Monday, November 9, 2009

सूचना के अधिकार कानून के लिये फीस

मैंने सूचना के अधिकार के लिये कुछ समय पहले एक आवेदन किया था ---जिस का जवाब मुझे मिला कि आप पहले सात हज़ार नौ सौ रूपये जमा करवायें क्योंकि इस तरह की सूचना जुटाने के लिये विभाग का इतना खर्च आयेगा ----कुछ वर्कर इतने दिन के लिये यही काम पर लगे रहेंगे, इसलिये उन की उतने दिनों की तनख्वाह मुझे भी भरनी होगी। खैर, मैंने इस की अपील भी की लेकिन फिर वही जवाब आ गया ।
हां, तो आज सुबह आज की पंजाब केसरी अखबार पर जब नज़र पड़ी तो इस के पृष्ट पांच पर यह खबर दिखी जिसे आप से शेयर करना चाह रहा हूं ------लीजिये, पढ़िये ...
सूचना देने के लिये केवल निर्दिष्ट राशि ही वसूली जाएगी : सी आई सी
नई दिल्ली 8 नवंबर -- एक बहुप्रतीक्षित फैसले के तहत केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि सूचना मुहैया कराने के लिये आवेदक से सूचना का अधिकार कानून में निर्दिष्ट शुल्क के अलावा कोई राशि की मांग नहीं की जा सकती। सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन करने वाले लोगों के लिये यह फैसला राहत लेकर आया है क्योंकि जब बड़ी मात्रा में सूचना मांगी जाती है तो दिल्ली पुलिस सहित कई सरकारी एजेंसियां अतिरिक्त शुल्क के तहत लाखों रूपये की राशि का मांग करती हैं. ये सरकारी एजैंसियां इसका हवाला देती हैं सूचना दिखाने के लिये काफी मानव संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत पड़ेगी या उन्हें परिवर्तित करना होगा। इसके लिये आवेदक को प्रशासन की गणना के मुताबिक कार्य दिवसों के आधार पर भुगतान करना होगा।
आप का इस खबर के बारे में क्या ख्याल है ?

6 comments:

  1. डाक्टर साहब लाखों का तो पता नहीं अलबत्ता ..जितने ज्यादा कागज होते हैं जवाब में ..उनकी प्रतियों के लिये ..राशि तो वसूली जाती ही है ..फ़िर चाहे वो सौ हो या पांच सौ

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  2. अजय जी की बात सही है
    प्रति A4 फोटो कॉपी का दो रूपया

    कौन कितनी मेहनत करता है सूचना जुटाने के लिए, उसका भुगतान आपको नहीं करना है। इसके लिए प्रत्येक विभाग में प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं, जो उनके कर्त्तव्य में शामिल है।

    बी एस पाबला

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  3. सूचना जुटाने का काम विभाग का नियमित काम है, उस के लिए धन की मांग जायज नहीं है। विभाग केवल प्रतिलिपियों के लिए निर्धारित शुल्क की मांग कर सकते हैं।

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  4. आनलाइन हस्ताक्षर करके विरोध जतायें
    बिहार सरकार ने सूचना कानून के खिलाफ गहरी साजिश की है। अगर सूचना पाने के नियमों में संशोधन हुआ तो नागरिकों को सूचना पाने के इस महत्वपूर्ण अधिकार से वंचित होना पड़ेगा।
    इसलिए आनलाइन पिटिशन पर हस्ताक्षर करके अपना विरोध अवश्य दर्ज करायें। यहां क्लिक करें-
    http://www.PetitionOnline.com/rtibihar/petition.html

    -विष्णु राजगढ़िया
    सचिव, झारखंड आरटीआइ फोरम

    संशोधन के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए लिंक http://mohallalive.com/2009/11/19/nitish-government-changed-right-to-information-act/

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