Sunday, June 21, 2009

आज की बात - 21 जून 2009

सपने --- सपने वो नहीं जो हम लोग सोते में देखते हैं, सपना तो दरअसल वह है जो हमारी नींद ही चुरा ले।
Dream is not what you see in sleep but it is what which does not let you sleep.

दैनिक निर्णय
हर दिन हम सब लोगों को एक ना एक फैसला करना होता है ---- यह फैसला हमारे खुद के लिये ही होता है कि क्या हम कुछ देना चाह रहे हैं या लेना चाह रहे हैं, क्या किसी से प्रेम करना है या प्रेम को सिरे से नकार देना है, क्या शांति-दूत बनना है या बिना वजह के झगड़ों में पड़ना है, और यही हर दिन लिया गया एक निर्णय होता है जो कि हमारी सारी अगली ज़िंदगी की रूप-रेखा तय करता है।
The Daily Decision
Each day there's a decision
That each of us has to make,
For each us us needs to decide for ourselves,
Whether to give or to take,
Whether to love or reject love,
Whether to bring Peace or strife,
And that is the Daily Decision,
that reflects the whole rest of our life.

एक बात जो मुझे The Hindu में एक filler के रूप में नज़र आई थी और जो मेरी स्क्रैप-बुक में चिपकी हुई है, वह यह है ---- काश मैं इस का मतलब समझ पाऊ!
हम तैराकी कैसे सीखते हैं ? हम गल्तियां करनी शुरू करते हैं, हम गल्तियां करने से सीखने की शुरूआत करते हैं, हम यही कुछ करते हैं ना ? और इस का नतीजा क्या निकलता है ? फिर हम लोग दूसरी गल्तियां करने लगते हैं, और यह सिलसिला तब तलक जारी रहता है जब तक हम लोग वे सारी गल्तियां कर डालते हैं जितनी कि बिना पानी में डूबे हुये कर पाना संभव है। और मज़े की बात तो यह कि कुछ गल्तियों को तो हम बार-बार दोहराते हैं। और देखिये इस का क्या नतीजा निकलता है ? अचानक हम तैराकी सीख कर उस का मज़ा लूटने लगते हैं।
ज़िंदगी भी तैराकी सीखने जैसी ही है। गल्तियों करने से हमें ज़रा भी डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि जीने की कला सीख पाने के लिये इस के अलावा कोई रास्ती ही नहीं है।
What do you first do when you learn to swim? You make mistakes, do you not? And what happens? You make other mistakes, and when you have made all the mistakes you possible can without drowning- and some of them many times over - what do you find? That you can swim ? Well -- life is just the same as learning to swim ! Do not be afraid of making mistakes, for there is no other way of learning how ot live !
---Alfred Adler.

ओह यार, मैं भी यह किस प्रवचनबाजी में पढ़ गया सुबह सुबह ---यह धंधा तो केबल टीवी पर ताबड़तोड़ पहले ही से चल रहा है। मेरा तो मन हो रहा है इस समय मैं यू-ट्यूब पर जा कर अपना एक बहुत ही ज़्यादा पसंदीदा गाना सुनूं और इस ऐतवार की एक बहुत बढ़िया शुरूआत करूं ....
पल्ले विच अग दे अंगारे नहीं लुकदे,
इश्क ते मुश्क छुपाये नहीं छुपदे,
फिर भी यह राज़ जान जाती है दुनिया,
होठों पे लगा ले चाहे ताले कोई चुप दे,
हो ---बूटा पत्थरां ते उगदा प्यार दा !!


वाह भई वाह, क्या गीत है, क्या लिरिक्स हैं, क्या पिक्चराईज़ेशन है, क्या संगीत है, मुझे तो मज़ा आ गया ---इसे मैं अनगिनत बार सुन चुका हूं।