Friday, March 11, 2011

कागज़ के फूलों को सहेजने जैसा शौक है हेयर-कलर का क्रेज़

कंपनियां चाहे कुछ भी ढिंढोरा पीटें, बालों को कलर करने का काम पंगे वाला तो है ही ... लेकिन कल मुझे लगा कि इस के बारे में अकसर हम लोग केवल अपने तक ही सोच कर सीमित रह जाते हैं ... इस के एक बहुत ही अहम् पहलू के बारे कल में कैसे मैंने भी आज तक सोचा ही नहीं !!

कल बृहस्पतिवार था—हेयर-ड्रैसरों के यहां सन्नाटा छाया रहता है क्योंकि इक्कीसवीं सदी में भी लोग इस भ्रम से निकल नहीं पाए कि हफ्ते के कुछ दिनों में बाल कटवाना, दाढ़ी मुंडवाना गृहों के लिये ठीक नहीं है। बचपन से ही इस तरह की बेतुकी बातों में रती भर भी विश्वास न होने की वजह से हमेशा इन ‘वर्जित’ दिनों में ही हेयर ड्रेसर के यहां जाना ठीक लगता है ... बिल्कुल भी इंतज़ार ही नहीं करना पड़ता।

बाल काटते समय उस 20-22 वर्षीय युवक ने मुझ से पूछा कि डाक्टर साहब, यह फंगल इंफैक्शन क्यों होती है, इस का इलाज क्या है! मेरे पूछने पर उस ने बताया है कि उसे पैरों पर फंगल है, और हाथों पर भी है...मैंने सोचा कि पैरों पर तो शायद वही खारिश वारिश होगी जो अकसर सर्दी-वर्दी के दिनों में कुछ लोगों को हो जाती है।

उसने आगे बताया कि जब वह हेयर-कलर इस्तेमाल करता है तो अचानक उस के पैरों में खारिश बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। आगे कहने लगा कि वह अपने लिये तो कभी इन कलर्ज़ का इस्तेमाल कभी नहीं करता ... लेकिन ग्राहकों के लिये वह दिन में कईं कईं बार हेयर-डाई का इस्तेमाल करता है...

उस ने आगे हाथ रखे तो मैं समझ गया कि यह चमड़ी रोग है ...Allergic contact dermatitis—मैंने उसे कहा कि दस्ताने डाल के अपना काम किया करे क्योंकि वह कभी भी हेयर-डाई करते वक्त ग्लवज़ नहीं डालता।

और मैंने उसे किसी चमड़ी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करने के लिये कहा। अब बात उस की समझ में आ गई थी... मैंने बाहर आते वक्त उसे पैर दिखाने को भी कहा ...वहां पर भी हाथों की तरह ही पैरों की चमड़ी की तकलीफ़ – इसे फंगल समझ कर वह कईं कईं ट्यूबें इस्तेमाल कर चुका है ....वह भी क्या करे .. हिंदी के अखबारों में नित-प्रतिदिन इतने विज्ञापन आते हैं जो किसी को भी कोई भी विशेषज्ञ बना डालें।

उसे तो मैंने कह दिया कि यह सब हेयर-डाई के इस्तेमाल से हो रहा है और उसे चमड़ी रोग विशेषज्ञ से एक बार तो मिल ही लेना चाहिये ...हाथों वाली बात तो समझ में आती है  लेकिन पैरों पर एर्लिजक रिएक्शन हेयर डाई की वजह से ...बात कुछ ज़्यादा समझ में आती नहीं ...मैंने कल इस के बारे में गूगल भी किया ..लेकिन कुछ नहीं निकला...

सोचता हूं फेसबुक पर जो मेरे कुछ मित्र चमड़ी रोग विशेषज्ञ हैं जो अगर इस पोस्ट को पढ़ेंगे तो अपनी टिप्पणी में कृपया लिख दें कि क्या हेयर-डाई के इस्तेमाल करने से पैरों पर भी एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है...

एब बार तो है कि अगर दर्द की एक टिकिया लेने से होने वाले रिएक्शन से सारे शरीर में खारिश, खुजली और फ़फोले से पड़ सकते हैं तो हेयर डाई से भी तो रिएक्शन से सब संभव ही तो है। लेकिन सोचता हूं कि यह अटकलबाजी न हो, इस लिये इस के बारे में प्रामाणिक बात का पता चलते ही इस पोस्ट को अपडेट करूंगा... हाथों पर तो उस वर्कर को हेयर डाई की वजह ही से समस्या हो रही है, कह रहा था कि अब दस्ताने डाला करेगा......

कल मुझे लगा कि कईं बार हम लोग केवल अपने बारे में ही सोचते हैं .... लेकिन उन लोगों की सेहत की फ़िक्र भी तो कोई करने वाला होना चाहिये जिन्हें इस तरह की समस्याओं का पता ही नहीं है, और कुछेक केसों में पता होते हुये भी पापी पेट के आगे यह हाथों, पैरों की खुजली घुटने टेक देती है !!

इस पोस्ट के शीर्षक को लिखते समय मुझे उस गीत का ध्यान आ गया जिसे मैं पिछले कईं दिनों से यू-ट्यूब पर ढूंढ रहा था लेकिन मिल नहीं रहा था .. आज अचानक दिख गया, बिल्कुल पोस्ट की बातों से मैच करता हुआ...




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हेयर ड्रेसर के पास जाने से पहले

4 comments:

  1. कोई पैसा कमाने के लिये शरीर की चिंता छोड देता है और किसी के पास पैसा है इसलिये शरीर खराब कर रहा है।
    वैसे इतना तो हम कर ही सकते हैं कि बाल काटने वाले को डाई कराते वक्त दस्ताने पहनने के लिये याद दिला दें।
    मैनें सुना है कि बाल डाई कराने से नेत्रज्योति भी क्षीण हो जाती है, क्या यह सही है जी?

    प्रणाम

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  3. आभार इस जानकारी के लिये।

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