ब्लॉग लेखक- डा.प्रवीण चोपड़ा.. 2007 से ब्लॉग लेखन एवं प्रशिक्षण में सक्रिय... drparveenchopra@gmail.com
रविवार, 13 जनवरी 2008
हैल्थ-न्यूज़ अपडेट......1.
गुर्दे की बीमारी के बढ़ते केस लेकिन अधिकांश रोगी अनजान –
अमेरिका की नेशनल इंस्टीच्यूट आफ हैल्थ के एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अमेरिका में गुर्दे कीलम्बे समय तक चलने वाली बीमारी (क्रानिक केस) के केस तेज़ी से बढ़ रहे हैं लेकिन इस से ग्रस्त अधिकांश लोगोंको इस का आभास तक नहीं है। यही वजह है कि गुर्दे को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होने अथवा गुर्दा फेल होने कीरोकथाम के उपाय समय रहते ठीक से नहीं हो पाते जिस से मरीज़ों को डायलासिस या गुर्दे के प्रत्यारोपण (किडनीट्रांस्प्लांट) करवाने को विवश होना पड़ता है।
इस अध्ययन के अनुसार अमेरिका में 260लाख लोग (अमेरिका की जनसंख्या का 13प्रतिशत हिस्सा) गुर्दे कीजटिल बीमारी से ग्रस्त हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप , मोटापा इत्यादि इस के लिए ज़िम्मेदार हैं। गुर्दे की बीमारी कीमुख्य त्रासदी ही यही है कि यह बहुत उग्र रूप धारण करने तक भी शांत ही रहती है। लेकिन अगर हमें इस कासमय रहते पता चल जाए तो गुर्दे को फेल होने से बचाने के लिए काफी कुछ किया जा सकता है। इसलिए जिसे भीशुगर रोग (डायबिटिज़), उच्च रक्तचाप या परिवार में गुर्दे की बीमारी की हिस्ट्री है तो उसे नियमित रूप से गुर्दे कीकार्यप्रणाली को चैक करने हेतु रक्त की जांच (ब्लड यूरिया, क्रियट्नीन आदि) एवं मूत्र परीक्षण नियमित तौर परकरवाते रहना चाहिए।
बहुत से टी.बी रोगी एच.आई.व्ही से भी ग्रस्त---- एक रिपोर्ट
अमेरिका के लगभग एक तिहाई टीबी के मरीज यह नहीं जानते कि क्या वे एचआईव्ही संक्रमण से भी ग्रस्त हैं किनहीं ??- यह तथ्य इस बात को ही रेखांकित करता है कि इन मरीज़ों का एच.आई.व्ही टैस्ट करवाने हेतु ठोस कदमउठाने की जरूरत है। विश्व भर में एच.आई.व्ही से ग्रस्त रोगियों की मृत्यु का का एक अहम् कारण बेकाबू हुया टीबीरोग ही है।
अमेरिका के सैंटर फार डिसीज़ कंट्रोल के अनुसार 2005 में अमेरिका में सभी सक्रिय टीबी के मरीज़ों में से 9 प्रतिशत को एच.आई.व्ही संक्रमण से भी ग्रस्त पाया गया था। लेकिन 31प्रतिशत टी.बी मरीज़ों में तो इस का पतानहीं चल पाया कि उन्हें एच.आई.व्ही संक्रमण है या नहीं क्योंकि ये लोग वो लोग थे जिन्होंने या तो स्वयं यह टैस्टकरवाने से मना ही कर दिया अथवा इन को टैस्ट करवाने की सलाह ही नहीं दी गई। अब यह सिद्ध हो चुका है किएचआईव्ही संक्रमण टी बी रोग को बढ़ा देता है और टी.बी रोग एचआईव्ही संक्रमण को बेकाबू कर देता है। अमेरिका के सेंटर फार डिसीज़ कंट्रोल ने सभी टीबी मरीज़ों की रूटीन एचआईव्ही टैस्टिंग की सिफारिश की है।
यह पोस्ट लिखते लिखते यही ध्यान आ रहा है कि अगर अमेरिका में यह स्थिति है तो इस देश में क्या हालातहोंगे----हमारी तो भई वही बात लगती है कि जैसै कबूतर अपनी आंखें बंद कर के यही सोच पाल लेता है कि अबबिल्ली का कोई रिस्क नहीं है !!
मोटापा कम करने वाली दवा पर लगा प्रश्न-चिन्ह----
मोटापा कम करने वाली दवाई लेने की तैयारी करने वालों के लिए एक बुरी खबर यह है कि एक ऐसी ही दवाईरिमोनाबेंट को ले रहे रोगियों में डिप्रेशन (अवसाद) एवं अत्यधिक तनावग्रस्त रहने जैसे मानसिक विकार उत्पन्नहोने की आशंका दोगुनी बताई गई है। चिकित्सा वैज्ञानिक वैसे तो पहले से ही इस दवाई को आत्महत्या के विचारपैदा करने के साथ लिंक कर चुके हैं। ब्रिटिश मैडीकल जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार इस दवाई के उपयोग सेमोटापे में कुछ खास कमी आती भी नहीं है और ज्यादातर लोगों का मोटापा बना ही रहता है।
बच्चों में खांसी ?--- जब कुछ भी न करना ही गोल्डन !
दोस्तो, वैसे भी हमारे देश में तो इस शहद को सदियों से ही खांसी की तकलीफ़ को भगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन क्या करें, दोस्तो, हम लोगों की मानसिकता ही कुछ ऐसी बन चुकी है कि जब तक हमारी किसी अच्छी से अच्छी प्रामाणिक एवं सिद्ध बात पर अमेरिकी वैज्ञानिकों की स्टैंप का ठप्पा नहीं लगता , हम कहां मानते हैं.........Generally, it is said that for anything to become popular( even it could be an ancient Indian practice), it has to be routed through America…………….that’s exactly what is happening with our Yoga………यह योग भी हमें तब ही ज्यादा भाया जब इसे अमेरिकी चासनी में घोल कर योगा बना कर हमारे सामने पेश किया गया। ।
मैंने इस चिकित्सा क्षेत्र में इन एंटीबायोटिक दवाईयों का बहुत ज्यादा मिसयूज़ देखा है और वह भी इस सादी खांसी-जुकाम की परेशानी के लिए ही------जिस में अकसर किसी एंटीबायोटिक दवाईयों की जरूरत होती ही नहीं है। बचपन में सुनी एक बात याद आ रही है -------If you take medicines for common cold, it will take seven days to cure it……..if you don’t take any medicines, it will be alright in a week.
So, the weather here is getting colder day by day………..take care……..
Enjoy all those seasonal delicacies that are offered to us during this Lohri festival……………………….HAPPY LOHRI !!
शनिवार, 12 जनवरी 2008
मोशन सिकनैस--- जब मतली कर देती है हालत पतली
दोस्तो, अकसर हम देखते हैं कि बसों, गाड़ियों एवं अन्य वाहनों में यात्रा कर रहे लोगों को अकसर बार-बार मतली होने लगती है और कईँ बार तो यह उल्टियां उन की यात्रा का सारा मज़ा ही किरकिरा कर देती है। दोस्तो, मैं तो स्वयं ही इस का भुक्त-भोगी हूं ---- बस में यात्रा करना मेरे लिए आज भी आफ़त से कम नहीं है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि बस में ही यात्रा के दौरान किसी को यह तकलीफ़ हो, किसी को मोटर-कार में अथवा किसी को गाड़ी में भी यह तकलीफ होना बिलकुल संभव है। तो फिर इस से बचें कैसे.....अथवा एक बार जब ये उल्टियों वगैरह का चक्कर शुरू हो ही जाए तो इस से कैसे निबटा जाए।
तो, दोस्तो, सुनिए इस मोशन सिकनैस से बचने का सब से कारगर तरीका है कि आप बस अथवा गाड़ी (जिस के दौरान भी आप को यह तकलीफ होती है) में चढ़ने से लगभग आधा-या पौन घंटा पहले एक टेबलेट पानी के साथ ले लें.....उस टेबलेट में प्रोमैथाज़ीन नाम की दवा रहती है और यह 25(पच्चीस मिलीग्राम) की टेबलेट आसानी से बाज़ार में मिलती है। इस का एक ब्रांड तो बेहद पापुलर है— लेकिन मैं इस ब्रांड का नाम लिखना यहां ठीक नहीं समझता। दस टेबलेट्स की स्ट्रिप लगभग पच्चीस रूपये की मिलती है। फिर भी आप किसी भी केमिस्ट से जब सफर में उल्टियों आदि से बचाव की टेबलेट मांगेगे तो अधिकतर आप को यही ब्रांड ही मिलेगा। वैसे तो ब्रांड कोई भी हो, लेकिन ध्यान बस यह रहे कि उस में साल्ट प्रोमैथाज़ीन ही हो। अगर आप एक टेबलेट सफ़र शुरू होने से आधा-पौन घंटा पहले पानी से ले लेते हैं तो आप अगले 6-8 घंटे के लिए निश्चिंत हो सकते हैं। दस साल से कम आयु के बच्चों को इस पच्चीस मिलीग्राम की आधी टेबलेट ही काफी है।
कुछ और बातों की तरफ ध्यान दीजिएगा-
- ये दवाई तो तभी प्रभावी है अगर इसे सफर शुरू होने के आधा-पौना घंटे पहले ले लिया जाए।
- जिन लोगों को मोशन-सिकनैस की शिकायत होती हो, वो ये टेबलेट तो ले लें, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि इस को लेने से पहले पेट को परांठों से कहीं ठूंस मत लें। उन्हें तो सफर से पहले अथवा सफर में बिल्कुल हल्के फुल्के पेय-पदार्थ ( नहीं, नहीं, मैं कोल्ड-ड्रिंक्स की बात नहीं कर रहा) जैसे कि पतली लस्सी , नींबू-पानी, शर्बत, फलों का जूस इत्यादि ही लेना चाहिए....कोई एक-आध फल भी ले लें तो ठीक ही है। गलती से भी बच्चों के स्पाईसी स्नैक्स, भुजिया वगैरा न चख लें....हालत पतली से भी पतली हो जाएगी.....उसे क्या कहेंगे, पता नहीं।
- अगर आप ने यह टेबलेट यात्रा शुरू होने के बाद मतली होने पर ली है तो इस का कोई इफैक्ट होता नहीं है।
- वैसे तो दोस्तो इस बात का मोशन-सिकनैस से कोई सीधा संबंध है नहीं, लेकिन शायद मनोवैज्ञानिक रूप में ही सही, कुछ तो जरूर लगता है ......यात्रा से पहले अपना पेट साफ़ होने देना चाहिए।
दोस्तो, परसों शाम को जब मैं भी बस की एक घंटे की यात्रा के दौरान सोनीपत जा रहा था, तो भरी बस में जब मैंने धुएं की छल्ले देखे तो मुझे पता लग गया कि आज मेरी खैर नहीं। कंडैक्टर को कहा कि यार, बंद करवाओ न ये बीड़ी......उस बेचारे ने भी अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए यह कह दिया कि क्या करें, ये नहीं मानते, मैं तो खुद बीड़ी नहीं पीता, लेकिन क्या करें। खैर, अभी यह बात खत्म ही हुई होगी कि मेरा उल्टियों का सिलसिला शुरू हो गया......पर जब मैं दरवाजा खोल कर अपने आप को हल्का करने की कोशिश कर रहा था,तो कंडैक्टर ने एक मिनट के लिए बस रूकवा दी।
और, मैने एक बार फिर से सबक ले लिया है कि वो प्रो-मैथाज़िन की गोलियों की एक स्ट्रिप हमेशा घर में रखनी चाहिएं....क्या पता कब जरूरत पड़ जाए। अगली बार यात्रा के दौरान आप भी ध्यान रखिएगा.....take care, please !!
आप को आखिर कैमिस्ट से बिल मांगते हुए इतनी झिझक क्यों आती है ?
आप भी न्यूज़ मीडिया में अकसर नकली दवाईयों की खेप पकड़ने की खबरें देखते-सुनते रहते हैं न, लेकिन अभी भी आप यही समझते हैं कि ये दवाईयों आप तक तो पहुंच ही नहीं सकतीं। तो, क्या आप नकली-असली में भेद जानने की काबलियत हासिल करना चाहते हैं। अफसोस, दोस्त, मैं आप के जज़बात की कद्र करता हूं लेकिन मुझे दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि आप कितनी भी कोशिशों के बावजूद ऐसा कर नहीं पाएंगे। दोस्तो, हमें चिकित्सा के क्षेत्र में इतने साल हो गए – यह काम अभी तक हम से भी नहीं हो सका !! तो फिर आप यही सोच रहे हैं कि आखिर करें तो करें क्या ---खाते रहे ऐसी वैसी दवाईया ? आखिर क्या करे आम बंदा ?-----दोस्तो, इस विषम समस्या से जूझने का केवल एक ही तरीका जो मैं समझ पाया हूं वह यह है कि आप कैमिस्ट से चाहे दस रूपये की भी दवाई लें,आप उस से बिल मांगने में कभी भी झिझक महसूस न करें, प्लीज़। आप यह समझ कर चलें कि जब आप बिल की मांग करेंगे तो आप को दवाई भी असली ही मिलेगी----नकली दवाई तो मिलने का फिर सवाल ही नहीं उठता,क्योंकि कैमिस्ट को उस बिल में दवाई के बारे में पूरा ब्यौरा देना पड़ता है। अगर हम इतनी सी सावधानी बरत लेंगे तो हमें पास की किसी बस्ती में बनी दवाईयों खरीदने से भी निजात मिल जाएगी।
एक बात और जिस का विशेष ध्यान रखें वह यह है कि बसों वगैरह में जो सेल्स-मैन दर्द-निवारक दवाईयों के पत्ते बेचने आते हैं न, उन से कभी भी ये दवाईयां न खरीदें। चाहे ये सेल्समैन किसी IIM institute से नहीं निकले होते, फिर भी इन बंदों की salesmanship की दाद दिए मैं नहीं रह सकता----ठीक वही बात, दोस्तो, कि वे तो बिना बालों वाले को भी कंघी बेच डालें ! फिर भी मुझे,दोस्तो, ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा कि ये बलाग्स लिखने-पढ़ने वाले उन की बातों में आ सकते हैं। लेकिन फिर भी मैं यह सब लिख रहा हूं ताकि आप के माध्यम से यह जानकारी आम इंसान तक पहुंच सके।
दोस्तो, एक विचार जो मुझे कुछ दिनों से परेशान कर रहा है ,वह यह है कि कहीं आप को मेरी posts पढ़ कर यह तो नहीं लगता न कि ये सब छोटी छोटी बातें जो मैं अकसर उठाता रहता हूं, यह तो सब को पहले ही से पता हैं..........दोस्तो, मेरा तो बस इतना सा तुच्छ प्रयास है कि ठीक है पता हैं तो अब इन को प्रैक्टीकल शेप दीजिए ----और अपने आसपास भी इन छोटी छोटी दिखने वाली बातों के प्रति जनचेतना पैदा करें। बस, दोस्तो मेरे पास यही छोटी छोटी बातें ही हैं-----जिस बंदे ने बस अपनी सारी ज़िंदगी इन छोटी-छोटी बातों के प्रचार-प्रसार के नाम लिख दी है, उस से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ??।
दोस्तो, आप से एक रिक्वेस्ट है कि कृपया मुझे अपनी मेल कर के अथवा अपनी टिप्पणी/ feedback में यह भी लिखें कि इस बलाग के माध्यम से किन मुद्दों को छूया जाए। वैसे तो मैं यह स्पष्ट कर ही दूं कि मैं कोई ऐसा तीसमार खां भी नहीं हूं---बस जो दो बातें पता हैं उन्हें आप सब से शेयर कर के अच्छा लगता है, बस और कुछ नहीं। बाकी सब बातें तो मैंने आप सब से सीखनी हैं..................obviously in this wonderful platform of blogging…..where we understand, share and learn from each other’s wisdom and experience.
आप को आखिर कैमिस्ट से बिल मांगते हुए इतनी झिझक क्यों आती है ?
आप भी न्यूज़ मीडिया में अकसर नकली दवाईयों की खेप पकड़ने की खबरें देखते-सुनते रहते हैं न, लेकिन अभी भी आप यही समझते हैं कि ये दवाईयों आप तक तो पहुंच ही नहीं सकतीं। तो, क्या आप नकली-असली में भेद जानने की काबलियत हासिल करना चाहते हैं। अफसोस, दोस्त, मैं आप के जज़बात की कद्र करता हूं लेकिन मुझे दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि आप कितनी भी कोशिशों के बावजूद ऐसा कर नहीं पाएंगे। दोस्तो, हमें चिकित्सा के क्षेत्र में इतने साल हो गए – यह काम अभी तक हम से भी नहीं हो सका !! तो फिर आप यही सोच रहे हैं कि आखिर करें तो करें क्या ---खाते रहे ऐसी वैसी दवाईया ? आखिर क्या करे आम बंदा ?-----दोस्तो, इस विषम समस्या से जूझने का केवल एक ही तरीका जो मैं समझ पाया हूं वह यह है कि आप कैमिस्ट से चाहे दस रूपये की भी दवाई लें,आप उस से बिल मांगने में कभी भी झिझक महसूस न करें, प्लीज़। आप यह समझ कर चलें कि जब आप बिल की मांग करेंगे तो आप को दवाई भी असली ही मिलेगी----नकली दवाई तो मिलने का फिर सवाल ही नहीं उठता,क्योंकि कैमिस्ट को उस बिल में दवाई के बारे में पूरा ब्यौरा देना पड़ता है। अगर हम इतनी सी सावधानी बरत लेंगे तो हमें पास की किसी बस्ती में बनी दवाईयों खरीदने से भी निजात मिल जाएगी।
एक बात और जिस का विशेष ध्यान रखें वह यह है कि बसों वगैरह में जो सेल्स-मैन दर्द-निवारक दवाईयों के पत्ते बेचने आते हैं न, उन से कभी भी ये दवाईयां न खरीदें। चाहे ये सेल्समैन किसी IIM institute से नहीं निकले होते, फिर भी इन बंदों की salesmanship की दाद दिए मैं नहीं रह सकता----ठीक वही बात, दोस्तो, कि वे तो बिना बालों वाले को भी कंघी बेच डालें ! फिर भी मुझे,दोस्तो, ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा कि ये बलाग्स लिखने-पढ़ने वाले उन की बातों में आ सकते हैं। लेकिन फिर भी मैं यह सब लिख रहा हूं ताकि आप के माध्यम से यह जानकारी आम इंसान तक पहुंच सके।
दोस्तो, एक विचार जो मुझे कुछ दिनों से परेशान कर रहा है ,वह यह है कि कहीं आप को मेरी posts पढ़ कर यह तो नहीं लगता न कि ये सब छोटी छोटी बातें जो मैं अकसर उठाता रहता हूं, यह तो सब को पहले ही से पता हैं..........दोस्तो, मेरा तो बस इतना सा तुच्छ प्रयास है कि ठीक है पता हैं तो अब इन को प्रैक्टीकल शेप दीजिए ----और अपने आसपास भी इन छोटी छोटी दिखने वाली बातों के प्रति जनचेतना पैदा करें। बस, दोस्तो मेरे पास यही छोटी छोटी बातें ही हैं-----जिस बंदे ने बस अपनी सारी ज़िंदगी इन छोटी-छोटी बातों के प्रचार-प्रसार के नाम लिख दी है, उस से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ??।
दोस्तो, आप से एक रिक्वेस्ट है कि कृपया मुझे अपनी मेल कर के अथवा अपनी टिप्पणी/ feedback में यह भी लिखें कि इस बलाग के माध्यम से किन मुद्दों को छूया जाए। वैसे तो मैं यह स्पष्ट कर ही दूं कि मैं कोई ऐसा तीसमार खां भी नहीं हूं---बस जो दो बातें पता हैं उन्हें आप सब से शेयर कर के अच्छा लगता है, बस और कुछ नहीं। बाकी सब बातें तो मैंने आप सब से सीखनी हैं..................obviously in this wonderful platform of blogging…..where we understand, share and learn from each other’s wisdom and experience.
गुरुवार, 10 जनवरी 2008
स्वप्नदोष जब कोई दोष है ही नहीं तो !!
मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई कि हम इतना पढ़े-लिखे हुए लोग भी इस मामले में क्यों चूक जाते हैं। क्यों लेते हैं हम कुछ चीज़ों को ---just taken for granted !!
जी नहीं, यह बात बहुत महत्वपूर्ण है जो कि आप ही अपने बेटे को दुनिया में सब से अच्छे ढंग से बता सकते हैं, दूसरा कोई नहीं ----क्योंकि वह आप पर पूरा भरोसा करता है। शायद हमारा समय कुछ और था---हम लोगों की अपने बड़ों के साथ कहां इतनी ओपननैस थी, हम लोग ---शायद आप को भी कुछ कुछ याद होगा--तो बस यह सब बातें सोच सोच कर खुद मन ही मन कईं साल परेशान रहते थे। अकसर युवावस्था की दहलीज पर खड़े ये बच्चे अपने शरीर में होने वाले विभिन्न तरह के बदलाव( night-fall भी उन्हीं में से एक है, शेष के बारे में भी आप और हम अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन उस बच्चे से भी उस के मानसिक स्तर के अनुसार बात तो कर लीजिए) देख कर बौखला से जाते हैं कि पता नहीं मेरे साथ ही यह सब क्यों हो रहा है।
और, ये जो खानदानी नीम-हकीम वगैरह जगह जगह बैठे हुए हैं ,ये तो इस समस्या (वैसे तो यह कोई समस्या है ही नहीं,अगर एक बार समझ में आ जाए तो)--चलिए, समस्या कहते ही नहीं, मुद्दा कहते हैं...अब तो ठीक है........वे इस मुद्दे को अपने इश्तिहारों से और भी कंप्लीकेट कर के रखे हुए हैं। इतने अजीब तरह से अपनी मशहूरी करते हैं और अपने कुछ इस तरह के विज्ञापन छपवा कर इतनी strategic जगहों पर इन्हें चिपका देते हैं या बंटवा देते हैं कि टीन-एजर्रस का इन की दिमाग खराब करने वाली भाषा के जाल से बचना मुश्किल हो जाता है। और देर-सवेर यह निर्बोध किशोर इन के चंगुल में फंस जाते हैं। मेरा एक मित्र मुझे बता रहा था कि उस के पास एक व्यक्ति अपने 19-20 साल के बेटे को ले कर आया जो कि इन झोलाछाप नीम-हकीमों के चक्कर में फंस कर अपने योनअंगों की छोटीमोटी इंफैक्शन( और वह भी वास्तविक कम, काल्पनिक ज्यादा) से निजात पाने के लिए70-80 हज़ार रूपये धीरे-धीरे मां-बाप से छुप कर इस क्वैक को दे चुका था---मेरा वह मित्र skin and V.D specialist है, वह कह रहा था कि उसे केवल कुछ दिनों के लिए दवाईयां दीं, थोड़ी साफ-सफाई के बारे में अच्छी तरह से बता दिया जिस से वह बिल्कुल ठीक हो गया।
हम कईं बार यह भी समझ लेते हैं कि बच्चे आज कल इतने एडवांस हैं, वे सब बातें जानते ही होंगे। लेकिन शायद नहीं...अपने दोस्तों से तो उन्हें भ्रामक या और भी अधकचरी जानकारी ही मिलेगी जिससे वे और भी उलझ कर रह जाएंगे। इंटरनैट पर सर्च कर के बहुत कुछ इस विषय से संबंधित भ्रांतियां उखाड़ फैंकने के लिए उन को मिल सकता है, लेकिन आप का बेटा तो बस आप के ऊपर ही सारे जहां से ज्यादा विश्वास करता है। इसलिए आप के द्वारा की गई बात बेहद कारगार सिद्ध होगी। आप एक बार इस विषय के बारे में संवाद छेड़ कर तो देखिए.........लेकिन यह सब जल्दी ही कर लीजिए। अभी भी कोई ब्लाक रास्ते में आ रहा है तो कम से कम मेरी इस पोस्टिंग को उसे पढ़वा तो दें, उसे तसल्ली सी हो जाएगी।
मेरा भी एक टीनएज बेटा है, उसे मैं यह बात कईं बार खुले तौर पर समझा चुका हूं....और कुछ कुछ अंतराल के बाद ऐसे ही थोड़ी दोहरा सी देता हूं। कईं बार जब मैं जब उसे चिंता में डूबा देखता हूं , तो उस से पूछता हूं कि क्या उसे ये बातें तो परेशान नहीं कर रहीं----तो वह तुरंत जवाब दे देता है----पापा, उस के बारे में तो आप कोई टेंशन न रखा करो, मैं इन सब बातों को समझता हूं, जानता हूं, मुझे ऐसा वैसा कोई फिक्र नहीं है। दोस्तो, यह बात एक ही बार कहने से नहीं चलेगा, समय समय उस की मानसिक स्थिति के अनुसार इस बात को बड़ी इंफारमल तरीके से दोहरा देना बेहद जरूरी है।
साथ साथ इन बच्चों को यह भी संदेश देना होगा कि सात्विक खाना खाएं, जंक फूड से दूरी बनाए रखें, पान-मसालों, गुटखों को पास न फटकने दें, रात को खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लिया करें, योगाभ्यास(प्राणायाम् भी) एवं ध्यान किया करें और सब से जरूरी प्रार्थना किया करें----इस में बेहद शक्ति है। इस के इलावा कोई और भी समस्या है तो क्वालीफाईड डाक्टर हैं , उन की सलाह लेने में बेहतरी है।
तो क्या मैं यह इत्मीनान कर लूं कि आज शाम को आप अपने बेटे के दिल को थोड़ा टटोलेंगे ?? ....लेकिन प्लीज़ ये बातें करिए अकेले में ही।
So, good luck !!---Just go ahead !!
स्वपन दोष जब कोई दोष है ही नहीं तो !!
दोस्तो, क्या आपने यौवन की दहलीज़ पर पांव रख रहे अपने बेटे की आंखों में एक अजीब-सी बेचैनी का तूफान देख कर कभी उसे यह कहने की जरूरत महसूस की है कि स्वप्नदोष (वही जिसे इंगलिश में हम लोग Nightfall भी कह दिया करते हैं)कोई दोष-वोष नहीं है, बस तुम इस के बारे में बिलकुल सोचा मत करो, सब कुछ समय के साथ ठीक हो जाएगा। Why don't you tell him that these 'night falls' are so common and almost a natural phenomenon !! उसे क्यों नहीं हम पूरी तरह एक बात समझा देते कि देखो, यह सिर्फ तुम्हारे साथ ही नहीं हो रहा, ऐसा अकसर इस उम्र में होता ही है, जब मैं तुम्हारी उम्र का था,तो मैं भी इस अवस्था से गुज़र चुका हूं। दोस्तो, अपनी उदाहरण दे कर बताना बेहद जरूरी है----क्योंकि तब आप का बेटा आप से बेहतर रिलेट करने लगता है।
मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई कि हम इतना पढ़े-लिखे हुए लोग भी इस मामले में क्यों चूक जाते हैं। क्यों लेते हैं हम कुछ चीज़ों को ---just taken for granted !!
जी नहीं, यह बात बहुत महत्वपूर्ण है जो कि आप ही अपने बेटे को दुनिया में सब से अच्छे ढंग से बता सकते हैं, दूसरा कोई नहीं ----क्योंकि वह आप पर पूरा भरोसा करता है। शायद हमारा समय कुछ और था---हम लोगों की अपने बड़ों के साथ कहां इतनी ओपननैस थी, हम लोग ---शायद आप को भी कुछ कुछ याद होगा--तो बस यह सब बातें सोच सोच कर खुद मन ही मन कईं साल परेशान रहते थे। अकसर युवावस्था की दहलीज पर खड़े ये बच्चे अपने शरीर में होने वाले विभिन्न तरह के बदलाव( night-fall भी उन्हीं में से एक है, शेष के बारे में भी आप और हम अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन उस बच्चे से भी उस के मानसिक स्तर के अनुसार बात तो कर लीजिए) देख कर बौखला से जाते हैं कि पता नहीं मेरे साथ ही यह सब क्यों हो रहा है।
और, ये जो खानदानी नीम-हकीम वगैरह जगह जगह बैठे हुए हैं ,ये तो इस समस्या (वैसे तो यह कोई समस्या है ही नहीं,अगर एक बार समझ में आ जाए तो)--चलिए, समस्या कहते ही नहीं, मुद्दा कहते हैं...अब तो ठीक है........वे इस मुद्दे को अपने इश्तिहारों से और भी कंप्लीकेट कर के रखे हुए हैं। इतने अजीब तरह से अपनी मशहूरी करते हैं और अपने कुछ इस तरह के विज्ञापन छपवा कर इतनी strategic जगहों पर इन्हें चिपका देते हैं या बंटवा देते हैं कि टीन-एजर्रस का इन की दिमाग खराब करने वाली भाषा के जाल से बचना मुश्किल हो जाता है। और देर-सवेर यह निर्बोध किशोर इन के चंगुल में फंस जाते हैं। मेरा एक मित्र मुझे बता रहा था कि उस के पास एक व्यक्ति अपने 19-20 साल के बेटे को ले कर आया जो कि इन झोलाछाप नीम-हकीमों के चक्कर में फंस कर अपने योनअंगों की छोटीमोटी इंफैक्शन( और वह भी वास्तविक कम, काल्पनिक ज्यादा) से निजात पाने के लिए70-80 हज़ार रूपये धीरे-धीरे मां-बाप से छुप कर इस क्वैक को दे चुका था---मेरा वह मित्र skin and V.D specialist है, वह कह रहा था कि उसे केवल कुछ दिनों के लिए दवाईयां दीं, थोड़ी साफ-सफाई के बारे में अच्छी तरह से बता दिया जिस से वह बिल्कुल ठीक हो गया।
हां,तो दोस्तो, अपनी बात हो रही थी--स्वपन दोष की.......सीधी सी बात है कि दोस्तो जब कोई मटकी भर जाएगी तो थोड़ी छलकेगी ही न--- वही बात यहां है कि किशोरावस्था के दौरान जब वीर्य की मटकी शरीर में भर जाती है तो वह कभी कभी छलक जाती है......that's all ! और इन बच्चों के लिए यह इतना बडा़ मुद्दा बना रहता है--- इतना बडा़ कि वे अपने कैरियर के हिसाब से इतने महत्वपूर्ण वर्षों में इस छोटी की वजह के कारण कईं बार पूरी तरह अपनी पढ़ाई में कंसैनटरेट ही नहीं कर पाते।
हम कईं बार यह भी समझ लेते हैं कि बच्चे आज कल इतने एडवांस हैं, वे सब बातें जानते ही होंगे। लेकिन शायद नहीं...अपने दोस्तों से तो उन्हें भ्रामक या और भी अधकचरी जानकारी ही मिलेगी जिससे वे और भी उलझ कर रह जाएंगे। इंटरनैट पर सर्च कर के बहुत कुछ इस विषय से संबंधित भ्रांतियां उखाड़ फैंकने के लिए उन को मिल सकता है, लेकिन आप का बेटा तो बस आप के ऊपर ही सारे जहां से ज्यादा विश्वास करता है। इसलिए आप के द्वारा की गई बात बेहद कारगार सिद्ध होगी। आप एक बार इस विषय के बारे में संवाद छेड़ कर तो देखिए.........लेकिन यह सब जल्दी ही कर लीजिए। अभी भी कोई ब्लाक रास्ते में आ रहा है तो कम से कम मेरी इस पोस्टिंग को उसे पढ़वा तो दें, उसे तसल्ली सी हो जाएगी।
मेरा भी एक टीनएज बेटा है, उसे मैं यह बात कईं बार खुले तौर पर समझा चुका हूं....और कुछ कुछ अंतराल के बाद ऐसे ही थोड़ी दोहरा सी देता हूं। कईं बार जब मैं जब उसे चिंता में डूबा देखता हूं , तो उस से पूछता हूं कि क्या उसे ये बातें तो परेशान नहीं कर रहीं----तो वह तुरंत जवाब दे देता है----पापा, उस के बारे में तो आप कोई टेंशन न रखा करो, मैं इन सब बातों को समझता हूं, जानता हूं, मुझे ऐसा वैसा कोई फिक्र नहीं है। दोस्तो, यह बात एक ही बार कहने से नहीं चलेगा, समय समय उस की मानसिक स्थिति के अनुसार इस बात को बड़ी इंफारमल तरीके से दोहरा देना बेहद जरूरी है।
साथ साथ इन बच्चों को यह भी संदेश देना होगा कि सात्विक खाना खाएं, जंक फूड से दूरी बनाए रखें, पान-मसालों, गुटखों को पास न फटकने दें, रात को खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लिया करें, योगाभ्यास(प्राणायाम् भी) एवं ध्यान किया करें और सब से जरूरी प्रार्थना किया करें----इस में बेहद शक्ति है। इस के इलावा कोई और भी समस्या है तो क्वालीफाईड डाक्टर हैं , उन की सलाह लेने में बेहतरी है।
तो क्या मैं यह इत्मीनान कर लूं कि आज शाम को आप अपने बेटे के दिल को थोड़ा टटोलेंगे ?? ....लेकिन प्लीज़ ये बातें करिए अकेले में ही।
So, good luck !!---Just go ahead !!
Posted by Dr.Parveen Chopra at 8:53 AM
1 comments:
pankaj said...
aap ne iss bare me jo jankaridi hai vo bahot achi hai
March 25, 2008 1:17 PM
स्वप्नदोष जब कोई दोष है ही नहीं तो !!
मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई कि हम इतना पढ़े-लिखे हुए लोग भी इस मामले में क्यों चूक जाते हैं। क्यों लेते हैं हम कुछ चीज़ों को ---just taken for granted !!
जी नहीं, यह बात बहुत महत्वपूर्ण है जो कि आप ही अपने बेटे को दुनिया में सब से अच्छे ढंग से बता सकते हैं, दूसरा कोई नहीं ----क्योंकि वह आप पर पूरा भरोसा करता है। शायद हमारा समय कुछ और था---हम लोगों की अपने बड़ों के साथ कहां इतनी ओपननैस थी, हम लोग ---शायद आप को भी कुछ कुछ याद होगा--तो बस यह सब बातें सोच सोच कर खुद मन ही मन कईं साल परेशान रहते थे। अकसर युवावस्था की दहलीज पर खड़े ये बच्चे अपने शरीर में होने वाले विभिन्न तरह के बदलाव( night-fall भी उन्हीं में से एक है, शेष के बारे में भी आप और हम अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन उस बच्चे से भी उस के मानसिक स्तर के अनुसार बात तो कर लीजिए) देख कर बौखला से जाते हैं कि पता नहीं मेरे साथ ही यह सब क्यों हो रहा है।
और, ये जो खानदानी नीम-हकीम वगैरह जगह जगह बैठे हुए हैं ,ये तो इस समस्या (वैसे तो यह कोई समस्या है ही नहीं,अगर एक बार समझ में आ जाए तो)--चलिए, समस्या कहते ही नहीं, मुद्दा कहते हैं...अब तो ठीक है........वे इस मुद्दे को अपने इश्तिहारों से और भी कंप्लीकेट कर के रखे हुए हैं। इतने अजीब तरह से अपनी मशहूरी करते हैं और अपने कुछ इस तरह के विज्ञापन छपवा कर इतनी strategic जगहों पर इन्हें चिपका देते हैं या बंटवा देते हैं कि टीन-एजर्रस का इन की दिमाग खराब करने वाली भाषा के जाल से बचना मुश्किल हो जाता है। और देर-सवेर यह निर्बोध किशोर इन के चंगुल में फंस जाते हैं। मेरा एक मित्र मुझे बता रहा था कि उस के पास एक व्यक्ति अपने 19-20 साल के बेटे को ले कर आया जो कि इन झोलाछाप नीम-हकीमों के चक्कर में फंस कर अपने योनअंगों की छोटीमोटी इंफैक्शन( और वह भी वास्तविक कम, काल्पनिक ज्यादा) से निजात पाने के लिए70-80 हज़ार रूपये धीरे-धीरे मां-बाप से छुप कर इस क्वैक को दे चुका था---मेरा वह मित्र skin and V.D specialist है, वह कह रहा था कि उसे केवल कुछ दिनों के लिए दवाईयां दीं, थोड़ी साफ-सफाई के बारे में अच्छी तरह से बता दिया जिस से वह बिल्कुल ठीक हो गया।
हम कईं बार यह भी समझ लेते हैं कि बच्चे आज कल इतने एडवांस हैं, वे सब बातें जानते ही होंगे। लेकिन शायद नहीं...अपने दोस्तों से तो उन्हें भ्रामक या और भी अधकचरी जानकारी ही मिलेगी जिससे वे और भी उलझ कर रह जाएंगे। इंटरनैट पर सर्च कर के बहुत कुछ इस विषय से संबंधित भ्रांतियां उखाड़ फैंकने के लिए उन को मिल सकता है, लेकिन आप का बेटा तो बस आप के ऊपर ही सारे जहां से ज्यादा विश्वास करता है। इसलिए आप के द्वारा की गई बात बेहद कारगार सिद्ध होगी। आप एक बार इस विषय के बारे में संवाद छेड़ कर तो देखिए.........लेकिन यह सब जल्दी ही कर लीजिए। अभी भी कोई ब्लाक रास्ते में आ रहा है तो कम से कम मेरी इस पोस्टिंग को उसे पढ़वा तो दें, उसे तसल्ली सी हो जाएगी।
मेरा भी एक टीनएज बेटा है, उसे मैं यह बात कईं बार खुले तौर पर समझा चुका हूं....और कुछ कुछ अंतराल के बाद ऐसे ही थोड़ी दोहरा सी देता हूं। कईं बार जब मैं जब उसे चिंता में डूबा देखता हूं , तो उस से पूछता हूं कि क्या उसे ये बातें तो परेशान नहीं कर रहीं----तो वह तुरंत जवाब दे देता है----पापा, उस के बारे में तो आप कोई टेंशन न रखा करो, मैं इन सब बातों को समझता हूं, जानता हूं, मुझे ऐसा वैसा कोई फिक्र नहीं है। दोस्तो, यह बात एक ही बार कहने से नहीं चलेगा, समय समय उस की मानसिक स्थिति के अनुसार इस बात को बड़ी इंफारमल तरीके से दोहरा देना बेहद जरूरी है।
साथ साथ इन बच्चों को यह भी संदेश देना होगा कि सात्विक खाना खाएं, जंक फूड से दूरी बनाए रखें, पान-मसालों, गुटखों को पास न फटकने दें, रात को खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लिया करें, योगाभ्यास(प्राणायाम् भी) एवं ध्यान किया करें और सब से जरूरी प्रार्थना किया करें----इस में बेहद शक्ति है। इस के इलावा कोई और भी समस्या है तो क्वालीफाईड डाक्टर हैं , उन की सलाह लेने में बेहतरी है।
तो क्या मैं यह इत्मीनान कर लूं कि आज शाम को आप अपने बेटे के दिल को थोड़ा टटोलेंगे ?? ....लेकिन प्लीज़ ये बातें करिए अकेले में ही।
So, good luck !!---Just go ahead !!
1 comments:
- pankaj said...
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aap ne iss bare me jo jankaridi hai vo bahot achi hai
- March 25, 2008 1:17 PM
1 comments:
डाक्टर साहब,
आपका प्रयास सराहनीय, आप अपने प्रयासों को जारी रखिये । लोग टिप्पणी भले ही न करें लेकिन आपके ब्लाग को पढ अवश्य रहे होंगे । दूसरे, आपका लिखा हुआ अगर कोई ६ महीने या एक साल बाद भी पढेगा तो भी उसे फ़ायदा ही होगा । मैं आपसे निम्न विषयों पर लिखने की गुजारिश करूँगा ।
१) शराब पीना: लेकिन मैं इस विषय पर आपका लेख सामाजिक परिपेक्ष में नहीं बल्कि ठेठ चिकित्सा विज्ञान की नजर से जानना चाहूँगा ।
२) दमे/अस्थमा की बीमारी: मेरे परिवार के एक सदस्य इस बीमारी से पीडित हैं इसलिये मैं इस विषय पर और जानकारी चाहूँगा ।
साभार,
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