई लाइलाज बीमारी जकड़ लेती है। लेकिन यह पता नहीं कि किसी व्यक्ति को यह लाइलाज रोग 5 वर्ष ज़र्दा-धूम्रपान के सेवन पर होगा या 50 वर्ष के इस्तेमाल करने के बाद !!

इसे समझने के लिये एक उदाहरण देखिये --- अपने मकान के पिछवाड़े में बार बार भरने वाले बरसात के पानी को यदि आप ना देख पायें तो नींव में जाने वाले इस पानी के खतरे का अहसास आपको नहीं होगा। उसका पता तभी चलेगा जब इससे मकान की दीवार में दरार आ जाए या मकान ही गिर जाए ---लेकिन तब तक अकसर बहुत देर हो चुकी होती है। ज़र्दा-धूम्रपान का इस्तेमाल एक प्रकार से बार-बार पिछवाड़े में भरने वाले पानी के समान है।

आज मेरे पास लगभग बीस वर्ष का युवक आया ----आया तो था वह मुंह में किसी गांठ को दिखाने के लिये ---लेकिन मुझे उस का मुंह देख कर लगा इस ने तो खूब पान-मसाला खाया लगता है। पूछने पर उसने बताया कि डेढ़-दो साल पहले इस पानमसाले के एक पैकेट को रोज़ाना खाना शूरू किया था और पिछले तीन महीने से छोड़ रखा है--- ( लगभग सभी मरीज़ यही कहते हैं कि कुछ दिन पहले ही बिल्कुल छोड़ दिया है !!) –उस नवयुवक के मुंह की चमड़ी बिलकुल चमड़े जैसी बन चुकी थी --- और चमड़ा भी बिलकुल वैसा जैसा पुराना चमड़ा होता है ---अपने जिस शूज़ को आप छःमहीने तक नहीं पहनते जिस तरह से उस का चमड़ा सूख जाता है, बिलकुल वैसी ही लग रही थी उस के मुंह की चमड़ी ---- उस से मुंह पूरा खोले ही नहीं बन पा रहा था । इस अवस्था को कहते हैं ----ओरल सबम्यूकसफाईब्रोसिस (Oral submucous fibrosis)---- यह पानमसाला सादा या ज़र्देवाला खाने से हो सकती है और इसे मुंह के कैंसर की पूर्व-अवस्था कहा जाता है (Oral precancerous lesion of the oral cavity) .

कृपया इसे ध्यान से पढ़िये ---- मुंह की कोमल त्वचा (Oral mucous membrane) के साथ तंबाकू, चूना, सुपारी आदि का सतत संसर्ग बड़े भयंकर परिणाम ले आता है । मुंह की त्वचा द्वारा रक्त में घुलता निकोटीन ( nicotine) तो अपने हिस्से का काम करता ही है , लेकिन इन वस्तुओं का सतत संपर्क मुंह की कोमल त्वचा के ऊपर की पर्त को इतना ज़्यादा नुकसान पहुंचाता है कि धीरे धीरे यह कोमल त्वचा अपना मुलायमपन (smoothness), चमकीलापन (luster), और लचक (elasticity) खो देती है।
लार-ग्रंथि (salivary gland) को हानि पहुंचने से लार कम हो जाती है और मुंह सूखा रहता है। स्वाद परखने वाली ग्रंथियां (taste buds) भी कुंठित हो जाती हैं और प्रकृति की जिस अद्भुत रचना से मानव नाना प्रकार के भिन्न भिन्न स्वादों को परख पाता है, वे निक्म्मी हो जाती हैं।

इस के फलस्वरूप मुंह की त्वचा सूखी, खुरदरी, झुर्रीदार बन जाती है और उस की निचली पर्त में भी अनेकानेक परिवर्तन होने लगते हैं। ऐसे मरीज़ों का मुंह खुलना धीरे धीरे बंद हो जाता है जैसा कि मुझे आज मिले इस मरीज़ का हाल था। गरम,ठंडा,तीखा, खट्टा सहन करने की क्षमता बहुत ही कम हो जाती है। इसी स्थिति को ही सब-म्यूक्स फाईब्रोसिस (Submucous fibrosis) कहा जाता है और यह मुंह में होने वाले कैंसर की एक खतरे की घंटी के बराबर है। ऐसे व्यक्ति को तुरंत पान-मसाले, गुटखे, ज़र्दे वाली लत छोड़ कर अपने दंत-चिकित्सक से बिना किसी देरी के मिलना चाहिये क्योंकि ऐसे व्यक्तियों में भविष्य में मुंह का कैंसर हो जाने की आशंका होती है। इसीलिये इन सब को ---पानमसाले को भी ----हमेशा के लिये आज ही इसे थूक देने में समझदारी है।

संक्षेप में कहें तो इस तरह के सब पदार्थ केवल लोगों की सेहत के साथ घिनौना खिलवाड़ ही कर रहे हैं ---ध्यान आ रहा है कि पिछले हफ्ते ही एक नवयुवक जिस की उम्र भी लगभग 20-22 की ही होगी के मुंह में देखने पर पाया कि उस के मुंह में ओरल-ल्यूकोप्लेकिया है --- ( यह भी मुंह के कैंसर की एक पूर्व-अवस्था ही है ) लेकिन इस उम्र में मैंने पहले यह अवस्था पहले कभी नहीं देखी थी ---अकसर 35-40 साल के आसपास ही मैंने इस तरह के ल्यूकोप्लेकिया के केस देखे थे ---वह युवक कुछ सालों से ज़र्दे का सेवन करता था। ध्यान इस बात का भी आ रहा है कि कुछ हानिकारक पदार्थ जो इन में पड़े होते हैं उन का हमें पता है लेकिन उन पदार्थों का हमें कैसे पता चलेगा जिन के बारे में तो पैकेट के ऊपर भी कुछ नहीं लिखा होता लेकिन अकसर मीडिया में इन हानिकारक तत्वों की भी पोल खुलती रहती है।

चलो, यार, इधर ब्रेक लगाते हैं ----ताकि इस समय पान मसाला चबा रहे अपने बंधु , इसे थूक कर ( सदा,सदा के लिये !!) , अच्छी तरह कुल्ला करने के बाद तरोताज़ा होकर नेट पर वापिस लौटें और फिलहाल चुपचाप इस सुपरहिट गाने से ही काम चला लिया जाए।