Wednesday, February 24, 2016

भेड़-चाल तो हमारी USP है ही ..

भेड़चाल तो है ही देश में...कल रवीश कुमार भीड़ जुटने की साईंस समझाना चाह रहे थे..जिस तरह से इन जाट दंगों के दौरान भीड़ का पागलपन सामने आया, देख कर १९८४ के दिनों की याद ताज़ा हो आई...

लोग टूट जाते हैं इक घर बसाने में..
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में..

अब तक हिंदी फिल्मों ने अच्छी तरह से समझा दिया है कि ये सब राजनीति से प्रेरित होता है..लेिकन फिर भी भारत जैसे प्रजातंत्र में इस तरह से कुछ लोग मिल कर कुछ भी उपद्रव कर दें, सोच कर ही अजीब लगता है!

तिनका तिनका कर के लोग आज के दौर में कुछ काम धंधा सेट करने का जुगाड़ कर पाते हैं लेिकन इस तरह से क्या पता कब बेकाबू भीड़ सब कुछ मिट्टी में मिला जाए...



हिंदी फिल्मों से कुछ याद आ गया...कल रात सोने से ठीक पहले यह वाट्सएप मैसेज आया...इस विषय पर बहुत अरसे से मैं भी अपने मन की बात रखना चाह रहा था ...आज सुबह उठते ही उसी मैसेज का ध्यान आ गया...

 मैं इस मैसेज से पूरी तरह सहमत हूं...कुछ बदलाव के साथ। सब से पहले तो मुझे यही ध्यान आया कि फिल्म पी के की रिलीज़ से पहले मैंने आमिर खान को एक ख़त लिखा था...यह ख़त आप यहां पढ़ सकते हैं... आमिर खान के नाम एक ख़त...इसे मैंने उसके बंबई के पते पर भी भेजा था।

यह जो वाट्सएप मैसेज आप देख रहे हैं ...इस में थोड़ी कमी है... ठीक है विज्ञापन में इसी तरह से ही बड़े बड़े स्टार पान मसाले गुटखे का गुणगान करते दिखते हैं...लेकिन जो हालत असल में पानमसाला गुटखा खाने वालों की यहां इस तस्वीर के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया है , यह बहुत कम है।

गुटखा-पान मसाला खाने वालों के मुंह के अंदर की मेरे पास सैंकड़ों तस्वीरें हैं ...जिन्हें अकसर मैं इस ब्लॉग पर और अपने इंगलिश ब्लॉग पर शेयर कर चुका हूं...और जिन्हें दिखा दिखा कर मैं मरीज़ों को इन व्यसनों से दूर रहने के लिए शायद कभी कभी प्रेरित करने के लिए सफल भी हो जाता हूं...मेरा अनुभव है कि लोग अकसर तब मान लेते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है ...मुझे सब से बुरा तब लगता है जब कोई मुंह के कैंसर का मरीज़ या ओरल-सब-म्यूकसफाईब्रोसिस का मरीज़ (जो अपने मुंह में कोर भी नहीं डाल सकता)...कहता है कि पंद्रह दिन से इन चीज़ों की छुआ तक नहीं...

बात मेरी समझ में यह नहीं आती कि ये जो टॉप के फिल्मी सितारे हैं इन्हें क्या कमी है कि ये पान मसाले या गुटखे जैसी शरीर तबाह करने वाली चीज़ें खाने के लिए उकसाने लग जाते हैं... जिस जिस स्टार को भी मैं इस तरह की चीज़ें बेचता देखता हूं ..मैं उस की फिल्में ही देखना बंद कर देता हूं...

स्टार लोगों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है..चाहें तो बैठ कर खाएं..फिर इन की भूख शांत क्यों नहीं होती?... मुझे भी नहीं पता...इन की fan following बहुत ज़्यादा रहती है, ऐसे में इन कंपनियों को पता है कि आज का युवा किस तरह से इन का दीवाना है...और मैं बहुत बार लगता है कि शायद ही इन में कोई ऐसा स्टार हो जिस ने कभी इस तरह के सेहत खराब करने वाली चीज़ें खाई-चबाई या मुंह के अंदर दबाई हों....कम से कम इन के चेहरों से तो ऐसा ही लगता है ....शायद इन के चेहरे भी झूठ बोलते हों...और यह भी पता नहीं आज से बीस बरस बाद जैसे आज माधुरी दीक्षित कहती है कि मैंने तो कभी मैगी खाई ही नहीं...ये सितारे भी कह दें कि हम ने तो पान मसाला कभी चखा तक नहीं.



आज कल अन्नू कपूर भी ऐसे एक विज्ञापन में दिखने लगा है कोई पान मसाले आदि के ...पहले तो कुछ ज्ञान बांटता है ...फिर उस पान-मसाले की तारीफ़ होती है ...बहुत बुरा लगता है ..पता नहीं मुझे यह क्यों पच नहीं रहा कि अन्नू कपूर जैसा बंदा भी यह काम कर सकता है...बिल्कुल विक्की डोनर फिल्म के डाक्टर वाली हरकतें ...वही बात है ...कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी!!....शायद!

जो भी हो, मुझे अधिकतर तकलीफ़ बड़े बड़े स्टारों के इस तरह के विज्ञापनों से है...ये लोग वैसे भी रईस लोगों की ब्याह शादियों में नाच-गा कर करोड़ों कमा लेते हैं....ऐसे में पान मसाले गुटखे जैसी चीज़ों को क्यों प्रमोट कर रहे हैं...छोटे मोटे कलाकार घुटने पर दर्द के लिए तेल बेचने वाले, सिर दर्द की टीकिया वाले विज्ञापन करते हैं, कोई आपत्ति नहीं हो सकती, क्या करें, जीवन यापन के लिए कुछ तो करना ही है, बाकी कुछ तो दर्शक के विवेक पर भी तो छोड़ना होगा!

मैंने ज़िंदगी से जो समझा उसे इस अंदाज़ में साझा करने का एक प्रयास शुरू किया है ...