Sunday, June 6, 2010

इंटरनेट लेखन के दांव-पेच...पाठ संख्या 5.

मेरे विचार में एक दिन के चार पाठ ठीक हैं ---इतनी थ्यूरी ठीक है-- अब ज़रा प्रैक्टीकल के लिये लैब का रूख करते हैं। हां, तो अब मैं आप से अपनी सब से मनपसंद साइट के बारे में दो बातें करना चाहूंगा।
मुझे BBC news की साइट बेहद पसंद है--- यह रहा इस का होम-पेज। मैं कंटैंट के ऊपर कुछ ज़्यादा कहना नहीं चाहता क्योंकि मुझे कुछ ज़्यादा पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता। लेकिन जिस इंटरनेट लेखन की बात हम लोग सुबह से कर रहे हैं और जिस के दांव-पेच आप जैसे धुरंधर लिक्खाड़ों को मैं बताने की हिमाकत कर रहा हूं --- उस इंटरनेट लेखन का नमूना जानने के लिये हमें वेब-राइटिंग वर्कशाप के दौरान बीसियों बार बीबीसी न्यूज़ की साइट पर घुमाया गया।
अभी तो आप इस साइट को निहारिये -- उदाहरण के लिये यह रहा इस के हैल्थ सैक्शन का होमपेज और किसी एक हैल्थ स्टोरी पर क्लिक करने पर आप देखेंगे कि कितने जबरदस्त तरीके से न्यूज़-स्टोरी को प्रस्तुत किया गया है।
बीबीसी की हिंदी साइट पर क्या आप कभी गये हैं? इस के विज्ञान के होमपेज को देखिये और एक खबर पर क्लिक करने पर यह देखिेये कौन सी खबर आ गई ---ब्रश करें दिल के रोग से बचें!
अच्छा तो आप इस साइट की विशेषताओं के बारे में सोचिये --शीर्षक, पैराग्राफ, सीधी सादी भाषा और सब तरह से बढ़िया प्रस्तुति। इस का विश्लेषण बाद में करेंगे कि क्यों यह साइट मुझे बेहद पसंद है। यह मेरे व्यक्तिगत मत भी हो सकता है लेकिन मैं इसे विस्तार से आप के साथ कभी शेयर करूंगा।
मुझे यह साइट (विशेषकर अंग्रेज़ी वर्ज़न) इतनी पसंद है कि मैं इसे रोज़ाना देखता हूं ---यह मुझे अपने लेखन की कमियों की तरफ़ झांकने के लिये प्रेरित करती है। आप से भी अनुरोध है कि आप भी इस साइट (अंग्रेज़ी अथवा हिंदी वर्ज़न) को बुकमार्क कर लें। बहुत कुछ सीखने को मिलेगा अगर रोज़ाना इसे देखेंगे ---वैसे हम इसी साइट के बारे में विस्तार से चर्चा तो करेंगे ही।
पता नहीं इस की हिंदी साइट का फांट बहुत छोटा लगता है, लिखा तो था मैंने उन को कि फांट का कुछ हो सके तो देखो ----और पता नहीं क्यों हिंदी वर्जन के पन्ने फीके-फीके से लगते हैं------बिल्कुल मेरी मैट्रिक की क्लास की भूगोल विज्ञान की किताब की तरह? क्या मेरे को ही ऐसा लगता है या आप को भी ऐसा कुछ लगा, हो सके तो बताना। मैं इस बात को समझना चाहता हूं ---- और हां, एक बात और इस साइट पर हिंदी के ब्लाग भी हैं साइट पर टिप्पणी देकर आप को शायद एक-दो दिन का इंतज़ार करना पड़ सकता है कि ब्लागर साहब की नज़रे एनायत हुईं कि नहीं ---अगर हो गईं तो आप की टिप्पणी दिख जाएगी----------------वरना। निःसंदेह अंग्रेज़ी वर्जन में बहुत ज़्यादा खुलापन (interactivity) है जो होमपेज पर नज़र डालने से ही पता लग जाता है।
बस, आज के दिन के पाठ यहीं खत्म होते हैं ---दोपहर में ऐसे ही बैठे बस विचार आया कि इस तरह के पाठ ही दोहरा लूं, सो बैठ गया यह सब लिखने ---आप से कहीं ज़्यादा अपने आप को ये सब बातें याद दिलानें कि वेब-राइटिंग के दांव-पेचों को अभ्यास करने का समय यही है ----इस से पहले की कैसे भी कुछ भी लिख कर छुट्टी कर लेने की मेरी पुरानी आदतें पक जाएं।

7 comments:

  1. आईये जानें .... मन क्या है!

    आचार्य जी

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  2. आपकी पिछली दो-तीन पोस्ट्स पढ़ी हैं। ज्ञानवर्धक जानकारियों को बड़े रोचक ढ़ग से बताया है आपने। कुछ बातें छूट गई हैं कोशिश करता हूँ मैं उसे लिखने की।

    जारी रखिए

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  3. उपयोगी जानकारी।

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  4. बहुत सुंदर जी आप की कलास मै आज मजा आया.

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  5. बहुत बढिया जानकारी का खजाना है आप के पास , बस उसे रोज कोई न कोई मोती निकलते रहे ,धन्यवाद

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  6. अभी तक की सीरीज पढी एक ही सांस में , ज्ञानवर्धक , रोचक
    एक कमी मेरी नजर में कि आप जो लिंक बनायें उन्हे दूसरी टैब में खुलने के लिये रिडायरेक्ट करें ताकि मै आपके लेख का जब तक मजा लूं तब तक दूसरी जगह साइट खुलकर तैयार हो क्योंकि जब मै आपका लेख पूरा पढूंगा तभी तो वहां पर जाउंगा ना

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