Monday, July 18, 2011

ड्रग्स खिलाने-पिलाने-सुंघाने के बाद होने वाले बलात्कार

अकसर हम लोग इलैक्ट्रोनिक मीडिया में देखते ही रहते हैं कि विभिन्न शहरों में सारी सारी रात चलने वाली रेव-पार्टीयों के दौरान पुलिस ने छापा मारा और वहां से ड्रग्स भी मिले। और अकसर ऐसा होता है कि जब ड्रग्स की बात चलती है तो हम यही सोच लेते हैं कि होंगी ये वही ड्रग्स जो इंजैक्शन की मदद से नशा करने वाले लेते हैं ...हम ऐसा सोचते हैं कि नहीं?

एक दिन खबर दिखती है ...और फिर हमेशा के लिये गायब....कारण बताने की क्या ज़रूरत है, सब जानते ही हैं।
लगभग दस दिन पहले मैं मैडलाइऩ-प्लस पर मैडीकल समाचार देख रहा था ... वहां पर एक खबर दिखी की कैटामीन ड्रग के इस्तेमाल से इस का नशा करने वाले लोगों में पेशाब से संबंधित कईं पेचीदगीयां हो जाती हैं... यहां तक की urinary incontinence अर्थात् पेशाब अपने आप निकलने जैसे नौबत भी आ जाती है...पेशाब रोक पाने के ऊपर कंट्रोल सा खत्म हो जाता है।

हां तो मैंने इस खबर को इतना तूल दिया नहीं ...कारण यही कि मुझे यह लगा कि यह तो अमीर देशों के बड़े लोगों की बड़ी बातें हैं, इस का भारत जैसे देश से कोई इतना लेना देना नहीं ....और मैं आगे कुछ और पढ़ने में व्यस्त हो गया। यहां यह बताना ठीक होगा कि कैटामीन नामक दवाई है जो आप्रेशन के पहले अनसथीसिया (anaesthesia – निश्चेतण) करने के काम आती है। मुझे याद है हम ने भी इस दवाई के प्रभाव में कईं आप्रेशन होते देखे हैं। वही तस्वीर मन में थी कि कौन इस तरह की दवाई (जो कि विशेषज्ञ ही इस्तेमाल करते हैं आप्रेशन के लिये) को दुर्प्रयोग करने का जोखिम लेता होगा।

लेकिन कल ही की बात है कि मैंने जब इन्हीं सब ड्रग्स के नाम टाइम्स ऑफ इंडिया के रविवारीय परिशिष्ट देखते हुये एक आर्टीकल में देखे – A Party Evil तो मुझे बेहद हैरानगी हुई कि अपने देश में भी ये सब दवाईयां कुछ नाइट-क्लबों, पबों आदि में किस बिंदास अंदाज़ में इस्तेमाल की जा रही हैं।

चलिये, इन दवाईयों के नामों के चक्कर में क्या पड़ना, बस इतना ही काफ़ी है कि इस तरह की ड्रग्स को डेट-रेप ड्रग्स कहा जाता है। लड़का-लड़की कहीं बाहर घूमने गये ---नाइट-क्लब, डिस्को, पब आदि में या किसी रेव-पार्टी के दौरान किसी तरह से इस तरह की दवाईयां लड़की की ड्रिंक्स (hard drink or soft drink) में मिला दी जाती हैं ....उस ड्रग के प्रभाव से लड़की बिल्कुल बदहवास सी, बेसुध सी, न बेसुध ना होश में वाली स्थिति... बेहाल सी महसूस करने लगती है, यादाश्त कमज़ोर होने लगती है और फिर जब तक उस दवा का असर रहेगा उस के साथ क्या क्या हुआ उसे कुछ भी ध्यान न होगा ....और अगर कुछ पता भी हो तो वह शर्म की वजह से किसी से कुछ कहेगी भी नहीं। और इस दवाई के प्रभाव में लड़कियां अपने आप को इतना कमज़ोर-बेबस सा हो जाती हैं कि वे चाह कर भी किसी तरह का विरोध नहीं कर पातीं--- और बस शैतान का काम आसान!!

युवा पाठकों को इन सब खतरों से सजग करने के लिये टाइम्स ऑफ इंडिया का यह आर्टीकल बिल्कुल ठीक है। लफड़ा इन दवाईयां का सब से बड़ा यह भी है कि न तो इन का कोई रंग होता है, न ही कुछ इन की गंध ही होती है और न ही इन का कोई स्वाद ही होता है, इसीलिये जब कोई शैतान इन को किसी ड्रिंक्स में मिला कर किसी लड़की को पिला देता है तो उसे इस का पता ही नहीं चल पाता।

एक दो बातें उस आर्टीकल में यह भी लिखी हुई थीं कि लड़कियों को चाहिये कि इस तरफ़ ध्यान दें कि अपनी ड्रिंक्स को ऐसी जगहों पर अकेले मत छोड़ें और अगर वाश-रूम में भी जाएं तो अपनी ड्रिंक को खत्म कर ही लें....और तो और किसे के साथ अपनी ड्रिंक्स शेयर न करें.... और भी एक बात कि अगर ऐसी जगहों पर कोई ऐसा मित्र साथ हो जो ड्रिंक्स न लेता हो तो ठीक है। बात कुछ जमी नहीं ...मुझे भी ठीक लगी नहीं ... इतना अविश्वास हो अगर किसी के ऊपर लेकिन फिर उस के साथ नाइट-लाइफ का अनुभव लेना है तो फिर तो कभी भी कुछ भी हो सकता है क्योंकि शातिर किस्म के लोगों की सोच ऐसे लेख लिखने वालों से फॉस्ट चलती है।

हां, तो कैटामीन से बात शुरू की थी .. अभी हाल ही में मुंबई से साढ़े तीन करोड़ की यह दवाई पकड़ी गई है ... आप्रेशन करने से पहले तो इस का टीका लगाने की एक विशेष विधि/मॉनीटरिंग होती है .. लेकिन इस का खुराफाती इस्तेमाल करने के लिये कैसे भी इस को इंजैक्ट कर दिया जाता है ...यहां तक कि इसे snort –सुंघवा दिया जाता है और असर होने लगता है।

यह लेख लिखते समय यही ध्यान आ रहा है कि हम लोग जा कहां रहे हैं......सब कुछ ज़्यादा ही फॉस्ट नहीं हो गया? ...और इसीलिये हादसे ही हादसे दिखते रहते हैं। यह लेख भी देखने योग्य है कि किस तरह से मौज-मस्ती के लिये इस तरह से किया जाने वाला ड्रग्स का दुरूपयोग एड्स जैसे रोगों को भी आमंत्रण दे सकता है।