Sunday, May 4, 2014

स्वपनदोष का उपचार?

स्वपनदोष एवं वीर्य पतन से संबंधित पिछली पोस्ट से आगे पढ़िए....

क्या स्वपनदोष के लिए किसी उपचार की आवश्यकता होती है ?
स्वपनदोष पूर्णरूप से नैसर्गिक है। इसके लिए किसी भी उपचार या दवाईयों की जरूरत नहीं है। वयस्क अवस्था में स्वपनदोष बार-बार हो सकता है, क्योंकि इस आयु में शरीर में विभिन्न शारीरिक व मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होते हैं। कभी-कभी उत्तेजित करने वाले स्वपनों के दौरान किसी से लैंगिक संबंध रखने की कल्पना पुरूषों में आती है, जिसके परिणामस्वरूप स्वपनदोष होता है। स्वपनदोष से मन में अपराधभाव निर्मित होता है। यदि यह बार-बार हुआ तो अपराधभावना बढ़ती जाती है और मानसिक दुर्बलता की अवस्था आ जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए योग्य मार्गदर्शन लेना आवश्यक होता है। किसी भी दवाई या इलाज की आवश्यकता नहीं होती है और ऐसी कोई दवा उपलब्ध भी नहीं है। 

स्वपनदोष को रोकने के लिए क्या कोई दवाईयां हैं ?
स्वपनदोष, कामभावना पूर्ण करने की एक नैसर्गिक क्रिया है। स्वपनदोष रोकने के लिए किसी भी तरह के इलाज या दवा की आवश्यकता नहीं है, और ये उपलब्ध भी नहीं हैं। 

क्या नियमित व्यायाम का स्वपनदोष पर कुछ प्रभाव पड़ता है ?
व्यायाम का स्वपनदोष से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये दोनों भिन्न क्रियाएं हैं। व्यायाम के कारण स्वपनदोष अधिक होता है या कम होता है, ये सब गलतफहमी फैलाने वाली धारणाएं हैं। इस के विपरीत नियमित व्यायाम करने से युवकों में स्वपनदोष से ध्यान हटाने में मदद ही मिलती है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही मानसिक तनाव भी कम होता है। अतः कभी-कभी, इन दो क्रियाओं के मध्य परस्पर सम्बंध प्रतीत होता है।

क्या स्वपनदोष का बौद्धिक क्षमता पर कोई असर होता है ?
स्वपनदोष एक नैसर्गिक क्रिया है। स्वपनदोष का बौद्धिक क्षमता पर कोई असर नहीं होता है। यद्यपि अपराध भाव के कारण, मानसिक एकाग्रता कम हो जाती है। बुद्धि कम हो गई है, ऐसा लगता है। यह मानसिक दुर्बलता भी योग्य मार्गदर्शन से ठीक की जा सकती है।

बार-बार स्वपनदोष होने से गुप्तरोग या एड्स हो सकता है क्या ?
नहीं। गुप्तरोग और एड्स, संभोग के द्वारा, एक ग्रसित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति मैं फैलने वाले रोग हैं, इनका स्वपनदोष से कोई संबंध नहीं है। बार-बार स्वपनदोष होने से, गुप्तरोग या एड्स जैसा कोई रोग नहीं होता है।

क्या बार-बार स्वपनदोष होने का प्रजनन क्षमता पर या नवजात शिशु पर कुछ बुरा असर पड़ता है?
नहीं। बार-बार स्वपनदोष होने से भविष्य में संतान पर या संतान उत्पन्न करने की क्षमता पर, किसी भी प्रकार का विपरीत परिणाम नहीं होता है। जहां तक शरीर से वीर्य के निकलने का प्रश्न है, बार-बार स्वपनदोष और बार-बार संभोग, इन दोनों ही क्रियाओं में वीर्यपतन होता है। अतः इस भ्रम के पीछे कोई तथ्य नहीं है।

स्वपनदोष होना अच्छा है या बुरा ?  
स्वपनदोष पूर्णतया एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। मन में उठने वाली लैंगिक भावनाओं को तृप्त करके मानसिक शान्ति देने का यह एक प्राकृतिक तरीका है। इसका शरीर पर कोई बुरा परिणाम नहीं होता है। स्वपनदोष होने पर किसी को अपराध भाव होने का कोई कारण नहीं है। स्वपनदोष अच्छा है या बुरा, यह नहीं सोचना चाहिए।

Source: पुस्तक "यौवन की दहलीज पर" .. unicef publication ...लेखक डा प्रकाश भातलवंडे डा रमण गंगाखेडकर 

स्वपनदोष एवं वीर्यपतन (Nightfall)....कुछ भ्रांतियां

लगभग छः वर्ष पहले एक लेख लिखा था.....जब स्वपनदोष कोई दोष ही नहीं  है तो ....

इस लेख को पढ़ने के बाद जब कोई परेशान युवक मुझे धन्यवाद के दो शब्द भेजता है तो अच्छा लगता है कि चलो, अपना लिखा किसी के काम तो आया, किसी की परेशानी तो कम हुई।

कुछ दिन पहले एक बुक प्रदर्शनी में मैंने एक किताब खरीदी .....यौवन की दहलीज़ पर....... इसे क्वालीफाईड डाक्टरों द्वारा लिखा गया है और यूनिसेफ (Unicef) द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस किताब के शीर्षक के साथ यह भी लिखा गया है.. मनुष्य के सेक्स जीवन, सेक्स के माध्यम से फैलने वाले गुप्तरोगों (एस.टी.डी) और एड्स के बारे में जो आप हमेशा से जानना चाहते थे, लेकिन यह नहीं जानते थे कि किससे पूछें...

उस किताब में एक भाग स्वपनदोष और वीर्यपतन विषय से संबंधित है......उस के कुछ अंश यहां लिख रहा हूं......

स्वपनदोष का अर्थ क्या है?
कुछ लोगों में नींद के समय वीर्यपतन हो जाता है, इसे स्वपनदोष कहते हैं। नींद में वासना संबंधी स्वपन आने से मस्तिष्क में कामेंन्द्रियां उत्तेजित होकर कालचक्र पूरा कर लेती हैं, इसी वजह से वीर्यपतन होता है। इस प्रक्रिया को स्वपनदोष कहते हैं। 

स्वपनदोष, आयु के कौन से वर्ष से शुरू होकर कब तक हो सकता है?
यह क्रिया युवावस्था में शुरू होती है और आमतौर पर शादी होने पर बंद हो जाती है। शादी के बाद मनुष्य की शारीरिक जरूरतों की पूर्ति संभोग से हो जाती है , इसलिए सामान्यतया स्वपनदोष नहीं होता है। स्वपनदोष वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है, विशेषतौर पर जब जीवनसाथी दूर गया हो और बहुत दिनों से संभोग सुख नहीं मिला हो। स्वपनदोष से किसी प्रकार का कोई शारीरिक नुकसान नहीं होता है। 

बार-बार वीर्यपतन हो जाने से क्या वीर्य खत्म हो जाता है ?
नहीं, यह सिर्फ एक भ्रांति है। वयस्क होने के उपरान्त वीर्य तैयार होने की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहती है। वीर्यपतन में, वीर्यकोष में एकत्रित वीर्य शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन बार-बार वीर्यपतन होने से वीर्य खत्म नहीं होता है। वीर्यपतन, संभोग से, हस्तमैथुन से या फिर स्वपनदोष से हो सकता है। थोड़े समय अन्तराल में वीर्यपतन से यदि बार बार हुआ, तो वीर्य की घनता कम होकर, वह पतला हो जाता है। इसका कारण सिर्फ इतना है कि वीर्यपतन की शुरूआत के समय कभी-कभी वीर्यकोष से पहले से इकट्ठा वीर्य बाहर निकल जाता है और उसके बाद, बार-बार वीर्यपतन के समय, वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या और लसदार पदार्थ की मात्रा कम हो जाती है, जिससे वह पतला दिखता है। वीर्य पतला दिखने के कारण, लोगों को वीर्य समाप्त होने का डर लगता है, लेकिन यह सिर्फ गलतफहमी है। यदि दो वीर्यपतन के बीच अंतर ज्यादा होता है, तब ऐसी स्थिति में बाहर निकलने वाले वीर्य की घनता अधिक होती है। 
इस किताब में स्वपनदोष से संबंधित कुछ ज़रूरी जानकारी और भी हैं, बाद में लिखता हूं। 

इस तरह की जानकारी मुझे तब मिली थी किसी किताब से जब मैं २० वर्ष का था और मैं जानता हूं उस किताब को पढ़ कर मुझे कितना सुकून मिला था। मुझे नहीं पता कि आप उम्र की किस अवस्था में इस लेख को पढ़ रहे हैं, लेकिन अच्छा यही होगा कि इस लेख में लिखी जानकारी को अपने दोस्तों के साथ शेयर अवश्य करें......अनगिनत भ्रंातियों के चलते कुछ युवा अपने इन बेशकीमती ज़िंदगी के वर्षों में अपनी पढ़ाई आदि की तरफ़ उतना ध्यान नहीं दे पाते....हर समय बस बीमारी की कल्पना करते रहते हैं। उन्हें इस लेख का लिंक भेज कर उन की भी चिंता को दूर करिए। 

२००८ में दिल से लिखा वह लेख......... जब स्वपनदोष कोई दोष है ही नहीं तो..
  इस के उपचार के बारे में कुछ जानने के लिए इस पोस्ट पर क्लिक करिए।