Tuesday, December 30, 2008

आज जब मैंने उस 19-20 साल के नवयुवक को देखा ....

तो मुझे पहले तो यही लगा कि वह मेरे पास किसी दांतों की तकलीफ़ के आया है लेकिन जैसे ही मुझे पता लगा कि वह हैपेटाइटिस-बी के लिये कुछ टैस्टों के लिये साइन करवाने के आया है तो मुझे बहुत बुरा लगा। दोस्तो, बुरा इसलिये लगा क्योंकि इस नवयुवक का व्यक्तित्व किसी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी से किसी भी तरह से कम नहीं था ---मुझे लगता है कि उस का कद छः फुट तो होगा ही और सामान्य स्वास्थ्य भी बहुत बढ़िया था।

मेरे पास वह युवक इसलिये आया था क्योंकि कुछ एडवांस टैस्ट जो हमारे हास्पीटल में नहीं होते, उन टैस्टों को हमारा हास्पीटल बाहर प्राइवेट लैब से करवाने की व्यवस्था करता है और उस के लिये उस की स्लिप पर चिकित्सा अधीक्षक( जो काम मैं आजकल देख रहा हूं) – की स्वीकृति के लिये वह मेरे पास आया था।

अभी मैं उस की टैस्टों वाली स्लिप पढ़ पाता जिसे फिज़िशियन ने लिखा हुआ था, इतने में ही उस का पिता कहने लगा कि इसे देखो, क्या आप को लगता है कि इसे पीलिया है ? – मैं थोड़ा चुप था – उस की बात समझने की कोशिश कर रहा था। उस लड़के ने आगे बताया कि बस कुछ समय पहले वह पंजाब गया हुआ था और वहां पर उस ने रक्त-दान किया था। और कल ही वहां से फोन आया है कि मेरे रक्त में हैपेटाइटिस-बी के विषाणु ( वायरस) पाये गये हैं।

उस लड़के एवं उस के पिता की बातचीत से यही लग रहा था कि वे समझ रहे हैं कि लड़के ने रक्त दान किया है और इसी की वजह से वह इस हैपेटाइटिस-बी की चपेट में आ गया है। ऐसा मैंने पहले भी कुछ हैपेटाइटिस-बी के मरीज़ों के मुंह से सुना था और एक-दो एच.आई.व्ही संक्रमित व्यक्तियों से भी ऐसा ही कुछ सुन रखा था।

मुझे उस लड़के के साथ पूरी सहानुभूति थी --- बहुत बुरा लगता है जब हम लोग किसी इतने कम उम्र के इतने हृष्ट-पुष्ट इंसान को मिलते हैं जिसे अभी अभी पता चला हो कि उसे हैपेटाइटिस-बी की इंफैक्शन है। इसलिये मैंने उसे एवं उस के पिता को 10 मिनट लगा कर बहुत अच्छी तरह से इस के बारे में बता दिया।

दरअसल होता यूं है कि जब भी कोई रक्त दान शिविर लगता है तो रक्त-दाताओं का पता एवं फोन नंबर इत्यादि नोट किया जाता है – रक्त को इक्ट्ठा करने के बाद उस की यह जांच की जाती है कि उस में एचआईव्ही, हैपेटाइटिस बी, हैपेटाइटिस सी एवं मलेरिया जैसे रोगों के कीटाणु तो नहीं है ---अगर किसी रक्त दाता के रक्त में इस तरह का कोई संक्रमण पाया जाता है तो उस रक्त को नष्ट कर दिया जाता है और उस रक्त दाता को सूचित कर दिया जाता है । इस नौजवान वाले केस में भी यही हुआ था।

जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं कि लड़का बहुत ही स्वस्थ था --- उस का पिता पहले ही से मेरे को जानता था । उस के जो टैस्ट अभी करवाने के लिये फ़िज़िशियन ने लिखा था उस के बारे में मैंने उन्हें समझाया कि ये टैस्ट केवल इसलिये हैं कि लड़के के रक्त की पूरी तरह से जांच की जा सके --- हैपेटाइटिस बी की दोबारा जांच होगी, हैपेटाइटिस सी की भी होगी --- क्योंकि इन दोनों संक्रमणों के फैलने का रूट एक जैसा ही है। ये दोनों ही या तो संक्रमित सिरिंजों एवं सूईंयों के द्वारा, या संक्रमित रक्त के द्वारा अथवा संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित करने से ही फैलते हैं।

मुझे उस नवयुवक से ये सब बातें करने के बाद यह नहीं लगा कि वह ऐसे किसी कारण के बारे में कोई ठीक से हिस्ट्री दे पाया है --- न तो उसे कभी रक्त ही चढ़ा था, न ही उसे कभी इंजैक्शन वगैरा लगने का ध्यान था और यौन-संबंधों के बारे में मैंने उस की उम्र को देखते हुये कुछ ज़्यादा प्रोब करना ठीक नहीं समझा ।

मैंने उसे समझाया कि ऐसा नहीं कि यह जो तकलीफ़ हो गई है यह लाइलाज है --- अभी तुम्हारे सारे टैस्ट हो रहे हैं—उस के बाद यह निर्णय होगा कि तुम्हारा क्या इलाज चलेगा—कोई चिंता की बात नहीं है।

सोचता हूं कि हमारे लिये भी किसी मरीज़ को बिल्कुल एक तकिया कलाम की ही तरह यह कह देना कितना आसान होता है कि यार, चिंता न करो – सब ठीक होगा। शायद कईं बार मरीज़ की मनोस्थिति को भांपते हुये ये शब्द कहने भी बहुत ज़रूरी होते हैं।

यह पाठकों की सूचना के लिये बताना चाहता हूं कि हमारे देश की लगभग दो फीसदी जनसंख्या इस हैपेटाइटिस-बी के वायरस की कैरियर है – इसे हम लोग कहते हैं एसिंपटोमैटिक कैरियर्ज़ – अर्थात् ऐसे लोग जिन के रक्त में हैपेटाइटिस बी की वायरस तो है लेकिन उन्हें इस से संबंधित बीमारी अभी नहीं है ---- और अभी ही क्यों, कईं बार तो कुछ लोग बिना किसी तकलीफ़ के सारी उम्र केवल कैरियर ( संवाहक) ही रहते हैं --- उन्हें तो इस से कोई तकलीफ़ होती नहीं लेकिन बेहद दुःखद बात यह है कि वे इस वायरस को किसी भी दूसरे व्यक्ति को देने में पूरे सक्षम होते हैं – चाहे तो अपने रक्त के द्वारा, अपनी लार के द्वारा अथवा यौन-संबंधों के द्वारा।

उस युवक के बारे में बहुत बुरा इसलिये भी लगा कि अभी उस की इतनी छोटी उम्र है ---अभी पूरी उम्र पड़ी है उस के आगे --- अगर वह एसिंपटोमैटिक कैरियर भी है ( asymptomatic carrier of Hepatitis B virus) – अगर टैस्टों से इस बात का पता चला – तो भी उपरोक्त कारणों की वजह से एक बहुत बड़ी परेशानी तो हो गई ---सारी उम्र खौफ़ के साये में जीना पड़ेगा --- I really felt very very bad for this youngman – He was the picture of perfect health !!

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इन नौजवान में हैपेटाइटिस-बी का वॉयरस आया कहां से --- अब इस के बारे में क्या कहा जाये ---जब तक किसी से उचित हिस्ट्री प्राप्त नहीं होती, कुछ कहा नहीं जा सकता – इतना तो तय है कि आती तो वॉयरस रक्त के अथवा किसी अन्य बॉडी फ्लूयड़ ( body fluilds ) के माध्यम से ही ।

हैपेटाइटिस बी से बचाव के टीके का ध्यान आ रहा है --- अकसर लोग इसे कितना लाइटली लेते हैं --- लेकिन देखिये जिस किसी को भी यह इंफैक्शन हो जाती है उस की तो सारी ज़िंदगी ही बदल जाती है।

उस नवयुवक की लंबी स्वस्थ ज़िंदगी के लिये मेरी ढ़ेरों शुभकामनायें एवं आशीष !!

4 comments:

  1. बहुत सही लिखा है.. मैंने इसका टीका जैसे ही मौका मिला था लगवा लिया था..

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  2. बडिया जानकारी के लिये शुक्रिया नववर्ष मुबारक हो

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  3. हमेशा की तरह फिर से एक अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया। साथ ही एक बात याद आ गई हो सके तो प्लीज इसका जवाब दे देना जी। बात ये है कि मेरी छोटी बहन को ब्रेन टयूमर था उसका आपरेशन " राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली" में हुआ था। तब उसको शायद दो यूनिट खून चढाया गया था। वैसे वह अब ठीक है। पर उसके बाद उसके एक जगह(गुदे के पास) फुंसी हो जाती हैं जो 10-15 दिन बहुत ही परेशान कर देती हैं। यह आपरेशन के बाद से ही हो रहा है। क्या इसका कोई रिशता है उस खून से। जो उसे चढाया गया था। जवाब का इंतजार रहेगा सर।

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  4. बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने, मुझे भी सहनुभुति है इस नोजवान से.
    धन्यवाद

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