Saturday, September 19, 2009

ताकत की दवाईयों की लिस्ट

इस तरह की दवाईयों की लिस्ट यहां देने से पहले यह कहना उचित होगा कि ऐसी कोई भी so-called ताकत की दवा है ही नहीं जो कि एक संतुलित आहार से हम प्राप्त न कर सकते हों, वो बात अलग है कि आज संतुलित आहार लेना भी विभिन्न कारणों की वजह से बहुत से लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।

जो लोग संतुलित आहार ले सकते हैं, वे महंगे कचरे ( जंक-फूड – पिज़ा, बर्गर,  ट्रांसफैट्स से लैस सभी तरह का डीप-फ्राईड़ खाना आदि) के दीवाने हो रहे हैं, फूल कर कुप्पा हुये जा रहे हैं  और फिर तरह तरह की मल्टी-विटामिन की गोलियों में शक्ति ढूंढ रहे हैं। दूसरी तरफ़  जो लोग सीधे, सादे हिंदोस्तानी संतुलित एवं पौष्टिक आहार को खरीद नहीं पाते हैं , वे डाक्टरों से सूखे हुये बच्चे के लिये टॉनिक की कोई शीशी लिखने का गुज़ारिश करते देखे जाते हैं।

मैं जब कभी किसी कमज़ोर बच्चे को, महिला को देखता हूं और उसे अपना खान-पान लाइन पर लाने की मशवरा देता हूं तो मुझे बहुत अकसर इस तरह के जवाब मिलते हैं ----

क्या करें किसी चीज़ की कमी नहीं है, लेकिन इसे दाल-सब्जी से नफ़रत है, आप कुछ टॉनिक लिख दें, तो ठीक रहेगा।

( कुछ भी ठीक नहीं रहेगा, जो काम रोटी-सब्जी-दाल ने करना है वे दुनिया के सभी महंगे से महंगे टॉनिक मिल कर नहीं कर सकते)

--इसे अनार का जूस भी पिलाना शूरू किय है, लेकिन खून ही नहीं बनता ..

(कैसे बनेगा खून जब तक दाल-सब्जी-रोटी ही नहीं खाई जायेगी, यह कमबख्त अनार का जूस भर-पेट खाना खाने के बिना कुछ भी तो नहीं कर पायेगा)

विटामिन-बी कंपैल्कस विटामिन

--- जितना इस ने लोगों को चक्कर में डाला हुआ है शायद ही किसी ताकत की दवाई ने डाला हो। किसी दूसरी पो्स्ट में देखेंगे कि आखिर इस का ज़रूरत किन किन हालात में पड़ती है। इस में मौजूद शायद ही कोई ऐसा विटामिन हो जो कि संतुलित आहार से प्राप्त नहीं किया जा सकता। अपने आप ही कैमिस्ट से बढ़िया सी पैकिंग में उपलब्ध ये विटामिन आदि लेना बिल्कुल बेकार की बात है।

किसी दूसरे लेख में यह देखेंगे कि आखिर इस विटामिन की गोलियां किसे चाहिये होती हैं ?

डाक्टर, बस पांच लाल टीके लगवा दो !!

एक तो डाक्टर लोग इन लाल रंग के टीकों से बहुत परेशान हैं। क्या हैं ये टीके----इन टीकों में विटामिन बी-1, बी –6 एवं बी –12 होता है और कुछ परिस्थितियां हैं जिन में डाक्टर इन्हें लेने की सलाह देते हैं। लेकिन पता नहीं कहां से यह टीके ताकत के भंडार माने जाने लगे हैं, यह बिल्कुल गलता धारणा है।

अकसर मरीज़ यह कहते पाये जाते हैं कि मैं तो हर साल बस ये पांच टीके लगवा के छुट्टी करता हूं। बस फिर मैं फिट ------- आखिर क्यों मरीज़ों को ऐसा लगता है, यह भी चर्चा का विषय है।

मैं खूब घूम चुका हूं और अकसर बहुत कुछ आब्ज़र्व करता रहता हूं ----इस तरह की ताकत की दवाईयों की लोकप्रियता के पीछे मरीज़ कसूरवर इस लिये हैं कि जब उन्होंने कसम ही खा रखी है कि डाक्टर की नहीं सुननी तो नहीं सुननी। अगर डाक्टर मना भी करेगा तो क्या, वे कैमिस्ट से खरीद कर खुद लगवा लेंगे। और दूसरी बात यह भी है कि शायद कुछ चिकित्सकों में भी इतनी पेशेंस नहीं है, टाइम नहीं है कि वे सभी ताकत के सभी खरीददारों से खुल कर इतनी सारी बातें कर पाये। इमानदारी से लिखूं तो यह कर पाना लगभग असंभव सा काम है -----वैसे भी लोग आजकल नसीहत की घुट्टी पीने में कम रूचि रखते हैं, उन्हें भी बस कोई ऐसा चाहिये जो बस तली पर तिल उगा दे-----वो भी तुरंत, फटाफट !!

जिम में मिलने वाले पावडर

---- कुछ युवक जिम में जाते हैं और वहां से उन्हें कुछ पावडर मिलते हैं ( जिन में कईं बार स्टीरायड् मिले रहते हैं) जिन्हें खा कर वे मेरे को और आप को डराने के लिये बॉडी-वॉडी तो बना लेते हैं लेकिन इस के क्या भयानक परिणाम हो सकते हैं और होते हैं ,इन्हें वे सुनना ही नहीं चाहते। अगर इन के बारे में जानना हो तो कृपया आप Harmful effects of anabolic steroids लिख कर गूगल-सर्च करिये।

अगर कोई किसी तरह के सप्लीमैंट्स लेने की सलाह देता भी है तो पहले किसी क्वालीफाईड एवं अनुभवी डाक्टर से ज़रूर सलाह कर लेनी चाहिये।

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पिस्ते की गिरि

पौरूषता बढ़ाने वाले सप्लीमैंट्स 

6 comments:

  1. श्रद्धेय डॉक्टर प्रवीण चोपड़ा जी,
    सप्रेम नमस्कार।

    यों तो मैं जब से ब्लॉगर बना हूँ , मैंने सैकड़ों लोगों की हज़ारों रचनाएं पढ़ी हैं और पसंद भी की हैं । वे थीं भी बेहतरीन.........लेकिन कल गलती से मैंने आपको पढ़ लिया.......और सब गड़बड़ हो गया...........

    एक आलेख पढ़ा, दूसरा पढ़ा, तीसरा पढा , पढता ही गया पढता ही गया..............दान्तों वाला पुलन्दा तो मैं ऐसे पढ़ गया जैसे उसी को पढने के लिए दुनिया में जन्म लिया हो...............

    आप से पहले मैं बाबा रामदेव को ही स्वास्थ्यावतार मानता था..........लेकिन अब आप भी मेरे दिलो दिमाग में बुरी तरह घर कर गए हैं ।

    मैं आप पर बहुत कुछ लिखने के मूड में हूँ और लिखूंगा ....न सिर्फ़ लिखूंगा बल्कि आपके साक्षात दर्शन करके कुछ विशेष बातें भी करूंगा और विभिन्न नगरों में आपकी स्वास्थ्य सभाएँ भी आयोजित करूँगा............

    आप जैसे डॉक्टर अगर सभी डॉक्टर हो जाएँ तो इस देश में ही नहीं पूरी दुनिया में कहीं कोई रोग और रोगी न रहेगा.........

    आपको मेरा विनम्र प्रणाम और कृतज्ञ अभिनन्दन !


    -अलबेला खत्री
    जय हिन्द !

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  2. लोगो के भ्रम के बल पर ही दवा कम्पनियाँ चल रही है.

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  3. चोपडा जी, आप की बात ठीक है, मेने बहुत से लोग खुद देखे है, ओर उन्हे समझाना चाहा तो मुझे ऎसे देखा जेसे किसी पागल को देख लिया हो, मेने उन्हे समझाने कि कोशिश की कि भाई अगर आप का बच्चा सही खाना खाता है तो कोई फ़िक्र नही, लेकिन ऎसे लोगो के बच्चे अकसर खाने के समय उट पटंग खाते है, ओर खाने के समय नखरे करते है, इन लोगो का कोई इलाज नही.
    धन्यवाद

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  4. आदरणीय डा. साहब..

    प्रथम; आप जैसे मनीषी को सादर प्रणाम.
    मै एक विद्यार्थी हूँ, शुरू में मैथ पढ़ी,फिर स्नातक कला विषयों से की. आज कल jnu में शोधरत हूँ. कहना ये चाहता हूँ, महोदय कि- विज्ञान से और उसमे भी खासकर biology इत्यादि, से अध्ययन के स्तर पर एक दूरी सी हो गयी. रुचि थी, पर शब्दावलियाँ, मेरी समझ की सीमा रेखांकित कर देते थे. एक इन्सान , अपनी जिंदगी में कई छोटे-मोटे रोंगों से परेशान रहता है, तो वह इन चीजों के बारे में हमेशा ही जानना चाहता है,,पर विषय के अध्येता चीजों को दुरूह बनाकर प्रस्तुत करने के आदी हो चुके है. जन सामान्य तक ज्ञान पहुचे इसलिए अध्ययन-अध्यापन की संस्कृति पनपी पर यह तो अब किसी भी अध्ययन का लक्ष्य भी नहीं होता. लक्ष्य तो अन्य ही हैं.

    महोदय; मैंने बहुत सारे ब्लॉग पढ़े हैं, बहुतेरों से बहुत प्रभावित भी हुआ हूँ, पर किसी का भी ब्लॉग ऐसे नहीं पढ़ा हूँ, जैसे आज दिन भर आपका blog पढ़ता रहा. शुरू में दो-तीन पोस्ट पढीं, फिर सोच लिया कि आज ही सारी पोस्ट पढूंगा चाहे पूरा दिन ही ना लग जाए..ऐसा इसलिय ही नहीं हुआ कि आपकी लिखी सारी पोस्ट बहुत ही ज्यादा ज्ञानवर्धक है, बल्कि इसलिए क्योकि इसकी भाषा बड़ी मोहक है...इतने भारी-भरकम शब्दों के लिए जाना जाने वाला medical साइंस, आपके शब्दों में तो एक रूचिकर आलेख बन गया है, जो धीरे-धीरे ब्लॉग के रूप में हम सबके सामने आ रहा है.


    आपके लेख केवल जानकारियाँ ही नहीं दे रहे होते,,अपितु आपके समृद्ध व संवेदनशील भावलोक के दर्शन भी करा रहे होते हैं. एक जिंदगी का फलसफा भी समान्तर आपने बरबस उकेर दिया है...आपकी लेखनी ब्लॉग के शीर्षकों के दायरे से बहुधा निकल भांति-भांति के आयामों को छूती है और अंत में एक संगीतमय प्रस्तुती भी हमारा इंतजार कर रही होती है.

    मुझे आपका ब्लॉग अच्छा लगा उसकी ठोस वज़हें हैं..पहली तो जिस पेशे में आप हैं ..फिर भी समय निकाल पाना..दूसरे जहाँ बाकि डॉक्टर बस पैसे बनाने में लगे हो..आपकी सामाजिक संवेदनशीलता हतप्रभ कर देती है..तीसरे एक कठिन पेशे में होने के बावजूद आपका अन्यान्य गतिविधियों में सक्रिय रुचि और प्रखर सहभागिता...महामना गांधीजी की तरह स्वयं के प्रयोग लोगों के सामने रखना...आधुनिकता के प्रति जागरूक और उसकी पड़ताल की वैज्ञानिक अभिरूचि ...भारतीय संस्कृति के प्रति अनुराग और विभिन्न समस्याओं के प्रति एक समझदार व पेशेवर दृष्टि...

    इन सबके अलावा जो बात पहली नज़र में स्पष्ट हो जाती है, वो आपकी ईमानदारी और लिखने की रोचक और विनम्र शैली.

    सर जी. एक बात और कहना चाहूँगा...ब्लॉग-जगत भी अजीब है...एक पुरजोर मजाक लिख दो खूब टिप्पणी मिलेगी पर कुछ गंभीर लिखो तो चुनिन्दा प्रतिक्रियाएं ही मिलेंगी..जिस स्तर से आपने श्रम किया है,,उस अनुपात में निश्चित ही आपको प्रतिक्रियाएं कम मिली हैं पर प्रशंशनीय है आपका उत्साह.....कम प्रतिक्रियाओं के पीछे एक वज़ह जो मुझे समझ आई वो ये की जब व्यक्ति , शरीर और उसकी व्याधियों के बारे में पढ़ रहा होता है,,तो एक आत्मदर्शन भी सामानांतर चल रहा होता है..वह खुद की पड़ताल भी अनजाने में कर रहा होता है..लेख के अंत में वह या तो आश्वस्त हो रहा होता है या सचेत ...दोनों ही स्थितीयों में आपका मकसद तो पूरा होता ही है...

    आपको बहुत सारी शुभकामनाये....अनवरत लिखते रहें....और हाँ अपने ब्लॉग पेज पर 'ब्लॉग-अर्काईव' वाला गैजेट लगा लेंगे तो मेरे जैसे नए पाठक भी आपके आलेख प्रारंभ से पढ़ सकेंगे..अभी तो लेबल से पढ़ना होता है.....आपको एक बार फिर बधाई..

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  5. डाक्टर साहब, श्रीश प्रखर जी की टिप्पणी को ही हमारी टिप्पणी समझा जाए:)

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  6. Very useful post. Consider taking natural male enhancement supplement to eliminate sexual weakness.

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