Thursday, March 31, 2016

अपना हर पल ऐसे जियो...जैसे कि आखिरी हो!

बहुत बहुत बधाई, यार....सेहतमंद रहो हमेशा 
कल रात मैं कुछ दिन पुरानी अखबारों को देख रहा था...कुछ भी नया था ही नहीं, वही मार-धाड़, लूटपाट, डकैती, छीना-झपटी..लेकिन एक तस्वीर देख कर मुझे बहुत खुशी हुई...अंबानी के बेटे की तस्वीर थी, सोमनाथ मंदिर में पूजा करते हुए...इस बंदे की दाद देनी पड़ेगी ..इसने कुछ महीनों में ७० किलो वजन कम किया है .. बेशक, अमेरिकी ट्रेनर-वेनर कोई आया हुआ है ऐसा कह रहे हैं...लेिकन फिर भी अंबानी जूनियर की हौंसलाफ़जाई तो करनी चाहिए...

बहुत अच्छे भाई..लगे रहो...शुभकामनाएँ एवं बधाईयां...बहुत अच्छे दिख रहे हो, इतना वजन कम करने के बाद..

मैं यही सोचने लगे कि कोई भी आदमी अगर ठान ले कुछ करने को तो क्या नहीं कर सकता! इकबाल फिल्म तो आपने देखी ही होगी...उसमें भी एक अलग तरह के संघर्ष की कहानी है ... न ट्रेनर कोई अमेरिकी था, बेचारा भेवड़ा था, और संघर्ष करने वाला भी बिल्कुल आम गांव वाला लेकिन बस कुछ कर गुज़रने की तमन्ना थी और उसी के बलबूते वह अपनी मंज़िल तक पहुंच गया...


मोटापे से ध्यान आया कि आज के दौर में  अधिकतर बच्चों और युवाओं का खानपान बहुत ही बेकार है ... पहले तो ये लोग बेकार का जंक एवं फास्ट फूड खा लेते हैं, फिर विटामिन की गोलियों में पोषण तलाशते फिरते हैं...मुझे तो कईं बार लगता है कि आज कर आशीष देते समय एक जुमला यह भी जोड़ देना चाहिए...ईश्वर, गॉड, अल्ला, जीसस, वाहेगुरू तुम्हें अच्छा पौष्टिक खाना नसीब दे।

हर तरफ़ पैसे की बरबादी है फिर भी पौष्टिक कहीं नहीं है बाज़ारू खाने में ...हो भी नहीं सकती .. और एक ध्यान आ रहा था मुझे कि अब वे दिन लद रहे हैं और लद भी जायेंगे कि महिलायें ही खाना-वाना करेंगी...आज के दौर की सब से बड़ी मांग है कि हर लड़के को भी खाना बनाना आना चाहिए..कम से कम अपना पेट तो भर सके यार कोई बंदा......बाज़ार में बाज़ारवाद है, न ही कभी पोष्टिकता मिलेगी और न ही कभी मिली थी...

बहुत से युवकों से मिलता हूं जिन की नई नई नौकरियां लगी हैं...खाने की बात चलती है तो बताते हैं कि स्वयं खाना बनाते हैं...अच्छा लगता है .... बैकग्राउंड या अपब्रिंगिंग तो भाई यही बढ़िया हो गई कि बच्चे अपने लिए अच्छे खाने का जुगाड़ कर लेते हैं अपने आप ....और यह इन के चेहरों की चमक से पता भी चल जाता है ...

कहां से कहां निकल गया मैं भी ... चलिए, वापिस लौट आते हैं ....उस में क्या है!

आज ही टाइम्स ऑफ इंडिया पेपर से पता चला कि हैवेल के इस विज्ञापन की वजह से बड़ा हल्ला हो गया था....मैंने तो अभी यू-ट्यूब पर इसे पहली बार देखा ... No comments on this, आप जो भी समझना चाहें समझ लीजिए... लेकिन उस एड को यहां लगा जरूर रहा हूं..



कुछ तस्वीरें और भी दिखीं आज पेपर में जिन्हें शेयर करना चाह रहा हूं...
बस इंतज़ार करिए थोड़ा, यहां भी यह सब हो ही जायेगा...वैसे आज यहां बैंक रात तक खुले रहेंगे ...कर दो जो भी जमा करना है....
इसे डिटॉक्स होते देख ईर्ष्या हुई...हम भी सास-बहू के सीरियलों के ज़माने से टीवी केवल से भी कुछ हफ्तों के लिए डि-टॉक्स किया करते थे..
अब क्या और बातें करें...उठता हूं, तैयार होऊं काम धंधे के लिए ... रात में सत्संग में बैठे थे..मेरे आगे जो भक्त थे, उन के हाथ में एक कापी थी...भजन और प्रवचन लिखे थे उस में ...उन्होंने मुझे दिखाई...मुझे देख कर बहुत अच्छा लगा...सत्संग के प्रति इतना समर्पण देख कर मन गदगद हो गया..बता रहे थे कि हम तो पढ़े-लिखे नहीं हैं, मैंने कहा कि आपने तो इतना बढ़िया सुलेख लिखा हुआ है ...हंसने लगे, कहने लगे ...आप महान हैं...लेकिन मैं उन की महानता से बहुत प्रेरित हुआ..एक अच्छे शिष्य की तरह से सत्संग में बैठना और फिर ग्रहण की हुई चीज़ों को लिखना ...इन की भावना को नमन....ईश्वर मुझे भी ऐसी सद्बुद्धि दे...मैं तो पता नहीं कितनी बार घड़ी को ही ताकता रहता हूं ...सत्संग में ज़्यादा मन टिकता नहीं......लेिकन फिर भी जाते हैं, पता नहीं कब असर हो जाए । आमीन!!


अब आते हैं चुप रहने की ज़रूरत पर ....मुझे शायद इस की बहुत ज़रूरत है ...कुछ दिन पहले पेपर के ग्रैफिटी कॉलम में यह देखा तो लगा कि जैसे मेरे लिए ही कोई कह रहा हो ...मुझे इच्छा है कि इस का पोस्टर बना लूं, वरना प्रिंट-ऑउट अपने कमरे में टांग लूं....a useful reminder to stay cool! 

पिछले दिनों गोवा में घूमते हुए पता चला कि रोहित शैट्टी अपनी फिल्मों की शूटिंग गोवा में ही करता है ...तुरंत इस गीत की तरफ ध्यान चला गया...यह भी तो गोवा में ही शूट किया गया होगा...बेहतरीन मैसेज ...बेहतरीन प्रेरणा... अपना हर पल ऐसे जियो जैसे कि आखिरी हो ... I love this song!