Tuesday, September 8, 2009

स्वाईन-फ्लू से बचाव का टीका


स्वाईन-फ्लू से बचाव का टीका इसी महीने में आ जाने की संभावना है। वल्र्ड हैल्थ आर्गेनाइज़ेशन के अनुसार अब तक तो इस महामारी का प्रकोप मद्दम सा ही रहा है लेकिन आगे जैसे सर्दी का मौसम दस्तक दे रहा है इस महामारी के वॉयरस के अपना रूप बदलने के आसार है ( mutation of the virus) जिस से यह बीमारी उग्र रूप धारण कर सकती है। लेकिन इस में घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि ये सब अनुमान ही है।
क्या यह टीका बाज़ार से खरीदा जा सकेगा ?
शुक्र है कि यह टीका किसी व्यक्ति द्वारा बाज़ार से खरीदा नहीं जा सकेगा, वरना जिस की पहुंच होती वह तो इसे लगवा लेता और जिन लोगों को यह टीका लगना बहुत ही ज़रूरी होता वे इस से वंचित ही रह जाते।
इस टीके के बारे में विभिन्न देशों की सरकारें यह तय करेंगी कि यह उस देश में किन किन लोगों को सब से पहले लगना है।
सभी देशों की सब से पहले प्राथमिकता तो होगी वहां के स्वास्थ्य वर्कर ताकि जिन लोगों ने इस बीमारी से ग्रस्त लोगों की देखभाल करनी है वे स्वयं तो तंदरूस्त रहें।
वैसे कुछ देश यह निर्णय ले सकते हैं कि यह टीका उपलब्ध होते ही छोटे छोटे स्कूल के बच्चों को एवं उन बच्चों को जो अभी प्री-स्कूल में हैं यह टीका लगा दिया जाये क्योंकि ये बच्चे आपस में ज़्यादा सटे रहते हैं।
कुछ देश वहां की गर्भवती महिलायों को सब से पहले सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय ले सकते हैं।
जो भी हो, यह सब कुछ टीकों की उपलब्धता पर निर्भर करता है ---समृद्ध देशों ने तो अपने सारे लोगों को टीका लगाने की स्कीम तैयार की हुई है जब कि मध्यम वर्गीय देशों ने 1% से 15-20% लोगों के लिये ही टीके की स्कीम बनाई है।
ऐसा भी नहीं है कि जिन अमीर मुल्कों ने अपनी सारी जनसंख्या को इस से बचा लेने का मनसूबा बनाया हुया है, उन्हें शुरू में ही ऐसा करने का अवसर नहीं मिल पायेगा।
इन टीकों की भी पूरी वैरायिटि है
शायद आप को यह जानकर हैरानगी हो कि तीस तरह के टीके स्वाईन-फ्लू से बचाव के तैयार हो रहे हैं। अब यह सब कैसे हो रहा है, कैसे होते हैं ये तैयार और इन का दाम सरकार को कितना पड़ेगा, इस के बारे मे अगली पोस्ट में बात करेंगे। और यह भी चर्चा करेंगे कि अगर विकासशील देशों को इस की उपर्युक्त खराकें न मिल पाईं तो क्या होगा ?
इसे भी ज़रूर देखें ...
महामारी अब, वैक्सीन सितंबर में

4 comments:

  1. अन्य देशॊ के बारे मै तो पता नही लेकिन यह टीका जर्मन मै तेयार है, लेकिन सरकार यह अभी ्तय नही कर पा रही कि इस का खर्च खुद उठाये या जनता उठाये,वेसे हमारे यहां इतना शोर भी नही जेसे भारत मै है कि हर दुसरे आदमी ने मास्क लगा रखा है ऎयर पोर्ट पर भी सभी की चेकिंग हो रही है, यहां ऎसा कोई शोर नही, लेकिन इस से लडने के लिये तेयारी पुरी है, ओर टीवी ओर रेडियो पर ऎलान कर दिया कि अफ़गाहो मै मत आये, ना ही फ़ेलाये, ओर घबाराने की जरुरत नही... हम इस से लडने के लिये तेयार है

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  2. इतना विशाल बाजार है भारत का .. टीके के बाजार में आने से पहले काफी हल्‍ला किया गया .. टीके 2 प्रतिशत लोगों को भी नहीं लगेगे .. और बीमारी छूमंतर हो जाएगी .. मेडिकल कंपनियों के पैसे बनने तो तय हैं !!

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  3. इन्तजार रहेगा इस विषय पर आपकी अन्य पोस्टों के माध्यम से जागृति का.

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  4. डाक साब बहुत अच्छी जानकारी बहुत दिनों से ढूंढ रहे थे ये जानकारी।

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