Wednesday, June 10, 2009

दांतों में ठंडा लगने से कहीं आप भी परेशान तो नहीं ?

दांतों में ठंडा पानी आदि लगने से परेशान जब कोई मरीज़ किसी क्वालीफाईड डैंटिस्ट के पास जाता है तो उसे प्रश्नों की बौछार के लिये तैयार रहना चाहिये। और आप के मुंह के अंदर झांकने से पहले ही ये प्रश्न ताबड़तोड़ उछाल दिये जाते हैं ....
क्या यह ठंडा लगने की शिकायत सभी दांतों में है ?
अगर सभी दांतों में तकलीफ़ नहीं है तो फिर मुंह की किस तरफ़ दर्द है, दर्द ऊपर वाले जबाड़े में होता है या नीचे वाले जबाड़े में ?
ऊपर या नीचे वाले जबाड़े में जब दांतों में ठंडा लगता है तो क्या सभी दांतों में लगता है या केवल एक या दो दांतों में ?
अब प्रश्नों का दूसरा दौर शुरू होता है ---
जब ठंडा पानी मुंह में लिया जाता है तो यह दर्द कितने समय तक रहता है ? क्या पानी पी लेने के बाद भी यह होता रहता है ? इस दर्द की अवधि सैकेंडों में है या मिनटों में ?

ये जो मैंने प्रश्न लिखे हैं ये हमें लगभग हर उस मरीज़ से पूछने होते हैं जो इस ठंडे-गर्म की शिकायत से परेशान होता है। अब आप समझ सकते हैं कि इस परेशानी के लिये बस यूं ही किसी भी दवाई वाली पेस्ट को लगा कर दबाने की कोशिश क्यों निर्रथक साबित होती है। जब कारण का पता ही नहीं, डायग्नोसिस हुआ ही नहीं तो फिर ये दवाई वाली पेस्टें क्या कर लेंगी ?

और जो प्रश्नों की लिस्ट आप ऊपर देख रहे हैं ---इन में एक एक प्रश्न का बहुत महत्व है। एक अच्छा डैंटिस्ट चाहे कितना भी व्यस्त क्यों न हो किसी भी दांतों पर ठंडा लगने से परेशान मरीज़ से ये प्रश्न तो पूछता ही है। हर प्रश्न का उत्तर विभिन्न दांतों की बीमारियों की तरफ़ इशारा करती है। बिना किसी डायग्नोसिस के बस यूं ही महंगी महंगी पेस्टें या मंजन लगाते रहना बिल्कुल उसी प्रकार है जिस तरह कई दिनों से बेहद पेट दर्द से परेशान कोई बंदा केवल दर्द-निवारक टीकिया ले लेकर अपना काम चलाता रहे। इस लिये डैंटिस्ट के पास जाकर ही कारण का पता लग सकता है।

और एक शिकायत मरीज़ बहुत करते हैं कि दांतों में गैप आ गया है, अभी मैं थोड़ा थका हुआ हूं ---आज दोपहर सोने का समय नहीं मिला ---इसलिये इस गैप के बारे में कल अच्छे से लिखूंगा।

तंबाकू चूसना --- पार्टी स्टाईल !!

हम लोग किसी भी क्षेत्र में काम कर रहे हों, शायद ही अपने उस्ताद को कभी भूल पाते हैं। मुझे भी अकसर अपने ओरल-सर्जरी के प्रोफैसर डा कपिला जी की याद अकसर आती है। ये हम लोगों को अकसर कहा करते थे कि मरीज़ की बात ध्यान से सुना करो, वह तुम्हें स्वयं ही अपनी बीमारी का डायग्नोसिस बतला रहा है। In his words – “ Listen to the patient carefully, he is giving you the diagnosis !”. अब यह अपने आप में आत्म-अविलोकन करने वाली बात है कि यह काम हम लोग कितनी हद तक उस भावना से कर पाते हैं।

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कल भी मेरे पास यह मरीज़ आया जिस के मुंह के अदंर दांतों की तस्वीर आप यहां देख रहे हैं। यह मेरे पास ऊपर आगे के एक दांत की जड़ निकलवाने आये थे जो कि दांत की सड़न की वजह से टूट चुका था। जब मैं इन के मुंह में इंजैक्शन लगा रहा था तो मुझे लगा कि ऊपर वाले होंठ का अंदरूनी हिस्सा ( oral mucosa) थोड़ा खुरदुरा सा है।

मेरा ध्यान इंजैक्शन देने में पूरी तरह लगा हुआ था इसलिये मैंने इस खुरदरेपन तरफ़ कुछ खास ध्यान देना शायद इसलिये उचित नहीं समझा कि मुझे लगा कि ये Fordyce spots हैं और दूसरा मेरा ध्यान उस खुरदरेपन की तरफ़ उस समय था भी नहीं ---सोच रहा था कि इसे बाद में देखूंगा। ( बाद में किसी दिन इन स्पाट्स के बारे में चर्चा करेंगे )---- लेकिन इस समय केवल यही बता रहा हूं कि ये फारडाइस-स्पाट्स पसीने पैदा करने वाले ग्लैंड्स ( sebaceous glands) होते हैं जो कि सामान्यतः तो हमारी चमड़ी पर ही होते हैं लेकिन कईं बार ये मुंह के अंदर ( oral mucosa), पुरूषों के ग्लैंस-पीनस( glans penis) को कवर कर रही चमड़ी के अंदरूनी भाग ( mucous membrane आदि में भी होते हैं ---- ये बिल्कुल छोटे छोटे दाने से होते हैं और अकसर मरीज़ इन के बारे में चिंतित से हो जाते हैं जब कि चिंता करने वाली कोई बात ही नहीं होती।

हां, तो मैं अपने मरीज़ की बात कर रहा था --- मैंने मरीज़ का दांत निकलवाने से पहले ऐसे ही पूछ लिया कि यह ऊपर खरदुरा सा आप को कभी लगा नहीं ? ----तब उस ने बताया कि यह तो तंबाकू की वजह से है।
कहने लगा कि पिछले पांच साल से तंबाकू-चूने की आदत लग गई है। और मैं ऊपर वाले होंठ के अंदर की तरफ़ भी अकसर तंबाकू दबा कर रखता हूं। मुझे तुरंत सारी बात समझ में आ गई।


दरअसल शायद यह पहला केस मेरी नज़र में आया था जो कि तंबाकू-चूने का मिश्रण ऊपर वाले होंठ के अंदर दबा कर रखता था ( अकसर कभी कहीं पर कोई भद्रपुरूष इस तरह के कैंसर के मिश्रण को गाल के अंदर ऊपर वाली दाढ़ों के साथ लगती जगह पर तो रखते नज़र आ ही जाते हैं ) ...... मुझे बहुत हैरानगी हो रही थी ----उस ने आगे बताना शुरू रखा कि कईं बार उसे ऊपर वाले होंठ के अंदर ही इस तंबाकू ( कैंसर-मिश्रण !!!! ---- Cancer mixture !! --- Cancer cocktail !!!) को रखना पड़ता है क्योंकि जब मैं किसी पार्टी वगैरह में गया होता हूं तो बार बार थूकने के झंझट से निजात मिल जाती है। वह यह भी कह रहा था कि वैसे तो वह नीचे के होंठों के अंदरूनी हिस्से का ही इस काम के लिये इस्तेमाल करता है और इस की वजह से उस नीचे वाले दांतों के बाहर की जगह की क्या हालत हो चुकी है वह आप इस तस्वीर में देख सकते हैं। DSC03179

मैं एक दो मिनट उस की बातें सुनीं-----उस का टूटा दांत निकालने के बाद फिर उस की क्लास ली कि यह सब क्या है और भविष्य में यह किस तरह कैंसर में तबदील हो सकता है। वह मेरी बातें बहुत ध्यान से सुन रहा था और उस ने कल ही से तंबाकू को मुंह में दबाने से तौबा कर ली ।

उस के जाने के बाद मैं यही सोच रहा था कि मरीज़ की बात ध्यान से सुनने की आदत आज एक बार फिर काम आ गई ---वरना आज एक महत्वपूर्ण डायग्नोसिस मिस हो जाता और वह बंदा अपनी आदत को बिना परवाह के जारी रखता जो कि उसे मुंह के कैंसर की तरफ़ धकेल सकती थी।