मंगलवार, 10 मार्च 2015

मौत से ज़िंदगी की बात करो....

जब मैंने सन् २००० के आस पास सेहत संबंधी विषयों पर अखबारों के लिए लिखना शुरू किया तो मैं अकसर लिखने वाले विषयों को अपनी अंगुलियों पर गिन लिया करता था....फिर धीरे धीरे जैसे जैसे आंखों से परदा हटता गया तो पता चला कि हर लम्हा एक विषय लेकर आपके सामने खड़ा है।

सब कुछ अनुभव किया ....लेकिन अब पंद्रह बरस बाद यही लगने लगा है कि क्या यार, वही घिसी पिटी बातें...डेंगू के ये लक्षण, स्वाईन फ्लू की दवाई, मधुमेह की दवाईयां, दिल की बीमारी के इलाज .....सब पर लिखता चला गया लेकिन मन में अब आने लगा है कि यह सब बेकार था......किसी बीमार से उस के सेहतमंद होने की बात करो तो बात बने, शब्दों में किसी गिरते हुए को थाम लेने की तासीर पैदा हो तो बात बने....वरना क्या फायदा बात बात पे लोगों को डराने धमकाने का कि यह मत खाओ, यह मत करो, वो मत करो....जो पहले ही से खौफ़ज़दा हैं, उन के साथ मस्ती की बात करो, उन को हंसाओ.....मैं तो दोस्तो यही समझा हूं ...और पूरी शिद्दत से इसे महसूस करने लगा हूं।

जब मैं किसी के हालात बदल ही नहीं सकता, बिल्कुल भी नहीं, कल्पना भी नहीं कर सकता तो क्यों हम उस के मौजूदा हालात की बात कर कर के बार बार उस की दुःखती रग पर हाथ रखने की हिमाकत करूं...


कुछ कुछ पंक्तियां मन में बस जाती हैं...वे आप की राह ही बदल देती हैं....मैंने भी दोस्तो कुछ महीने पहले बशीर बद्र जी की ये पंक्तियां कहीं देखीं......देखीं क्या, दोस्तो, वे मेरे मन में उतर गईं...मैंने डायरी में नोट भी कर रखी हैं....आप भी सुनिए...
  "शमा से रोशनी की बात करो..
चांद से चांदनी की बात करो। 
जीने वाले तुम्हें खुदा की कसम, 
मौत से ज़िंदगी की बात करो, 
न जी भर के देखा न कुछ बात की, 
बड़ी आरज़ू थी मुलाकात की। 
कईं साल से कुछ खबर नहीं,
कहां दिन गुज़ारा कहां रात की। 
मैं चुप था तो हवा रूक गई, 
कि जुबां सब समझते हैं ज़ज्बात की।।"
दोस्तो, इस की एक एक पंक्ति में जीवन का सारा सार छिपा है ...मुझे तो मेरे मतलब की दो बातें याद आती रहती हैं.... जीने वाले तुम्हें खुदा की कसम, मौत से ज़िंदगी की बात करो।

इसलिए मुझे लगता है कि मेरे लेखन में भी एक नया मोड़ आया है......जब तक बहुत ही ज़रूरी न हो, मैं अपने ब्लॉग पर बीमारियों की बात नहीं करता...बस मैं भी उम्मीद बांटने की, खुश रहने की, जीवन के उत्सव को मना लेने की ही बातें करना चाहता हूं.....भयंकर बीमारियां और उन के इलाज के बारे में ....जहां पर भी अकसर आम आदमी का बहुत बार घोर शोषण ही शोषण है, बहुत कुछ पढ़ते-सुनते रहते हैं, ऐसे में क्या बात करें....जो किसे को थामने की बजाए.....

सच में ये जो महान् शायर हैं इन के शब्दों में हकीमों के नुस्खों से भी कहीं ज़्यादा असर होता है.......हो भी क्यों नहीं, दोस्तो, इन के ये जादुई शब्द ही हैं जो मुरझाए चेहरों पर एक बड़ी से मुस्कुराहट बिखेर देते हैं.......इन के फन को कोटि कोटि प्रणाम् और ऐसी सभी महान् हस्तियों को दंडवत् प्रणाम्.......क्या कोई टेबलेट यह काम कर सकती है?

सुबह सुबह आज आप को एक इस विषय से मिलता जुलता गीत सुनाते हैं........आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता है... मोहम्मद रफी साहब हम सब आप से बहुत मोहब्बत करते हैं.......

दोस्तो, कहीं भी कुछ अच्छी बात पढ़ो तो उसे लिख लिया करें, अपने दिल में.....वरना कम से कम डायरी में तो ज़रूर ही, क्या पता किसी के कौन से शब्द हमारे जीने की राह ही बदल दें। आजमा कर देखिएगा.......मैं आजमा चुका हूं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है....



3 टिप्‍पणियां:

  1. मैं चुप था तो हवा रुक गयी
    कि जुबां सब समझते हैं जज़्बात की।
    वाह..दिल में उत्तर गयी ये लाइने....
    आप की सोच को सलाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. मैं चुप था तो हवा रुक गयी
    कि जुबां सब समझते हैं जज़्बात की।
    वाह..दिल में उत्तर गयी ये लाइने....
    आप की सोच को सलाम।

    जवाब देंहटाएं

इस पोस्ट पर आप के विचार जानने का बेसब्री से इंतज़ार है ...