Wednesday, February 10, 2016

वाट्सएप ज्ञान बहार १०.२.१६

कुछ समय पहले वाट्सएप पर यह मैसेज मिला...पहले कहीं पढ़ा था, लेकिन भूल चुका था, अभी फिर से याद आ गया..आप भी पढ़िए..

आदमी की सोच और नसीहत समय समय पर बदलती रहती है।
चाय में मक्खी गिरे तो चाय फेक देते हैं ।
देशी घी में गिरे जाये तो मक्खी को फेक देते हैं।

अभी मैं एक गीत बजा रहा हूं...मुझे अकसर Blogger Meets के दौरान पूछा जाता है कि आप को इतने पुराने पुराने गीत कैसे याद रहते हैं...इस का जवाब यही है कि ये गीत वे हैं जिन्हें सुनते सुनते हम बड़े हुए..यह टीवी से पहले वाले जमाने की बाते हैं...अपनी अपनी आदते हैं, मैं कभी भी रेडियो या टेपरिकार्डर लगाए बिना पढ़ाई करने भी नहीं बैठ पाता था...अब याद नहीं मैं कैसे मल्टीटॉस्किंग कर लेता था...लेिकन है सच...मैं आज भी नियमित रेडियो सुनता हूं ... i always feel that radio (now FM) is a great way of staying connected with our people! 

आज भी जब वाट्सएप पर जब जीवन जीने के कुछ टिप्स धड़ाधड़ मिले तो इन्हें पढ़ते हुए मेरा ध्यान सब से पहले जीने की राह के इस गीत की तरफ़ चला गया....पता नहीं दोस्तो सैंकड़ों या हज़ारों बार इसे सुना होगा... मैं तो ऐसा भी सोचता हूं कि शायद पुराने गीतकारों ने हमारे व्यक्तित्व के िवकास को भी --अच्छा या बुरा, यह पता नहीं, लेकिन प्रभावित किया तो होगा...संवेदनाओं को तो अवश्य झंकृत किया ही होगा....मैं भी आखिर क्यों इस तरह की  डिप्लोमेटिक भाषा लिखने लगा...होगा ..होगा...सीधे से क्यों नहीं कह देता कि बेशक जाने अनजाने में ही सही, हमारी शख्शियत इन सब गीतों से ढलती चली गई...मेरा तो ऐसा पक्का विश्वास है...हम लोग कभी किसी सत्संग में तो बचपन या युवावस्था में जाते नहीं थे, बस ये सब खूब सुन लिया करते थे.....वैसे कुछ कुछ बातें तो बिल्कुल सत्संग के सिलेबस से मेल खाती हुआ करती थीं पुराने गीतों में... यह भी मेरा एक फेवरेट गीत है .... हमेशा से... चेंज बस यही आया है कि पहले हम लोग स्कूल कालेज के जमाने में इन गीतों में कही बातों पर ध्यान नहीं देते थे इतना ....अब ज़्यादा ध्यान इन में ब्यां जीवन की सच्चाईयों की तरफ़ जाता है..


हां तो अब बारी है उन जीवन के टिप्स को शेयर करने की...तीन मैसेज आए हैं..इन के बीच बीच में मैं कुछ वीडियो भी शेयर कर रहा हूं जो आज वाट्सएप पर मिले....बीच बीच में इन्हें भी एम्बेड कर रहा हूं ...बिल्कुल वाट्सएप वाली फील देने के लिए...

जीवन जीने के टिप्स-1

गोमाता के दूध में, रुई भिगाओ आप
चूर्ण फिटकरी बांधिए, मिटे आंख का ताप

पानी में गुड डालिए, बित जाए जब रात
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात

धनिया की पत्ती मसल,बूंद नैन में डार
दुखती अँखियां ठीक हों,पल लागे दो-चार ।

ऊर्जा मिलती है बहुत,पिएं गुनगुना नीर
कब्ज खतम हो, पेट की मिट जाए हर पीर

सुबह-सुबह पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप ।

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार

सूर्य किरण, नेचुरल हवा, भोजन से स्पर्श
हेल्थ बनावें आपका, पग-पग देवें हर्ष 

भोजन करें जमीन पर, अल्थी पल्थी मार
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार

सुबह-सुबह फल जूस लो, दुपहर लस्सी-छांस
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश

दही उडद की दाल सँग, प्याज दूध के संग
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग

सुबह-दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार
डाक्टर, ओझा, वैद्य की, लुट जाए बाजार

देश, भेष, मौसम यथा, हो जैसा परिवेश
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश

इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्ष
...........


सब से पहले तो यह वीडियो उस जवान का है जिसे सियाचिन ग्लेशियर से निकाला गया ...आज का दिन उस की सलामती की दुआ करने में ही निकला....जाको राखे साईंयां वाली कहावत बार बार याद आती रही..

जीवन जीने के टिप्स--2
*******************
घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर ।

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास
पानी पीजै बैठकर,  कभी न आवें पास ।

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय
कसम राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश

देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल
अपच, आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर, हर दिन दोनो जून
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून

हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान
खतम करे ये जहर को, कह गै कवि सुजान

मिश्री, गुड, शहद, ये हैं गुण की खान
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान

चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक ।

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ

हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाढार

सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर

यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय

आलू का रस अरु शहद, हल्दी पीस लगाव
अल्प समय में ठीक हों, जलन, फँफोले, घाव

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ 
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड

जो भोजन के साथ ही ,पीता रहता नीर
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर

पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय

मूंगफली, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल

नम्बर वन सेंधा नमक, काला नमक सु जान
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान

मैदे से बिस्कुट बने, रोके हर उत्कर्ष
इसे न खावें रोक जो, हुए न चौदह वर्ष ।।
.........


इसे देखकर शायद हम सब को लगेगा कि यह हम ही हैं...मुझे तो अपने लिए ऐसा ही लगा...हम लोग मोबाइल में अकसर इतने ही तल्लीन हो जाया करते हैं कि हमें आस पास चल रही हरकतों का पता ही नहीं चलता....ऐसे लगा जैसे यह वीडियो हम सब को एक आईना दिखा रहा हो... 

जीवन जीने के टिप्स-3
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तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ
घेरा कोलस्टाल तो, आज रहे चिल्लाइ

जो जस्ता के पात्र का, करता है उपयोग
आमंत्रित करता सदा ,वह अडतालीस रोग ।

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति

नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग

दूषित पानी जो पिए, बिगडे उसका पेट
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय

भोजन करके खाइए, सौंफ, और गुड, पान
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान

हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खाव
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगाव

सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास

मूली खाओ हर दिवस, करे रोग का नाश
गैस और पाईल्स का, मिट जाए संत्रास ।

जब भी लघु शंका करें, खडे रहे यदि यार
इससे हड्डी रीढ की, होती है बेकार

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान 
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग

मछली के संग दूध या, दूध-चाय, नमकीन
चर्म रोग के साथ में, रोग बुलाते तीन

बर्गर, गुटखा, सुरा अरु कोक, सुअर का मांस
जो हरदम सेवन करे, बने गले का फाँस

ध्यान रखें ये बात तो, मिट जाएं हर क्लेश
डाक्टर, ओझा, वैद्य से, रखते दूर.   🚩

Disclaimer.. मैं इन जीवन जीने की टिप्स में से कुछ से इत्तेफाक रखता हूं ..कुछ से बिल्कुल नहीं..(इस पर कभी विस्तार से बात करेंगे) .आप भी अपने विवेकानुसार इन पर अमल करिएगा...मैंने इन्हें शेयर इसलिए किया क्योंकि सेहत संबंधी संदेश पहुंचाने का यह दोहों वाला जरिया अच्छा लगा।


यह वीडियो देख कर मैं यही सोच रहा था कि हम हिंदोस्तानियों से भी ज़्यादा लोग जुगाड़बाड़ हैं....सच में! हम तो छोटे मोटे जुगाड़ कर के ही खुश हो लिया करते हैं..

जाते जाते एक वीडियो शेयर कर रहा हूं मुनव्वर राना साब का ...लखनऊ में रहते हुए इस महान शायर को सुनने का बहुत बार मौका मिला...आज यह शख्स गम में हैं...कल इन की मां का इंतकाल हो गया है ...मुझे इस वीडियो का लिंक मेरे बेटे ने भेजा है ...सुनिएगा...May his mother rest in peace!



कुछ तस्वीरें भी मिलीं आज वाट्सएप पर जिन्हें यहां पेस्ट करना लाज़मी है... 






यह बात केवल ढोंगी बाबाओं पर लागू हो सकती है!