Wednesday, September 9, 2009

तीस तरह के स्वाईन-फ्लू के वैक्सीन

चीन में सब से पहले स्वाईन-फ्लू का वैक्सीन तैयार हो चुका है और इसी हफ्ते से वहां पर लोगों को यह लगाना शूरू कर दिया जायेगा। वहां पर स्वाईन-फ्लू की स्थिति काफ़ी चिंताजनक है।
चीन में 1 अक्टूबर को उन का नैशनल डे ( National Day) है जिस में लाखों लोग शिरकत करते हैं और उस समारोह में बड़ी बड़ी हस्तियां भी मौजूद रहेंगी –इसलिये किसी तरह का रिस्क नहीं लिया जा सकता।
कल हम लोग वैक्सीन के इस्तेमाल के लिये विभिन्न देशों की अपनी अपनी प्राथमिकताओं की बात कर रहे थे --- चीन ने भी यह निर्णय़ लिया है कि इसी हफ्ते से उन दो लाख के करीब लोगों की वैक्सीन लगा दिया जाये जिन्हें चीनी नेशनल डे समारोह के कार्यक्रम में भाग लेना है।
ये वैक्सीन बनते कैसे हैं ?
मुख्यतः इस तरह का वैक्सीन तैयार करने के लिये वायरस को मुर्गी के अंडे में डाला जाता है और कुछ दिनों पश्चात उस के अंदर से तरल पदार्थ निकाल कर उसे शूद्ध कर लिया जाता है।
The main method is by injecting seed virus into embryonic chicken eggs and harvesting the fluid after several days and purifying it.
वैसे तो वैक्सीन बनाने की दो विधियां हैं--- 90प्रतिशत से भी ज़्यादा इंफ्लूऐंजा वैक्सीन इनऐक्टिवेटिड वैक्सीन ( “inactivated vaccines”) होते हैं –इस का मतलब यह है कि इस तरह का वैक्सीन मृत वायरस से तैयार होता है।
दूसरे तरह के वैक्सीन होते हैं लाइव-एटैनूएटेड ( “live attenuated vaccines) जिन्हें ऐसी एनफ्लुएंजा वॉयरस से बनाया जाता है जो कमज़ोर पड़ी होती है लेकिन मृत नहीं होती।
स्वाईन-फ्लू के तीस तरह के वैक्सीन
लगभग तीस तरह के वैक्सीन तैयार हो रहे हैं। जैसा कि पहले ही कहा गया है कि अधिकतर तो इनऐक्टिवेटिड वैक्सीन ही होंगे। यह जो तरह तरह के वैक्सीन तैयार हो रहे हैं इन को शुद्ध करने की प्रक्रिया अलग अलग है और कुछ में एक एडिटिव ( जिसे एडजुवेंट भी कहा जाता है) भी डाला जाता है ।
इस एडजुवेंट के रहने से वैक्सीन के द्वारा शरीर में ऐंटीबाडीज़ तैयार करने की शक्ति बढ़ जाती है और इसे किल्ड-वैक्सीन ( killed vaccines) में डाला जाता है।
वैक्सीन का दाम
इस वैक्सीन को बनाने वाली कंपनियां विभिन्न देशों के लिये अलग अलग दाम तय करेंगी। अमीर मुल्कों को इस की एक खुराक के लिये 10 से 20 यूएस डालर खर्च करने होंगे जब कि मध्यम वर्गीय देशों को इस का आधा दाम ही भरना होगा। और गरीब मुल्कों को तो उस से भी आधी कीमत में ये वैक्सीन उपलब्ध हो जायेंगे।

इस में तो कोई शक ही नहीं कि किसी देश के भी सभी लोगों को यह वैक्सीन लग नहीं पायेगा। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जनता इस वैक्सीन से हिप्नोटाईज़ ही हो जाये।
वैक्सीन के अलावा भी बहुत सी ऐसी सावधानियां भी तो हैं जिन के द्वारा इस बीमारी से बचा जा सकता है ---जैसे कि लोगों द्वारा आपस में मिलते समय उपर्युक्त दूरी बनाये ( किस को मिस करने का मशवरा !) रखना, किसी एरिया में जब यह ज़्यादा फैल रहा हो तो वहां के स्कूल बंद कर देना, ज़्यादा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से गुरेज करना, ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां और अपनी साफ़-सफ़ाई का पूरा पूरा ध्यान रखना।
किसी भी देश की सारी जनता को यह वैक्सीन दो बार लगाया जा सके, यह अभी तो बिल्कुल असंभव सी बात है।
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