मेरे प्रश्न लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मेरे प्रश्न लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 16 अगस्त 2008

. कोई समाधान है ?

आप को मैं एक समाधान के लिए लिख रहा हून. कृपया इस के बारे में मुझे जानकारी की ज़रूरत है. हिन्दी…हिन्दी….हिन्दी हम लोग कह तो देते हैं लेकिन इस को अपने पीसी के एलवा कहीं भी लिखना एक सिरदर्दी है…….इस के बारे में शायद हम लोगों को जानकारी ही नहीं है ….एनीवे, मेरे से अब इंग्लीश फोनेटिक्स के द्वारा क्विलपॅड पर लिखा नहीं जा रहा…इस लिए अँग्रेज़ी में लिख कर हिन्दी ब्लॉग्गिंग के नियम तोड़ रहा हो……आशा है इस के लिए आप मुझे क्षमा करेंगे.
Please suggest some remedy ……
Dear friends, for the last 2-3 days I have access to a computer which does not have the facility of Hindi writing just by pressing the Alt and Shift key as was possible with my PC/Laptop where I am using Vista/XP.

I just wanted that I would write the posts in Hindi on my laptop and then using a pendrive would publish them. But that is not feasible as I have tried the same.

After that I tried to add Hindi language through languages and regional option bars after going into the control panel. However, that option is also close as they dont have Hindi in the list of languages. I have been told that re-installing XP will help but that is not possible before a couple of days.

Then, my son told me to write my article in notepad and then using a pendrive to get it published. However, that has also been tried but it failed…as no text in Hindi was visible.

Then, I was told to write in Quillpad using phonetic in English and it would get converted into Hindi before getting it published on my blog. However, I tried to write two lines and then tried to publish it on to the blogger …..it succeeded but it is so cumbersome to write in English phonetics….actually I am used to it.

Then, I noticed that on the computer I am working has a LeaP office installed on it…..I had seen it for the first time although I had heard about it many times but my impression was that it is for people who know Remington Hindi typing. So, choosing the Inscript mode, I again wrote in Hindi and then after copying that text(written in Hindi)….I tried to paste it into an e-mail to sent by gmail…..however, the hindi text never appeared on pasting that copied Hindi text …….So,now I don’t know what to do…..but one thing is sure that for me, writing on quillpad is very cumbersome.

Please reply the following question ….
---How Leap office can be used to do Hindi Blogging using inscript typing mode?
---Any other way for Hindi typing(may be online) using inscript mode which is compatible with hindi blogging?
Please do reply

गुरुवार, 22 मई 2008

अगर अपनी दो ब्लागस को इक्ट्ठा करना हो...

सभी हिंदी चिट्ठाकारों के नाम......
कृपया इन दो बातों का उत्तर देने की कृपा करें..

पहली बात तो यह कि अगर कोई ब्लागर अपनी दो ब्लाग्स को इक्ट्ठा कर के एक करना चाहे तो उस के लिये उसे क्या करना होगा.....मुझे तो यही रास्ता लगता है कि एक-एक पोस्ट को नईं ब्लाग पर दोबारा पब्लिश करना होगा। चलिये यह भी मान लिया जाये...लेकिन इस में दिक्कत यह लगती है कि बार बार फिर आप की इन पहले से पब्लिश पोस्टों को ब्लागवाणी पर दिखाया जायेगा, इस का क्या समाधान है, कृपया उत्तर दीजिये। एक बात और भी है कि अगर हम इस तरह से दोबारा अपनी पोस्टें अपने एक ब्लाग से दूसरे ब्लाग पर शिफ्ट करते हैं तो कमैंट्स भी डिलीट हो जायेंगे....इन सब का क्या सोलूशन है। मुझे आप के सुझावों का इंतज़ार रहेगा।

दूसरी बात यह है कि हम लोग जो इतना ब्लागस पर लिख रहे हैं या लिख चुके हैं , उस का हमारे पास रिकार्ड रखने का कोई तरीका भी तो होगा। बहुत समय पहले इन सभी पोस्टों का बैक-अप रखने के बारे में कुछ पढ़ा तो था, लेकिन वह बिलकुल याद नहीं है, तो कृपया इस के बारे भी बताइये की यह बैक-अप रखना कैसे संभव होगा।

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2008

अब आप होम-वर्क की भी परवाह नहीं करते !


मैं बहुत अफसोस से यह कह रहा हूं कि मैंने इसी बलोग की पिछली पोस्ट पर रविवार के दिन आप को एक होम-वर्क दिया था, लेकिन केवल उन्मुक्त जी ने ही उसे सीरियसली लिया है और अपना होम-वर्क कर के दिखाया है। आप क्यों नहीं कर रहे ? ---नहीं , नहीं ,कोई बहानेबाजी यहां नहीं चलेगी। आप अभी इस से पिछली पोस्ट देखिए और एक-दो दिन के अंदर जैसा कहा गया है वैसा करिये।

मैं इस बारे में बहुत ही गंभीर हूं कि हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को कंप्यूटर और इंटरनेट के साथ जोड़ने के लिए क्यों ना कुछ हिंदी में याहूआंसर्ज़ या उस से भी बढ़िया कुछ शुरू करें। जिस में तरह तरह के जिज्ञासु हमारी अपनी भाषा के साथ जुड़ेगें। कुछ इस तरह के ही प्रश्न मैंने होम वर्क में दिये हैं , तो क्या आप को यह होम-वर्क मुशिकल जान पड़ रहा है। अगर नहीं, तो दौड़ा डालिए अपनी उंगली को अपनी की-बोर्ड पर......

NOTE……………Please take it seriously ….otherwise matter will be reported to worthy Principal .

सोमवार, 25 फ़रवरी 2008

चलिए आज छुट्टी का दिन है-- आप सभी हिंदी बलोगर्स को एक होम-वर्क दें.....

वो कहते हैं न कि एक आइडिया लाइफ बदल देता है, मैं भी यही क्लेम(सही या गलत , कह नहीं सकता) कर रहा हूं कि पांच मिनट पहले मुझे भी एक ऐसा ही आइडिया आया है। ऐसा है कि हम सब हिंदी बलोगर्स चाहते हैं ना कि इंटरनैट पर हिंदी का प्रयोग बढ़े, लोग इस के साथ जुड़े, लोग हिंदी की वेब-साइट्स पढ़ें, तो क्या हम सब के दिन रात बलाग्स लिखने से यह संभव हो पायेगा। लगता तो है, लेकिन इस में शायद टाईम लगेगा। खूब टाईम लगेगा......। अब हम लोग अपने अपने विषय में इतनी मेहनत से लिख तो रहे हैं, लोग पढ़ भी रहे हैं.....लेकिन हम लोग ज्यादातर आपस में ही एक दूसरे की पीठ खुजाते नज़र आ रहे हैं.......देख तूने मुझे दाद दी थी , मैं भी देख दाद दे रहा हूं। यह भी अपने आप में ठीक है, इस से हम नये-नये लिक्खाड़ों का हौंसला बढ़ता है। लेकिन अगर हम दिल से चाहते हैं कि इंटरनैट पर हिंदी का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़े तो हमें आम आदमी ( जो भी इंटरनैट यूज़ कर रहा है) की उंगली भी पकड़नी होगी।

अब  मुझे ही देखिए ...मैं हमेशा तम्बाकू –गुटखे के पीछे ही पड़ा रहता हूं या अपनी स्लेट बलोग पर बस कुछ भी लिख कर टाइम को धक्के दे रहा हूं, कोई मक्की की रोटियों की विधि बता रहा है, कोई भड़ास निकालने के लिए हल्ला-शेरी दे रहा है, कोई हल्ला बोलने की हिम्मत जुटवा रहा है, कोई निठल्ला चिंतन कर रहा है, किसी की मानसिक हलचल ने धूम मचाई हुई है, कोई टिप्पणीकार सभी टिप्पणी पर नज़र रख रहा है, कोई स्वामी जी इ-जगत के बारे में बताते हैं, किसी की कतरनें हमारा दिल बहला रही हैं, कोई तरकश में बहुत कुछ लिये नज़र आ रहा है, कोई अपनी ही धुन में हिंदो विश्वकोष बनाने में व्यस्त हैं, कोई संता-बंता के चुटकुले सुना रहा है.......दोस्तो, ये सब बहुत ही महान काम हैं....इसमें रत्ती भर भी शक नहीं है, जो बंदा अपनी भाषा से प्रेम के वशीभूत यह सब किया जा रहा है, वह तो एक बहुत सेवा का काम कर रहा है।( कृपया इस पैराग्राफ के भाव को समझते हुए अन्यथा न लें, नोट करें सब से पहले मैंने अपना ही नाम लिया है.......कृपया इसे खेल-भाव से लें...धन्यवाद)

लेकिन एक हिंदोस्तानी के मन में भी शायद कुछ ऐसा प्रश्न हिलोरे खा रहे हैं जिन का जवाब उसे कहीं से ठीक से मिल नहीं रहा, नेट पर सामग्री तो है लेकिन वह अंग्रेज़ी में इतना प्राफीशियेंट नहीं है कि इसे अच्छी तरह से समझ सके। इसलिए जो आम हिंदोस्तानी नेट पर आ रहा है उसे हिंदी की साइट्स तक खींच लाने का मेरे पास एक सुझाव है......मैं सोच रहा हूं कि जैसे याहू. आंसर्ज़ ( Yahoo! Answers) की सर्विस है , हम सब मिल कर इस के बारे में सोचें और कुछ इस तरह का हिंदी में भी एक प्लेटफार्म तैयार करें जिस में लोग अपना प्रश्न लिखें....फिर जो भी चाहे उस का जवाब दे...लिखने वाले को यह सुविधा हो कि वह चाहे हिंदी में प्रश्न पूछे या अंग्रेज़ी में ,लेकिन हिंदी लेखकों की तरफ से यही कोशिश हो कि वे जवाब हिंदी में ही लिखें......इस से लोगों को कंप्यूटर पर हिंदी लिखने के लिए भी प्रेरणा मिलेगी....और खेल खेल में यह सब सीख जायेंगे। और तो और क्या इंटरनैट पर हिंदी की चैटिंग....( बलाग्स पर नहीं , जस्ट खुले में .....किसी दूसरे प्लेटफार्म पर जैसे याहू में होती है) नहीं हो सकती ।
मुझे तो इस के बारे में कुछ खास पता नहीं है लेकिन अगर याहू आंसर्ज की तरह कुछ हिंदी में हो जाये तो मज़ा आ जाये। इस से लगता है कि इंटरनैट पर हिंदी की तस्वीर ही बदल जायेगी। हिंदी भाषा के लेखकों को एक दिशा मिलेगी।......और हां,साथ ही साथ हम सब हिंदी बलोगिंग तो करते ही रहेंगे।

तो , आप सब धुरंधर लिक्खाड़ो के लिए ( जैसा कि वह चिट्ठों का चांदनी चौंक कहता है) यह होम-वर्क है कि इस के बारे में सोचें.....आप में से बहुत से तो टैक्नीकल एक्सपर्ट हैं, बहुत से बहुत पुराने लिक्खाड़ हैं....इस लिए इस के बारे में ज़रूर कुछ करें....जब तक आप इस के बारे में कुछ नहीं करेंगे...मैं आप सब के पीछे पड़ा ही रहूंगा...यानि इस तरह की पोस्टें प्रकाशित कर कर के आप को बोर करता रहूंगा।

चाहे मुझे इस में इन्वाल्व टैक्नीकैलिटिज़ की ज़रा भी समझ नहीं है, लेकिन मुझे इतनी आशा ज़रूर है कि आप सब के सहयोग से हिंदी में याहू, आंसर्ज जैसे कुछ तो क्या ,और भी बहुत कुछ संभव है। तो, चलो, सब मिल कर हम भी कुछ सबक इंटरनैट पश्चिमी देशों को सिखायें.....बहुत हो गया पीछे पीछे चलना, अब घिन्न आने लगी है। तो चलिए कुछ नया सोचॆं , कुछ नया करें और हिंदी की मशाल सारे संसार में प्रज्जवलित करें।

और हां, अगर ऐसा कुछ हिंदी भाषा में पहले से ही कुछ ऐसा हो रहा है तो इस के बारे में मझे भी प्लीज़ बतलाइयेगा....और इस मामले में मेरे अनाड़ीपन को हिंदी बलोगिंग में एक फ्रैशर समझ कर माफ कर दीजिएगा......अब आप सीनियर होने के नाते इतना भी नहीं करेंगे क्या ?